प्राकृतिक कारक; जैसे-जल तथा वायु मृदा की ऊपरी परत को हटाने के लिए उत्तरदायी होते हैं। इस प्रक्रम को मृदा अपरदन (soil erosion) कहते हैं।
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मृदा अपरदन क्या है? इसके कारण तथा प्रभाव क्या है?

मृदा अपरदन-

प्राकृतिक कारक; जैसे-जल तथा वायु मृदा की ऊपरी परत को हटाने के लिए उत्तरदायी होते हैं। इस प्रक्रम को मृदा अपरदन (soil erosion) कहते हैं।

मृदा अपरदन के कारण-

1-तीव्र वर्षा मिट्टी की अनावृत ऊपरी परत को बहा ले जाती है।

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2-धूल भरी आंधी से मृदा अपरदन होता है।

3-मनुष्य के क्रियाकलापों से मृदा अपरदन होता है। मनुष्य द्वारा बड़ते आवासों तथा शहरी क्षेत्रों के विकास से बहुत बड़े क्षेत्र वनस्पति विहीन हो गए हैं। वनस्पति का आवरण हट जाने से नग्न भूमि पर वायु तथा जल का सीधा प्रभाव पड़ता है। इससे मृदा का अपरदन होता है।

4-भूमि की त्रुटिपूर्ण जुताई से भी मृदा अपरदन होता है।

मृदा अपरदन के प्रभाव-

इसके निम्नलिखित हानिकारक प्रभाव होते हैं-

1-मृदा अपरदन से हरे जंगल मरुस्थल में बदल जाते हैं, जिससे पर्यावरण संतुलन बिगड़ जाता है।

2-इससे फसल ठीक प्रकार से नहीं होती है, जिससे भोजन की कमी हो सकती है।

3-पहाड़ी क्षेत्रों में मृदा अपरदन से भूस्खलन हो सकता है।

4-इससे भूमि जल धारण नहीं कर सकती है। पानी के तीव्रता से नदियों में बह जाने से बाढ़ आ सकती है। इससे जान-माल का नुकसान हो सकता है।

मृदा अपरदन को रोकने के उपाय-

इसके लिए हम निम्नलिखित विधियों का प्रयोग करते हैं-

1-वृक्षारोपण तथा घास उगाकर।

2-सघन खेती तथा बहाव के लिए ठीक नालियां बनाकर।

3-डलवा स्थानों पर सीडी नुमा खेत बनाने से जल बहाव की गति कम हो सकती है‌

मृदा अपरदन किसे कहते हैं।

प्राकृतिक कारक; जैसे-जल तथा वायु मृदा की ऊपरी परत को हटाने के लिए उत्तरदायी होते हैं। इस प्रक्रम को मृदा अपरदन (soil erosion) कहते हैं।

मृदा अपरदन को रोकने का एक उपाय।

वृक्षारोपण तथा घास उगाकर।

मृदा अपरदन का एक प्रभाव बताइए।

मृदा अपरदन से हरे जंगल मरुस्थल में बदल जाते हैं, जिससे पर्यावरण संतुलन बिगड़ जाता है।

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