Ncrt Class 10 जल संसाधन सामाजिक विज्ञान(पार्ट-1)

नमस्कार दोस्तों, आज के इस लेख(Post) में आपको जल संसाधन(Resources) के बारे में बताने जा रहा हूँ। तो इस पोस्ट(Post) को पूरा जरूर पड़ें और में हूं शिवा सिंह और आप देख रहे हैं 10th12th.com. तो जानते हैं जल संसाधन(Resources) के बारे में।

जैसा कि आप जानते हैं कि तीन- चौथाई धरातल(surface) जल से ढका हुआ है, परंतु इसमें यूज(Use) में लाने योग्य लवणीय(Saline) जल का अनुपात बहुत कम है। यह लवणीय(Saline) जल हमें सतही अपवाह और भोम जल स्त्रोत से प्राप्त होता है, जिनकी लगातार नवीकरण और पुनर्भरण जलीय चक्र द्वारा होता रहता है। सारा जल जलीय चक्र में गतिशील रहता है जिससे जल नवीकरण (Renewal) सुनिश्चित होता है।आपको आश्चर्य होगा कि जब पृथ्वी(Earth) का तीन चौथाई भाग जल से घिरा है और जल एक नवीकरण(Renewal) योग्य संसाधन है तब भी विश्व(world) के अनेक देशों और क्षेत्रों में जल की कमी कैसे कैसे भविष्यवाणी की जा रही है कि 2025 में 20 करोड़ लोग जल की नितांत कमीज झेलेंगे?

पानी दुर्लभता और संरक्षण (Protection) एवं प्रबंधन व संसाधन(Resources) आवश्यकता

पानी के विशाल भंडार और इसके नवीकरण(Renewal) योग्य गुणों के होते हुए यह सोचना भी मुश्किल है कि हमें जल दुर्लभता(Rarity) का सामना करना पड़ सकता है। जैसे ही हम जल की कमी की बात करते हैं तो हमें तत्काल ही कम वर्षा वाले क्षेत्रों या सूखाग्रस्त(Dry up) इलाकों का ध्यान आता है। हमारे मानव पटल पर तुरंत राजस्थान (Rajasthan) के मरुस्थल और जल से भरे मटके संतुलित करती हुई और जल भरने के लिए लंबा रास्ता तय करती पनिहारिनो(Paniharino) के चित्र चित्रित हो जाते हैं।

जल संसाधन का प्रयोग

यह सच है कि वर्षा में वार्षिक(annual) और मौसमी परिवर्तन के कारण जल संसाधन(Resources) की उपलब्धता में समय और स्थान के अनुसार वीभिन्नता(Variousness) है। परंतु अधिकताया जल की कमी इसके आतीशोषण, अत्यधिक प्रयोग और समाज के विभिन्न वर्गों में जल के असमान वितरण के कारण होती है। क्या यह संभव है कि किसी एरिया(Area) में प्रचुर मात्रा में जल संसाधन होने के बावजूद भी वहां जल(Water) की दुर्लभता(Rarity) हो? हमारे कई शहर इसके उदाहरण हैं। अतः जल दुर्लभता(Rarity) अत्यधिक और बढ़ती जनसंख्या और उसके परिणामस्वरूप जल की बढ़ती मांग और उसके असमान वितरण(Delivery) का परिणाम हो सकता है। जल, अधिक जनसंख्या के लिए घरेलू यूज(Use) में ही क्यों नहीं बल्कि अधिक अनाज उगाने के लिए भी चाहिए।

कृषि में जल संसाधन का उपयोग

अतः अनाज का प्रोडक्शन (Production) बढ़ाने के लिए जल संसाधन का अति शोषण करके ही सिंचित एरिया(Area) बढ़ाया जा सकता है और शुष्क ऋतु में भी खेती की जा सकती है। सिंचित कृषि में जल का सबसे ज्यादा उपयोग होता है। शुष्क कृषि टेक्नोलॉजी(Technology) तथा सूखा प्रतिरोधी फसलों के विकास द्वारा अब कृषि एरिया(Area) में क्रांति लाने की आवश्यकता है।

जल संसाधन सामाजिक विज्ञान एनसीआरटी कक्षा-10, पाठ-3

अपने टेलीविजन(TV) विज्ञापनों में देखा होगा कि बहुत से किसानों के खेतों पर अपने प्राइवेट(Private) कुएं और नलकूप है जिनसे सिंचाई करके वे प्रोडक्शन (Production) बढ़ा रहे हैं। परंतु आपने सोचा(Think) है कि इसका परिणाम क्या हो सकता है? इसके कारण भोम वाटर लेवल(Water level) नीचे गिर सकता है और लोगों के लिए जल की अवेलेबिलिटी(Availability) में कमी हो सकती है और भोजन सुरक्षा खतरे(Danger) में पड़ सकती है। सुवंत्रता के बाद भारत में तेजी से औद्योगीकरण (industrialization) और शहरीकरण हुआ और विकास के अवसर प्राप्त हुए।

उद्योगों में जल संसाधन

आजकल हर जगह बहुराष्ट्रीय कंपनियां(MNCs) बड़े औद्योगिक घरानों के रूप में फैली हुई है। उद्योगों की बढ़ती हुई संख्या के कारण अलवणीय जल संसाधन पर दबाव बढ़ रहा है। इंडस्ट्रीज(Industries) को अत्यधिक जल के अलावा उनको चलाने के लिए उर्जा की भी आवश्यकता होती है और इसकी काफी हद तक पूर्ति जल इलेक्ट्रिसिटी(Electricity) से होती है। वर्तमान समय में भारत में कुल विद्युत का लगभग 22 प्रतिशत भाग जल इलेक्ट्रिसिटी(Electricity) से प्राप्त होता है। इसके अलावा शहरों की बढ़ती संख्या और जनसंख्या तथा शहरी जीवन शैली के कारण न केवल जल और एनर्जी(Energy) की आवश्यकता में बढ़ोतरी हुई हैं अपितु इनसे संबंधित समस्याएं और गहरी हुई है।

कॉलोनीयो में जल संसाधन का उपयोग

यदि आप शहरी आवास समितियों या कॉलोनी (Colony) पर नजर डालें तो आप पाएंगे कि उनके अंदर जल पूर्ति के लिए नलकूप स्थापित किए गए हैं। इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि सिटी(City) में जल संसाधन का अति शोषण हो रहा है और इनकी कमी होती जा रही है। अब तक हमने जल दुर्लभता के मात्रात्मक(Quantitative) पहलू की ही बात की है। आओ, हम ऐसी स्थिति के बारे में विचार(idea) करें जहां लोगों की आवश्यकता(requirement) के लिए काफी जल संसाधन है, परंतु फिर भी इन एरिया(Area) में जल की दुर्लभता है। यह दुर्लभता जल की खराब क्वालिटी(Quality) के कारण हो सकती है।

प्रदूषित जल

पिछले कुछ वर्षों(Years) से यह चिंता का विषय बनता जा रहा है कि लोगों की आवश्यकता के लिए प्रचुर मात्रा में जल अवेलेबिलिटी(Availability) होने के बावजूद यह घरेलू और औद्योगिक अपशिष्ट, रासायनिक, कीटनाशकों और कृषि में प्रयुक्त उर्वरकों द्वारा प्रदूषित (Polluted) है और मानव उपयोग के लिए खतरनाक है।

इंडिया(India) की नदियां विशेषकर छोटी सरिताए, जहरीली(Poisonous) धाराओं में परिवर्तित हो गई है और बड़ी नदियां जैसे गंगा(Ganga) और यमुना कोई भी शुद्ध(Pure) नहीं है। बढ़ती जनसंख्या, कृषि आधुनिकरण(Modernization), नगरीकरण और औद्योगिकरण का भारत की रिवर(River) पर अत्यधिक दुष्प्रभाव है और हर दिन गहराता आता जा रहा है.. इसने संपूर्ण जीवन खतरे में है।

द सिटीजन्स फिफ्थ रिपोर्ट, सी एस ई, 1999

आपने अनुभव कर लिया होगा कि टाइम(Time) की मांग है कि हम अपने जल संसाधन का प्रोटेक्शन(Protection) और प्रबंधन करें, स्वयं को हेल्थ(Health) संबंधी खतरों से बचाएं, खाधान सुरक्षा, अपनी आजीविका और उत्पादक क्रियाओं की निरंतरता को सुनिश्चित करें, और हमारे प्राकृतिक परितंत्र को निम्नीक्रत(Degradation) होने से बचाएं। जल संसाधन के अतिशोषण और कुप्रबंधन से इन संसाधन का हास हो सकता है और पारिस्थितिकी संकट की समस्या पैदा हो सकती है जिसका हमारे लाइफ(Life) पर गंभीर प्रभाव हो सकता है।

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More Information- Ncrt Class 10 जल संसाधन पाठ



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