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कक्षा 11 जीव जगत-

1-जीव जगत

अरस्तू ने सभी जन्तुओं को इनैइमा तथा एनेइमा में तथा पादपों को शाक , झाड़ी तथा वृक्ष में विभाजित किया।

द्विजगत पद्धति : यह वर्गीकरण की एक पद्धति है जिसमे संसार के सभी जीवों को ऐनिमिलिया तथा प्लान्टी दो जगतो में विभाजित किया।  यह प्रणाली अरस्तु ने प्रचलित की।  परन्तु अभिलेख के रूप में केरोलस लिनियस ने अपनी पुस्तक systema naturae में उल्लेखित किया।

तीन जगत पद्धति : यह पद्धति अर्नेस्ट हिकल ने 1866 में प्रस्तुत की थी।  इस पद्धति के अनुसार सभी सजीवों को जन्तु जगत पादप जगत तथा प्रोटिस्य तीन जगतो में बांटा गया।

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द्विजगत व तीन जगत पद्धति दोषयुक्त है , इसलिए इन दोषों को दूर करने के लिए पाँच जगत पद्धति प्रस्तावित की गई।

पाँच जगत प्रणाली : सन 1969 में आर.एच. व्हिटकर ने वर्गीकरण की पाँच जगत प्रणाली प्रस्तुत की। पाँच जगत प्रणाली में जीवों को वर्गीकृत करने का आधार कोशिका संरचना की जटिलता शारीरिक संगठन पोषण विधि व जीवन चक्र को रखा गया।  व्हिटकर द्वारा प्रस्तावित पांच जगत निम्न है –

1. मोनेरा (Monera) : इस जगत में जीवाणु , नीलरहित शैवाल , माइक्रोप्लाज्मा आदि (प्रोकेरियोटिक) जीवों को रखा गया है।

2. प्रॉटिस्टा (protesta) : इस जगत में एक कोशिकीय युकेरियोटिक जीवों को सम्मिलित किया गया है।

जैसे : प्रोटोजोआ , युग्लिना

3. कवक (fungi) : इस जगत में काइटिन युक्त कोशिका भित्ति वाले जीवों को रखा गया है , ये ऐसे जीव होते है जो अवशोषण द्वारा पोषण प्राप्त करते है।

4. प्लान्टी (plantae) : इस जगत में बहुकोशिकीय हरे पादपों को रखा गया है।

5. एनेमिलिया (animalia) : इस जगत में एक कोशिकीय व बहुकोशिकीय सभी जन्तुओं को रखा गया है।

कक्षा 11 जीव जगत-
कक्षा 11 जीव जगत-

1. मोनेरा जगत (प्रोकैरियोटिक):

इसे पुनः आर्कीबैक्टीरिया (Archaebacteria) और यूबैक्टीरिया(Eubacteria ) में बाँटा जाता है, जिनमें से आर्कीबैक्टीरिया अधिक प्राचीन है |

a.आर्कीबैक्टीरिया: इनमें से अधिकांश स्वपोषी (Autotrophs) होते हैं और वे अपनी ऊर्जा चयापचय क्रिया (Metabolic Activities), रासायनिक ऊर्जा के स्रोतों (जैसे-अमोनिया,मीथेन,और हाइड्रोजन सल्फाइड  गैस) के आक्सीकरण से प्राप्त करते हैं |

इन गैसों की उपस्थिति में ये अपना स्वयं का अमीनो अम्ल बना सकते हैं | इन्हें तीन वर्गों में बाँटा जाता है- मेथोनोजेंस (मीथेन का निर्माण करते है), थर्मोएसिडोफिल्स (अत्यधिक उष्ण और अम्लीय पर्यावरण के प्रति अनुकूलित) तथा हैलोफिल्स (अत्यधिक लवणीय पर्यावरण में बढ़ने वाले)|  

b.यूबैक्टीरिया:  इनमें प्रायः झिल्ली से घिरे हुए केन्द्रक आदि कोशिकांग(Organelles) नहीं पाए जाते हैं | न्युक्लियोएड (Nucleoid) एकमात्र गुणसूत्र की तरह कार्य करता है | प्रकाश संश्लेषण व इलेक्ट्रानों का हस्तांतरण (Transfer) प्लाज्मा झिल्ली पर होता है |

कक्षा 11 जीव जगत-
कक्षा 11 जीव जगत-

3. कवक जगत

a. इसमें वे पौधे शामिल हैं जो प्रकाश संश्लेषण (photosynthetic) क्रिया द्वारा अपना भोजन स्वयं तैयार नहीं कर पाते हैं |

b. ये परपोषी (Heterotrophic) और यूकैरियोटिक होते हैं |

c. कुछ कवक परजीवी(Parasites) होते हैं और जिस पौधे पर रहते हैं उसी   से अपने लिए पोषक पदार्थ प्राप्त करते हैं |

d. कुछ कवक, जैसे पेंसीलियम, अपघटक (Decomposer) होते हैं और मृत पदार्थों से पोषक तत्व प्राप्त करते हैं |

e. इनमें भोजन को ग्लाइकोजन के रूप में संचयित (Store) किया जाता है|

f.  कवकों के उदाहरण यीस्ट, मशरूम, दीमक आदि हैं |

4. पादप जगत

a. इसमें बहुकोशिकीय पौधे शामिल होते हैं|

b. ये यूकैरियोटिक होते हैं |

c. इनमें कोशिका भित्ति (Cell wall) पाई जाती है|

d. इनमें टोनोप्लास्त झिल्ली से घिरी हुई एक केन्द्रीय रिक्तिका/ रसधानी (vacuole) पाई जाती है |

e. ये पौधों के लिए भोजन को स्टार्च और लिपिड्स के रूप में संचय (Store) करते हैं|

g. इनमें लवक (Plastids) उपस्थित होते हैं|

h. ये स्वपोषी होते है अर्थात् अपना भोजन स्वयं तैयार करते हैं |

i. पादपों की वृद्धि असीमित होती है |

j. शाखाओं के कारण इनका आकार अनिश्चित होता है |

कक्षा 11 जीव जगत-
कक्षा 11 जीव जगत-

5. जंतु जगत

a. जंतुओं में भित्ति रहित (wall less) यूकैरियोटिक कोशिकाएं पाई जाती हैं |

b. ये परपोषी होते है|

c. जंतुओं की वृद्धि सीमित होती है |

d. जंतुओं में प्रायः एक निश्चित आकार व रूप पाया जाता है |

e. ज्यादातर जंतु चलायमान (Mobile) होते हैं |     

f. जन्तुओं में कोशिका, ऊतक (Tissue), अंग व अंग प्रणाली के क्रमिक स्तर पाए जाते हैं |

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