तत्वों का आवर्त वर्गीकरण
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तत्वों का आवर्त वर्गीकरण

1-तत्वों के वर्गीकरण का विकास-

सन् 1803 ईं० में डाल्टन (Dalton) नामक रसायनज्ञ ने सापेक्ष परमाणु भारों जिसको आजकल परमाणु द्रव्यमानों के रूप में स्वीकार किया गया है, की एक सारणी प्रकाशित की थी । इस सारणी ने  तत्वों के वर्गीकरण के लिए एक महत्वपूर्ण नीव का कार्य किया।

तत्वों का आवर्त वर्गीकरण
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तत्वों का आवर्त वर्गीकरण

2-धातु तथा अधातु में विभाजन-

प्रारम्भ में तत्वों को उनके गुणधर्मों के आधार पर धातु (metal) तथा अधातु (non-metal) में विभाजित किया गया। बाद में कुछ ऐसे तत्वों की खोज हुई, जिनके गुण धातु तथा अधातु दोनों के समान थे। हम तत्वों को ध्त्वान या उपधातु (metalloids) नाम दिया गया। आगे चलकर यह वर्गीकरण अमान्य हो गया, क्योकि यह तत्वों के मौलिक गुणों पर आधारित नहीं था।

3-मेंडलीफ की आवर्त सारणी तथा आवर्त नियम

प्रोफेसर डिमिट्री इवानोविच मेणडेलीफ (Dmitri Ivanovich Mendeleef) एक रूसी वैज्ञानिक ने तत्वों के परमाणु द्रव्यमानों तथा उनके भौतिक व रासायनिक गुपाधर्मो के मध्य एक सम्बन्ध का भली भांति अध्ययन किया उनके काल में कुल 63 तत्व ज्ञात थे। मेणडेलीफ ने उस समय ज्ञात तत्वों को उनके समान परमाणु द्रव्यमानों के आधार पर व्यवस्थित किया

। दूसरे शब्दों मेँ, मेण्डेलीफ ने तत्वों के उनके द्वारा बनाए यौगिकों के सूत्र में समानताओं के आधार पर व्यवस्थित किया (उदाहरणार्थ – आक्साइड, हाइड्राइड आदि)| यह प्रेक्षित किया गया कि अधिकार तत्वों को उनके बढते हुए परमाणु द्रव्यमानों (जो उस समय परमाणु भार कहलाते थे) के क्रम’ में आवर्त सारणी मेँ रखा जाए।

यह पाया गया कि आवर्ती पुनरावृति अथवा आवर्तिता प्रदर्शित होती है अर्थात प्रत्येक आठवें तत्व के गुणधर्म प्रथम तत्व के गुण धर्म के समान होते है, अर्थात

तत्वों के भौतिक एवं रासायनिक गुणधर्म उनके परमाणु भारों ( परमाणु द्र्व्यमानो) के आवर्ती फलन होते हैं। इस आवर्त सारणी में उर्ध्वाधर स्तम्भ (समूह) तथा क्षैतिज कतारें (आवर्त) थी।

मैण्डेलीफ की सारणी में यद्यपि सभी तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु द्रव्यमानों के क्रम में व्यवस्थित किया गया; कुछ तत्वों के युग्मों को उनके परमाणु द्रव्यमानों के व्युत्क्रम में रखा गया। उदाहरणार्थ – कोबाल्ट (परमाणु द्रव्यमान 58.98) तथा निकिल (58. 7) टेल्यूरियम (127. 6) और आयोडीन 126.90)।

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आवर्त सारणी मेँ इस व्युत्क्रमण को तत्व के रासायनिक गुणधर्मों की उस समूह के तत्वों के साथ समानताओं के कारण किया गया जिसमें उस तत्व को रखा गया था। उदाहरणार्थ – टेल्यूरियम (Te) को आयोडीन से पहले रखा गया, जबकि Te का उच्च परमाणु द्रव्यमान हैं। ऐसा इसलिए किया गया, क्योकिं  आयोडीन के गुणधर्म ब्रोमीन के गुणधर्म के समान है,

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न कि सेलेनियम (Se) के गुणधर्म के समान इस सारणी में छोड़े गए रिक्त स्थानों को भरने के लिए भविष्य में खोजे जाने वाले तत्वों के गुणधर्मों की भविष्यवाणी उसने तत्वों की आवर्त सारणी में स्थिति के आधार पर की|

4-मेंडलीफ की आवर्त सारणी की सामान्य विशेषताएं।

(1) प्रत्येक आवर्त में तत्व अपने बढ़ते परमाणु भारों के क्रम में व्यवस्थित हैं।

(2) एक ही समूह के सभी तत्वों के गुणधर्म समान होते हैं।

(3) प्रत्येक आवर्त में बाएँ से दाएँ चलने पर तत्वों की ऋण – विद्युत् संयोजकता कम होती जाती है, जबकि धन-विद्युत संयोज़कता बढती जाती है।

(4) तत्व का परमाणु भार उसका मौलिक गुण है।

(5) कम परमाणु भार वाले तत्व; जैसे-“, H,C,O,N अपेक्षाकृत प्रकृति मेँ अधिक मात्रा में पाए जाते हैं।

(6) सारणी में रिक्त स्थानों के तत्वों के गुणधर्मों को पहले ही बताया जा सकता है।

(7) आवर्त सारणी में कुछ तत्व ऐसे स्थानो पर रखे गए थे जिसके अनुसार उनके गुण नहीं थे इन  तत्वों के परमाणु द्रव्यमानों में संशोधन हुआ तथा तब इन्हें सारणी में तर्कसंगत स्थान प्राप्त हुआ।

(8) सारणी मैं किसी भी तत्व के स्थान के अनुसार उसके गुणों क्रो बताया जा सकता है जैसे-

किसी समूह के किसी तत्व के गुण उस समूह में उस तत्व के ऊपर और नीचे स्थित तत्वों के औसत गुण होते हैं।

5-प्राउट की परिकल्पना-

विलियम प्राउट ने 1815 ईं० में यह कल्पना की कि सभी तत्वों के परमाणु, हाइड्रोजन परमाणुओं के संगठन मात्र हैं तथा सभी त्तत्वों के परमाणु भार, हाइड्रोजन के परमाणु भार के सरल गुणक होते है, क्यूंकि हाइड्रोजन का परमाणु भार एक माना गया है,

अत:  नाइट्रोजन के परमाणु भार 14 का अभिप्राय यह है कि नाइट्रोजन का एक परमाणु हाइड्रोजन के 14 परमाणुओं से मिलकर बना है तथा इस आधार पर किसी तत्व का परमाणु भार हाइड्रोजन के परमाणु भार का सरल गुणक होता है।

प्राउट की यह परिकल्पना गलत सिद्ध हुईं, क्योकि कुछ तत्व ऐसे भी थे जिनके परमाणु भार सरल पूर्णांक न होकर दशमलव में थे, जैसे-क्लोरीन का परमाणु भार 35 . 5 हैं। 

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