अमीबा अपना भोजन कैसे प्राप्त करता है-
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अमीबा अपना भोजन कैसे प्राप्त करता है-

अमीबा प्राणीसम भोजी विधि से पोषण करता है। यह एक सर्वाहारी जंतु है। इसका भोजन जल में तैरते हुए जीवाणु, शैवाल, डायटम आदि के सूक्ष्म जीवों के रूप में होता है।

इन सूक्ष्म जीवों के निगलने (Ingestion) में जो विधि अपनाई जाती है, उसे फैगोसाइटॉसिस (Phagocytosis) कहते हैं। यह अपने भोजन को शरीर के किसी भी सतह से कूटपाद द्वारा ग्रहण करता है। पोषण विधि के निम्नलिखित चरण हैं.

अंतर्ग्रहण, पाचन, अवशोषण वहिक्षेपण। जब यह किसी भोज्य पदार्थ के संपर्क में आता है तो उसे पकड़ने के लिए कूटपाद बनावन् उसकी ओर बढ़ता है तो यह कूटपादों (Pseudopodia) द्वारा चारों ओर से घेर लेता है जिससे एक प्यालेनुमा रचना बनती जिसे फूड कप (Food cup) कहते हैं।

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अमीबा अपना भोजन कैसे प्राप्त करता है-

बाद में कूटपाद अपने सिरों पर परस्पर संगलित होकर खाद्य रिक्तिका (Food vacoule) का निर्माण करके इसे एंडोप्लाज्म में डाल देते हैं। अमीबा में अंतः कोशिकीय पाचन (Intracellular Digestion) होता है।

भोजन का पाचन खाद्य रिक्तिका (Food Vacuole) में होता है। भोजन पचाने के लिए ट्रिप्सिन, पेटिसन, एमाइलेज एंजाइम पाये जाते हैं। खाद्य रिक्तिका में पचा हुआ भोजन एंडोप्लाज्म में विसरित (Diffuse) हो जाता है। बाद में पचा हुआ भोजन शरीर (Cell) के अंदर जीव द्रव्य (प्रोटोप्लाज्म) में बदल जाता है। शरीर में यदि भोजन की अधिक मात्रा पाई जाती है।

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तो यह ग्लाइकोजन, पैरामाइलोन तथा लिपिड्स आदि के रूप में संचित कर ली जाती है। अपच पदार्थ इसमें अपच पदार्थ को बाहर निकालने के लिए विशेष एनस नहीं पाया जाता है। अपच भोजन (भोजन अविशेष) शरीर के किसी भी स्थान से बाहर निकाल दिया जाता है। इस प्रक्रिया को वहिक्षेपण (Egestion) कहते हैं।

अमीबा अपना भोजन एंडोसाइटोसिस (endocytosis) विधि द्वारा करता है .अमीबा के पादाभ भोजन को पकड़ने व निगलने का कार्य करते हैं। अमीबा के भोज्य सूक्ष्म जीव खाद्य धानी में फँसने पर पाचक रसों द्वारा सरल. भागों में बदल दिए जाते हैं और इस प्रकार पचा हुआ खाद्य धीरे-धीरे अवशोषित कर लिया जाता है जो अमीबा की वृद्धि, रख-रखाव एवं जनन में उपयोग में लाया जाता है। बिना पचा हुआ अपशिष्ट खाद्य धानी के द्वारा उत्सर्जित कर दिया जाता है।

अमीबा जल में पाए जाने वाले सूक्ष्म जीवों को अपना आहार बनाता है । वह अपने भोजन को किसी भी सत्तह से कूटपाद (pseudopodia, false feet) के द्वारा ग्रहण कर लेता है। जब भोज्य पदार्थ उसके संपर्क में आता है तो वह अपने कूटपादों से उसे चारों ओर से घेर लेता है और वह प्यालेनुमा रचना के द्वारा करता है जिसे खाद्यधानी या रिकि्तका कहते हैं ।

इस तरह खाद्य पदार्थ कोशिका के भीतर एक थैली में बंद हो जाता है। अंतकोशिकीय पाचन प्रणाली से भोजन का पाचन एंजाइमों की सहायता से खाद्यधानी में होता है । पचा हुआ भोजन विसरण प्रक्रिया से कोशिका द्रव में जाकर अवशोषित हो जाता है जिसे स्वांगीकरण कहते हैं । जो भोजन पच नहीं पाता वह शारीरिक सतह के माध्यम से बाहर निकल जाता है। इसे वाह्य क्षेपण कहते हैं।

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