जन संघर्ष और आंदोलन
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1-लामबंदी और संगठन

राजनैतिक पार्टियाँ: जब कोई संगठन राजनैतिक प्रक्रिया में सीधे तौर पर भागीदारी करता है तो उसे राजनैतिक पार्टी कहते हैं। राजनैतिक पार्टियाँ सरकार बनाने के उद्देश्य से चुनाव लड़ती हैं।

दबाव समूह: जब कोई संगठन राजनैतिक प्रक्रिया में परोक्ष रूप से भागीदारी करता है तो उसे दबाव समूह कहते हैं। सरकार बनाना कभी भी किसी दबाव समूह का लक्ष्य नहीं होता है।

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2-दबाव समूह और आंदोलन:

जब समान पेशे, रुचि, महात्वाकांछा या मतों वाले लोग किसी साझा लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये एक मंच पर आते हैं तो दबाव समूह का निर्माण होता है।

ऐसे समूह अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिये आंदोलन करते हैं। जरूरी नहीं कि हर दबाव समूह जन आंदोलन करे। कई दबाव समूह ऐसे भी होते हैं जो सिर्फ अपने छोटे से समूह में काम करते हैं।

जन आंदोलन के उदाहरण: नर्मदा बचाओ आंदोलन, सूचना के अधिकार के लिये आंदोलन, शराबबंदी के लिये आंदोलन, नारी आंदोलन, पर्यावरण आंदोलन।

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3-वर्ग विशेष के हित समूह और जन सामान्य के हित समूह

वर्ग विशेष के हित समूह: जब कोई दबाव समूह किसी खास वर्ग या समूह के हितों के लिये काम करता है तो उसे वर्ग विशेष का समूह कहते हैं। उदाहरण: ट्रेड यूनियन, बिजनेस एसोसियेशन, प्रोफेशनल (वकील, डॉक्टर, शिक्षक, आदि) के एसोसियेशन।

ऐसा समूह किसी खास वर्ग की बात करता है। जैसे शिक्षक यूनियन केवल शिक्षकों के हितों की बात करता है। ऐसे समूह का मुख्य उद्देश्य होता है अपने सदस्यों के हितों की रक्षा करना और उन्हें बढ़ावा देना।

जन सामान्य के हित समूह: जब कोई दबाव समूह सर्व सामान्य जन के हितों की रक्षा करने का काम करता है तो उसे जन सामान्य का हित समूह कहते हैं। इस तरह के समूह का उद्देश्य होता है पूरे समाज के हितों की रक्षा करना। उदाहरण: ट्रेड यूनियन, स्टूडेंट यूनियन, एक्स आर्मीमेन एसोसियेशन, आदि।

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4-दबाव समूह और आंदोलन:

दबाव समूह का निर्माण तब होता है जब समान पेशे, रुचि, महात्वाकांछा या मतों वाले लोग किसी समान लक्ष्य की प्राप्ति के लिये एक मंच पर आते हैं।

इस प्रकार के समूह अपने उद्देश्य की प्राप्ति के लिये आंदोलन करते हैं। यह जरूरी नहीं कि हर दबाव समूह जन आंदोलन ही करे। कई दबाव समूह केवल अपने छोटे से समूह में ही काम करते हैं।

जन आंदोलन के कुछ उदाहरण हैं: नर्मदा बचाओ आंदोलन, सूचना के अधिकार के लिये आंदोलन, शराबबंदी के लिये आंदोलन, नारी आंदोलन, पर्यावरण आंदोलन।

5-वर्ग विशेष के हित समूह और जन सामान्य के हित समूह

वर्ग विशेष के हित समूह: जो दबाव समूह किसी खास वर्ग या समूह के हितों के लिये काम करते हैं उन्हें वर्ग विशेष के समूह कहते हैं। उदाहरण: ट्रेड यूनियन, बिजनेस एसोसियेशन, प्रोफेशनल (वकील, डॉक्टर, शिक्षक, आदि) के एसोसियेशन। ऐसे समूह किसी खास वर्ग की बात करते हैं;

जैसे मजदूर, शिक्षक, कामगार, व्यवसायी, उद्योगपति, किसी धर्म के अनुयायी, आदि। ऐसे समूहों का मुख्य उद्देश्य होता है अपने सदस्यों के हितों को बढ़ावा देना और उनके हितों की रक्षा करना।

जन सामान्य के हित समूह: जो दबाव समूह सर्व सामान्य जन के हितों की रक्षा करते हैं उन्हें जन सामान्य के हित समूह कहते हैं। ऐसे दबाव समूह का उद्देश्य होता है पूरे समाज के हितों की रक्षा करना। उदाहरण: ट्रेड यूनियन, स्टूडेंट यूनियन, एक्स आर्मीमेन एसोसियेशन, आदि।

6-राजनीति पर दबाव समूह और आंदोलन का प्रभाव:

जन समर्थन: दबाव समूह और उनके आंदोलन अपने लक्ष्य और क्रियाकलापों के लिये जनता का समर्थन जुटाने की कोशिश करते हैं। इसके लिये वे तरह तरह के रास्ते अपनाते हैं,

जैसे कि जागरूकता अभियान, जनसभा, पेटीशन, आदि। कई दबाव समूह जनता का ध्यान खींचने के लिए मीडिया को भी प्रभावित करने की कोशिश करते हैं।

प्रदर्शन: प्रदर्शन करना किसी भी दबाव समूह का एक आम तरीका है। प्रदर्शन के दौरान हड़ताल भी किये जाते हैं ताकि सरकार के काम में बाधा उत्पन्न की जा सके। हड़ताल और बंद के द्वारा सरकार पर दबाव बनाया जाता है ताकि सरकार किसी मांग की सुनवाई करे।

लॉबी करना: कुछ दबाव समूह सरकारी तंत्र में लॉबी भी करते हैं। इसके लिये अक्सर प्रोफेशनल लॉबिस्ट की सेवा ली जाती है। कई बार इश्तहार भी चलाये जाते हैं। इन समूहों में से कुछ लोग आधिकारिक निकायों और कमेटियों में भी भाग लेते हैं ताकि सरकार को सलाह दे सकें। इस तरह के समूह के उदाहरण हैं: एसोचैम और नैसकॉम।

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7-दबाव समूह के प्रभाव का मूल्यांकन-

बहुत से लोग दबाव समूह के विरोध में तर्क देते हैं। कई लोगों का मानना है कि दबाव समूह समाज के छोटे से वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं इसलिये ऐसे समूह को सुनते समय सावधानी बरतनी चाहिए।

इन लोगों का मानना है कि लोकतंत्र किसी छोटे वर्ग के संकीर्ण हितों के लिए काम नहीं करता बल्कि पूरे समाज के लिए काम करता है। जहाँ राजनैतिक पार्टी को जनता को जवाब देना पड़ता है, दबाव समूह पर ऐसी बात लागू नहीं होती है।

कुछ लोग यह तर्क भी देते हैं कि दबाव समूह की सोच का दायरा बड़ा हो ही नहीं सकता। कई बार कोई बिजनेस लॉबी या अंतर्राष्ट्रीय एजेंसी कुछ दबाव समूहों को बढ़ावा देती रहती हैं।

कई लोग ऐसे भी हैं जो दबाव समूह का समर्थन करते हैं। ऐसे लोगों को लगता है कि लोकतंत्र की जड़ें जमाने के लिए सरकार पर दबाव डालना सही होता है। राजनैतिक पार्टियाँ अक्सर सत्ता हथियाने के चक्कर में जनता के असली मुद्दों की अवहेलना करती हैं। ऐसी स्थिति में दबाव समूह उन्हें नींद से जगाने का काम करते हैं।

हम यह कह सकते हैं कि दबाव समूह विभिन्न राजनैतिक विचारधाराओं में संतुलन बनाने का काम करते हैं और अक्सर लोगों की असली समस्याओं को उजागर करते हैं।

8-महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर-

प्रश्न 1:दबाव समूह और आंदोलन राजनीति को किस तरह प्रभावित करते हैं?

उत्तर: दबाव समूह और आंदोलन निम्न तरीकों से राजनीति को प्रभावित करते हैं:

  • अपने मुद्दे के लिए जन समर्थन जुटाकर।
  • विरोध प्रदर्शन द्वारा सरकार पर दबाव बनाकर।
  • लॉबी बनाकर।

प्रश्न 2:दबाव समूहों और राजनीतिक दलों के आपसी संबंधों का स्वरूप कैसा होता है, वर्णन करें।

उत्तर: सामान्यतया दबाव समूहों और राजनीतिक दलों के बीच कोई प्रत्यक्ष रिश्ता नहीं होता है। वे अक्सर एक दूसरे के विपरीत मान्यता रखते हैं। लेकिन दोनों के बीच संवाद और मोलभाव चलता रहता है। राजनीतिक दलों के कई नए नेता दबाव समूहों से आते हैं।

प्रश्न 3:दबाव समूहों कि गतिविधियाँ लोकतांत्रिक सरकार के कामकाज में कैसे उपयोगी होती हैं?

उत्तर: दबाव समूहों की गतिविधियों से लोकतंत्र की जड़े मजबूत करने में मदद मिलती है। ऐसे समूह शक्तिशाली बिजनेस लॉबी के खिलाफ आम जनता की आवाज बुलंद करने में मदद करते हैं।

कई बार दबाव समूहों का क्रियाकलाप विध्वंसकारी लगता है लेकिन इन क्रियाकलापों से शक्तिशाली शासक वर्ग और व्यवसायी वर्ग तथा शक्तिहीन आम नागरिक के बीच संतुलन बनाने में मदद मिलती है।

प्रश्न 4:दबाव समूह क्या हैं? कुछ उदाहरण बताइए।

उत्तर: वैसे संगठन जो सरकार की नीतियों को प्रभावित करते हैं उन्हें हम दबाव समूह कहते हैं। एक दबाव समूह किसी राजनीतिक दल से भिन्न होता है क्योंकि यह जनता के लिए जवाबदेह नहीं होता। दबाव समूह की शासन में कोई भागीदारी नहीं होती है। नर्मदा बचाओ आंदोलन, ट्रेड यूनियन, वकीलों का संगठन, आदि दबाव समूह के उदाहरण हैं।

प्रश्न 5:दबाव समूह और राजनीतिक दल में क्या अंतर है?

उत्तर: राजनीतिक दल सीधे रूप से जनता के लिए जवाबदेह होते हैं जबकि दबाव समूह के साथ ऐसा नहीं है। एक राजनीतिक दल या तो सत्ता में होता है या सत्ता हासिल करने के लिए काम करता है, लेकिन दबाव समूह के साथ ऐसा नहीं है।

प्रश्न 6:जो संगठन विशिष्ट सामाजिक वर्ग जैसे मजदूर, कर्मचारी, शिक्षक और वकील आदि के हितों को बढ़ावा देने की गतिविधियाँ चलाते हैं उन्हें ………………कहा जाता है।

उत्तर: वर्ग विशेष के हित समूह

प्रश्न 7:निम्नलिखित में से किस कथन से स्पष्ट होता है कि दबाव समूह और राजनीतिक दल में अंतर होता है:

  1. राजनीतिक दल राजनीतिक पक्ष लेते हैं जबकि दबाव समूह राजनीतिक मसलों की चिंता नहीं करते।
  2. दबाव समूह कुछ लोगों तक ही सीमित होते हैं जबकि राजनीतिक दल का दायरा ज्यादा लोगों तक फैला होता है।
  3. दबाव समूह सत्ता में नहीं आना चाहते जबकि राजनीतिक दल सत्ता हासिल करना चाहते हैं।
  4. दबाव समूह लोगों की लामबंदी नहीं करते जबकि राजनीतिक दल करते हैं।

उत्तर: दबाव समूह सत्ता में नहीं आना चाहते जबकि राजनीतिक दल सत्ता हासिल करना चाहते हैं।

प्रश्न 8: सूची 1 का सूची 2 से मिलान कीजिए।

सूची 1सूची 2
1. किसी विशेष तबके या समूह के हितों को बढ़ावा देने वाले संगठनa) आंदोलन
2. जन सामान्य के हितों को बढ़ावा देने वाले संगठनb) राजनीतिक दल
3. किसी सामाजिक समस्या के समाधान के लिए चलाया गया एक ऐसा संघर्ष जिसमें सांगठनिक संरचना हो भी सकती है और नहीं भी।c) वर्ग विशेष के हित समूह
4. ऐसा संगठन जो राजनीतिक सत्ता पाने की गरज से लोगों को लामबंद करता है।d) लोक कल्याणकारी हित समूह

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