ठोस अवस्था किसे कहते हैं (12th, Chemistry, Lesson-1)

ठोस अवस्था

ठोस अवस्था (solid state): पदार्थ के अवयवी (constituent) कण गतिशील रहते हैं। यह धारणा पदार्थ की गति धारणा कहलाती है। पदार्थ की अवयवी कणों की गतिशीलता के आधार पर इसे तीन भौतिक अवस्था में वर्गीकृत किया गया है। अवयवी कणों की सर्वाधिक गतिशीलता में पदार्थ की भौतिक अवस्था गैस (gas) होती है जबकि निम्नतम गतिशीलता अर्थात स्थिरता में पदार्थ की भौतिक अवस्था (physical state) ठोस होती है। इनके मध्य की अवस्था द्रव अवस्था (Fluid state) कहलाती है।

ठोस अवस्था किसे कहते हैं (12th, Chemistry, Lesson-1)
ठोस अवस्था

पदार्थ की गैस व द्रव अवस्था में अवयवी कणो के मध्य अंतकरण (interparticle) बल दुर्बल होता है। पदार्थ की ठोस अवस्था में यह बल सबसे अधिक पाया जाता है। परिणामस्वरूप इस अवस्था में ठोस के कण गतिशील नहीं होते परंतु अपने स्थान पर कंपन (vibration) करते रहते हैं। अवयवी कणों की स्थिरता पदार्थ की ठोस अवस्था को दृढ़ता (rigidity) एवं निश्चित आकृति (shape) प्रदान करती है। पदार्थ की ठोस अवस्था (solid state) में निम्नलिखित सामान्य लक्षण पाए जाते हैं-

  1. अवयवी कणों के मध्य प्रबल अंतकरण बल।
  2. अवयवी कणों के मध्य निम्नतम दूरी।
  3. पदार्थ की निश्चित आकृति।
  4. अवयवी कणों (Ingredient particles) का स्थिर रहते हुए अपने स्थान पर कंपन (vibration)।
  5. दृढ़ता (rigidity) एवं असम्पीडनीयता (non-compressibility)।

क्रिस्टलीय ठोस

वे ठोस जिनमें उनकी रचक इकाई (constituent unit)- (आयन या परमाणु या अणु) एक नियमित (regular) व क्रमिक रूप में व्यवस्थित रहती है, अक्रिस्टलीय ठोस कहलाते हैं, जैसे- हीरा, सोडियम क्लोराइड (NaCl), सोडियम सल्फेट (Na₂SO₄), आयोडीन आदि क्रिस्टलीय ठोस अवस्था होती हैं।

क्रिस्टलीय ठोस अवस्था के लक्षण

  1. अवयवी घटक नियमित क्रम में व्यवस्थित होते हैं।
  2. ये तीक्ष्ण (sharp) एवं निश्चित गलनांक रखते हैं।
  3. क्रिस्टल निर्माण के समय बाहरी सतह (Outer surface) भी नियमित क्रम दर्शाती है।
  4. ये विषमदैशिक (anisotropic) होते हैं।

अक्रिस्टलीय ठोस

वे ठोस जिनमें उनकी रचक इकाई (Stirrer unit) नियमित व क्रमिक रूप (Serial form) से व्यवस्थित नहीं रहती है, अक्रिस्टलीय ठोस कहलाते है। जैसे- कांच, प्लास्टिक, रबर आदि अक्रिस्टलीय ठोस अवस्था होती हैं।

अक्रिस्टलीय के लक्षण

  1. अवयवी घटक (Ingredient component) नियमित क्रम में व्यवस्थित नहीं होते हैं।
  2. ये तीक्ष्ण (sharp) एवं निश्चित गलनांक नहीं रखते हैं।
  3. ठोस निर्माण के समय बाहरी सतह (Outer surface) भी नियमित क्रम नहीं दर्शाती है।
  4. ये समदैशिक (isotropic) होते हैं।

क्रिस्टलीय तथा अक्रिस्टलीय ठोस में अंतर

क्रम संख्याक्रिस्टलीय ठोसअक्रिस्टलीय ठोस
1.इन ठोसों में रचक इकाई (Stirrer unit) नियमित व क्रमिक व्यवस्था रखती है।रचक इकाई अनियमित व अक्रमिक व्यवस्था (Non-systematic arrangement) रखती है।
2.ठोस निर्माण में बाहरी सतह (Outer surface) भी नियमितता दर्शाती है।ठोस निर्माण में बाहरी सतह भी अनियमितता (irregularity) दर्शाती है।
3.ये निश्चित गलनांक (melting point) रखते हैं।ये निश्चित गलनांक नहीं रखते हैं।
4.ये विषमदैशिक (anisotropal) होते हैं।ये समदैशिक (Isotropic) होते हैं।
5.यह वास्तविक ठोस (Real solid) होते हैं।यह आभासी ठोस (Virtual solid) होते हैं। वास्तव में ये अतिशीतित (Chilled) द्रव होते हैं।
6.पैनी धार वाले हथियार से कटने पर ये ठोस कटी सतह पर भी रचक घटकों (Stirrer component) का नियमित क्रम रखते हैं।
ये ठोस कटी सतह (Cut surface) पर भी रचक घटकों का अनियमित क्रम रखते हैं।

नोट– अक्रिस्टलीय पदार्थों में ऊष्मा चालकता (Heat conductivity), विद्युत चालकता, अपवर्तनांक (refractive index) आदि गुण सभी दिशाओं में समान पाए जाते हैं। पदार्थों का यह गुण समदैशिकता (Isotropism) व ये पदार्थ समदैशिक (Isotropic) कहलाते है। इसी प्रकार, उपयुक्त गुण क्रिस्टलीय पदार्थों (Crystalline materials) में दिशा परिवर्तन पर परिवर्तित हो जाते हैं। पदार्थों का यह गुण विषमदैशिकता व ये पदार्थ विषमदैशिक (anisotropal) कहलाते है।

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