भारत में जलवायु अवस्थाओं की क्षेत्रीय विभिन्नताएं-
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भारत में जलवायु अवस्थाओं की क्षेत्रीय विभिन्नताएं-

भारत में विभिन्न प्रकार की जलवायु दशाएं मिलती हैं यहां एक स्थान से दूसरे स्थान और एक रितु से दूसरी रितु में विभिन्न प्रकार के जलवायु संबंधी अंतर देखने को मिलते हैं देश की जलवायु अवस्थाओं की क्षेत्र के विभिन्नताओं को निम्नलिखित रूम में स्पष्ट किया जा सकता है।

भारत में जलवायु अवस्थाओं की क्षेत्रीय विभिन्नताएं-
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भारत में जलवायु अवस्थाओं की क्षेत्रीय विभिन्नताएं-

1-तापांतर-

भारत के विभिन्न भागों में तापमान में पर्याप्त विषमता में मिलती हैं यहां राजस्थान तथा दक्षिण-पश्चिम पंजाब जैसे ऐसे स्थान हैं जहां तापमान 55 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है दूसरी और जम्मू और कश्मीर राज्य में से 20 स्थान है जहां तापमान माइनस 3 डिग्री सेल्सियस तक नीचे चला जाता है इसके अतिरिक्त समुंद्र तटीय प्रदेशों में तापमान लगभग पूरे वर्ष लगभग समान बना रहता है और था जलवायु के प्रमुख घटक तापमान के आधार पर देश की जलवायु में पर्याप्त रूप में क्षेत्रीय विभिन्न अदाएं प्रकट होती है।

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2-वर्षा-

भारत में वर्षा की मात्रा अभी एवं वितरण की दृष्टि से पर्याप्त क्षेत्रीय व्यवस्थाएं देखने को मिलती है।

1-देश में वर्षा की अनियमितता बनी रहती हैं यदि मानसून शीघ्र आ जाता है तो वर्षा भी शीघ्र शुरू हो जाती है इसके विपरीत मानसून की डेट से आने पर वर्षा भी देर से होती है।

2-देश में वर्षा का वितरण अत्यंत ही आसमान रहता है यहां एक और मशीन राम जिसम है सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान है वहीं दूसरी ओर राजस्थान में 5 से 10 सेमी तक वर्षा वाले स्थान भी हैं

3-यहां दक्षिण पश्चिम मानसून द्वारा कभी-कभी अत्याधिक वर्षा से बाढ़ आ जाती है तो कभी-कभी वर्षा और सच्चे भी कम होती है जिससे देश के कुछ भागों में सूखा पड़ जाता है

4-देश में 75% सही 90% वर्ष 8 जून से सितंबर तक हो जाती है परंतु शेष समय में भी देश के किसी न किसी भाग में वर्षा होती रहती है उदाहरण के लिए दिसंबर से मार्च तक उत्तर पश्चिम भारत में मार्च से मई तक मालाबार तट एवं सुदूर पूर्वी भारत में तथा अक्टूबर से दिसंबर तक कोरोमंडल तट पर वर्षा होती है

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