Ncrt Class 10 जल संसाधन प्रबंधन सामाजिक विज्ञान

बहुउद्देशीय नदी परियोजनाएं और समन्वित जल संसाधन प्रबंधन

हम जल संसाधन प्रबंधन का प्रोटेक्शन(Protection) और प्रबंधन कैसे करें? पुरातत्व वैज्ञानिक को ऐतिहासिक अभिलेख/दस्तावेज(Record) बताते हैं कि हमने प्राचीन काल से सिंचाई के लिए पत्थरों और मलबे से बांध, जलाशय अथवा झिलो के तटबंध और नहरों जैसी उत्कृष्ट जलीय कृतियां बनाई है। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि हमने यह परिपाटी आधुनिक भारत में भी जारी रखी है और अधिकतर नदियों(River) के बेसिनों में बांध बनाएं है।

प्राचीन भारत में जलीय कृतियां

ईशा से एक शताब्दी पहले इलाहाबाद(Allahabad) के नजदीक रिंगवेरा में गंगा नदी की बाढ़ के जल को संरक्षित (Protected) करने के लिए एक उत्कृष्ट जल्द संग्रह तंत्र बनाया गया था

  • चंद्रगुप्त मौर्य के टाइम(Time) बृहत स्तर पर बांध, झील और सिंचाई तंत्रों का निर्माण (Construction) करवाया गया।
  • कलिंग (ओडिशा) नागार्जुनकोंडा (आंध्र प्रदेश) बेनूर (Karnataka) और कोल्हापुर (महाराष्ट्र) में उत्कृष्ट सिंचाई तंत्र होने के प्रूफ(Proof) मिलते हैं।
  • अपने टाइम(Time) की सबसे बड़ी कृत्रिम झीलों में से एक, भोपाल(Bhopal) झील, 11वीं शताब्दी में बनाई गई।
  • 14वीं शताब्दी में इलतुमिस ने दिल्ली में सिरी फोर्ट क्षेत्र में जल की सप्लाई(Supply) के लिए हौज खास (एक विशिष्ट तालाब) बनवाया

डाईग विजडम, सी एस ई, 1997
जल संसाधन प्रबंधन सामाजिक विज्ञान एनसीआरटी कक्षा-10, पाठ-3
हीराकुंड बांध

बांध द्वारा जल संरक्षण

बांध क्या है और वे हमें जल संसाधन प्रबंधन प्रोटेक्शन (Protection) व जल संसाधन प्रबंधन में कैसे सहायक है? परंपरागत बांध, नदियों(River) और वर्षा जल को इकट्ठा करके बाद में उसे खेतों(Farm) की सिंचाई के लिए उपलब्ध करवाते थे। आजकल बांध सिर्फ सिंचाई के लिए नहीं बनाए जाते अपितु उनका उद्देश्य इलेक्ट्रिसिटी(Electricity) उत्पादन, घरेलू और औद्योगिक यूज(Use), जल आपूर्ति, बाढ़ नियंत्रण, मनोरंजन, आंतरिक नोचालय और मछली(Fish) पालन भी है। इसलिए बांधों को बहुउद्देशीय परियोजनाएं भी कहा जाता है यहां एकत्रित जल के अनेको यूज(Use) समन्वित होते हैं। उदाहरण के तौर पर सतलुज-ब्यास बेसिन में भाखड़ा-नांगल परियोजना जल इलेक्ट्रिसिटी(Electricity) उत्पादन और सिंचाई दोनों के काम में आती है। इसी प्रकार महानदी बेसिन में हीराकुंड परियोजना जल संरक्षण और बाढ़ नियंत्रण(Control) का समन्वय है।

स्वतंत्रता के बाद शुरू की गई समन्वित जल संसाधन प्रबंधन मैनेजमेंट(Management) उपागम पर आधारित बहुउद्देशीय परियोजनाओं को उपनिवेशन काल में बनी बाधाओं को पार करते हुए देश(Country) को विकास और समृद्धि के रास्ते पर ले जाने वाले वाहन(Vehicle) के रूप में देखा गया। जवाहरलाल नेहरू प्राऊड(Proud) से बांधो को ‘आधुनिक भारत के मंदिर’ कहां करते थे। उनका मानना था कि इन परियोजनाओं के चलते कृषि(Krashi) और ग्रामीण अर्थव्यवस्था, औद्योगिकरण और नगरीय अर्थव्यवस्था समन्वित रूप से डेवलपमेंट (Development) करेगी। पिछले कुछ वर्षों में बहुउद्देशीय परियोजनाएं और बड़े बांध कई कारणों से परिनिरीक्षण और विरोध के विषय(Subject) बन गए है।

जल संसाधन प्रबंधन का प्रकृति पर प्रभाव

नदियों पर बांध बनाने और उनका भाव नियंत्रित करने से उनका प्राकृतिक(Natural) भाव अवरुद्ध होता है, जिसके कारण तलछट(Sediment) भाव कम हो जाता है और अत्यधिक तलछट जलाशय की तली पर जमा होता रहता है जिससे नदी का तल अधिक चट्टानी हो जाता है और नदी जलीय जीव आवासों में भोजन(Food.) की कमी हो जाती है। बांध नदियों(River) को टुकड़ों में बांट देते हैं जिससे विशेषकर अंडे देने की ऋतु में जलीय जीवो का नदियों में स्थानांतरण अवरुद्ध हो जाता है। बाढ़ के मैदान(field) में बनाए जाने वाले जलाशयों द्वारा वहां मौजूद वनस्पति (Vegetation) और मिट्टी जल में डूब जाती है जो कालांतर में अपघटित(Decomposed) हो जाती है।

बहुउधेशिय परियोजनाएं(Projects) और बड़े बांध(Dam) नए पर्यावरण(environment) आंदोलन जैसे- ‘नर्मदा बचाओ आंदोलन(protest)’ और ‘टिहरी बांध आंदोलन’ के कारण भी बन गए हैं। इन परियोजनाओं(Projects) का विशेष मुख्य रूप से स्थानीय(Local) समुदायो की वृहद स्तर पर विस्थापन के कारण हैं। आमतौर पर स्थानीय लोगों को उनकी जमीन, आजीविका और संसाधन (Resources) से लगाव एवं नियंत्रण देश की बेहतरी के लिए कुर्बान करना पड़ता है।

जल संसाधन प्रबंधन परियोजना

इसलिए, अगर स्थानीय लोगों को इन परियोजनाओं का लाभ(Banefit) नहीं मिल रहा है तो किसको मिल रहा है? शायद जमींदारों और बड़े किसानों को या उद्योगपतियों और कुछ नगरी केंद्रों(Centers) को। गांव(Village) के भूमिहीनो को लीजिए, क्या वे वास्तव में ऐसी परियोजनाओं से लाभ उठाते हैं? सिंचाई ने कई एरिया (Area) में फसल प्रारूप परिवर्तित कर दिया है जहां किसान जलगहन और वाणिज्य फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इससे मृदाओ के लवनिकरण जैसे गंभीर परिस्थितिकी परिणाम(Result) हो सकते हैं। इसी दौरान इससे अमीर भूमि मालिकों और गरीब भूमिहीनों में सामाजिक परिदृश्य बदल दिया है।

नर्मदा बचाओ आंदोलन

नर्मदा बचाओ आंदोलन एक गैर सरकारी संगठन(NGO) है जो जनजातीय लोगों, किसानों, पर्यावरणविदो और मानव अधिकार कार्यकर्ताओ को गुजरात में नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बांध के विरोध में लामबंद करता है। मूल रूप से शुरू में यहां आंदोलन(Protest) जंगलों के बांध के पानी में डूबने जैसे पर्यावरण(Environment) मुद्दों पर केंद्रित था हाल ही में इस आंदोलन का लक्ष्य बांध से विस्थापित गरीब लोगों को सरकार(Government) से संपूर्ण पुनर्वास सुविधाएं(Facilities) दिलाना हो गया है।

लोगों ने सोचा कि उनकी यातनए व्यर्थ नहीं जाएंगी विस्थापन(Displacement) का शौक स्वीकार किया यह विश्वास करते ही सिंचाई के प्रसार से वे मालामाल हो जाएंगे। प्रायः रिहंद के उत्तरजीवियो(Survivors) ने हमें बताया कि उन्होने अपने कष्टों को देश के लिए कुर्बानी(sacrifice) के रुप में सुविकार किया। परंतु अब 30 साल के कड़े अनुभव के बाद, जब उनकी आजीविका और अधिक जोखिमपूर्ण(Risky) हो गई हैं, पूछते जा रहे है- “हमें ही देश के लिए कुर्बानी(sacrifice) देने के लिए क्यों चुना गया?”

क्या आप जानते है?

सरदार सरोवर बांध गुजरात में नर्मदा नदी पर बनाया गया है। यह भारत की एक बड़ी जल संसाधन प्रबंधन परियोजना है जिसमें चार राज्य- महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात तथा राजस्थान सम्मिलित है। सरदार सरोवर परियोजना गुजरात (9490 गांव तथा 173 कस्बों) तथा राजस्थान (124 गांव) के सूखाग्रस्त तथा मरुस्थलीय भागों की जल संसाधन प्रबंधन को आवश्यकता को पूरा करेगी।

भूमि मालिकों और गरीब भूमिहीनों ने सामाजिक दूरी बढ़ाकर सामाजिक(Social) परिदृश्य बदल दिया है। जैसा कि हम देख सकते हैं कि बांध उसी जल के अलग-अलग यूज(Use) और लाभ चाहने वाले लोगों के बीच संघर्ष(struggle) पैदा करते हैं। गुजरात में साबरमती बेसिन में सूखे(Dry) के दौरान नगरीय एरिया(Area) में अधिक जल संसाधन प्रबंधन आपूर्ति(recoupment) देने पर परेशान(Farmer) किसान उपद्रव पर उतारू हो गए। बहुउद्देशीय प्रोजेक्ट (Project) के लागत और लाभ के बंटवारे को लेकर अंत राज्य(state) झगड़े आम होते जा रहे हैं।

क्या आप जानते है?

क्या आप जानते हैं कि कृष्णा गोदावरी विवाद की शुरुआत महाराष्ट्र सरकार(Government) द्वारा कोयना पर जल विद्युत(Electricity) परियोजना के लिए बांध बनाकर जल की दिशा परिवर्तन कर कर्नाटक और आंध्र प्रदेश सरकारों द्वारा आपत्ति जताए जाने से हुई। इससे इन राज्यों(States) में पड़ने वाले नदी के निचले हिस्सों में जल प्रभाव कम हो जाएगा और कृषि और उद्योग(Industry) पर विपरीत असर पड़ेगा।

जल संसाधन प्रबंधन सामाजिक विज्ञान एनसीआरटी कक्षा-10, पाठ-3
मुख्य नदियां और बांध भारतीय नक्शा

More Information- जल संसाधन (समकालीन भारत-2) सामाजिक विज्ञान (पार्ट-1,3)



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