वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था-
x

वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था-

1-वैश्वीकरण:

आधुनिक समय में पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था आपस में जुड़ी हुई है। विश्व की अर्थव्यवस्था के इस परस्पर जुड़ाव को वैश्वीकरण या ग्लोबलाइजेशन कहते हैं। इसे समझने के लिये एप्पल नाम की कंपनी का उदाहरण लेते हैं।

यह अमेरिका की कंपनी है। एप्पल के मोबाइल फोन के पार्ट्स चीन और दक्षिण पूर्व एशिया के देशों में बनते हैं। उसके बाद एप्पल के फोन दुनिया के हर देशों में बेचे जाते हैं। इससे पता चलता है कि एक उत्पाद के बनने और ग्राहकों तक पहुँचने में जितनी आर्थिक क्रियाएँ होती हैं,

उनमें से विभिन्न क्रियाएँ दुनिया के विभिन्न भागों में संपन्न होती हैं। यह ग्लोबलाइजेशन का एक बेहतरीन उदाहरण है। इसलिए यदि चीन की अर्थव्यवस्था में कोई उथल पुथल होती है तो उसका असर अन्य देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ता है।

2-वैश्वीकरण का विकास

व्यापार ने प्राचीन काल से ही दुनिया के विभिन्न भागों को जोड़ने का काम किया है। आपने सिल्क रूट का नाम सुना होगा। चीन का रेशम जिस रास्ते से अरब और फिर पश्चिम के देशों और अन्य देशों में जाता था उस रास्ते को सिल्क रूट कहा जाता था।

सिल्क रूट से न केवल सामान की आवाजाही होती थी बल्कि लोगों और विचारों का आवागमन भी होता था। भारत से शून्य और दशमलव प्रणाली व्यापार के रास्ते ही दुनिया के अन्य भागों में पहुँच पाया था। नूडल्स की उत्पत्ति चीन में हुई थी। व्यापार के रास्ते ही नूडल्स दुनिया के अन्य भागों में पहुँचे और इसके कई नाम हो गये; जैसे सेवियाँ, पास्ता, आदि।

free online mock test

औद्योगिक क्रांति के परिणाम्स्वरूप वैश्वीकरण में तेजी आ गई। उसके बाद शुरु में एशिया से कच्चे माल का निर्यात होता था और यूरोप से उत्पादों का आयात होता था। उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य से स्थिति बदलने लगी थी।

बीसवीं सदी के मध्य के बाद से कई कंपनियों ने विश्व के विभिन्न भागों में अपने पैर पसारने शुरु किये। इस तरह से बहुराष्ट्रीय कंपनियों का जन्म हुआ।

वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था-
x
वैश्वीकरण और भारतीय अर्थव्यवस्था-

वैश्वीकरण के कारण:

खर्च कम करने की आवश्यकता: हर कंपनी इस बात की पूरी कोशिश करती है कि उत्पादन के लागत को कम किया जाये। इसके लिये जरूरत पड़ने पर कंपनियाँ उत्पादन के कई चरणों को अलग-अलग देशों में पूरा करवाती हैं।

यदि एप्पल नामक कंपनी अमेरिका में अपने उत्पाद बनाएगी तो वहाँ खर्च अधिक आयेगा क्योंकि अमेरिका में कामगारों को अधिक पारिश्रमिक देना होता है। यदि ताइवान या चीन में काम होगा तो खर्च कम आयेगा क्योंकि इन देशों में कामगारों को कम पारिश्रमिक देना होता है।

कच्चे माल को हमेशा ऐसे स्थान से खरीदने की कोशिश की जाती है जहाँ वह सबसे सस्ते में उपलब्ध हो। इस तरह से विभिन्न देशों से काम करवाने में लागत कम की जा सकती है और मुनाफे को बढ़ाया जा सकता है।

नये बाजार की तलाश: हर बाजार में ग्राहकों की संख्या सीमित होती है। कोई भी कंपनी अपने उत्पाद को घरेलू बाजार में किसी खास सीमा तक ही बेच सकती है। उससे अधिक बिक्री के लिये नये बाजारों की जरूरत होती है।

मान लीजिए कि किसी किसान के खेत में सब्जियों की जबरदस्त पैदावार हुई है। उसका गाँव इतना छोटा है कि वहाँ चाहकर भी वह अपनी सारी सब्जियाँ नहीं बेच सकता। अपनी सब्जियों को सही कीमत पर बेचने के लिये किसान को नये बाजार में जाना होगा। यही हालत कंपनियों की भी होती है। उन्हें हमेशा नये बाजार तलाशने की जरूरत होती है।

वैश्वीकरण के परिणाम:

रोजगार के बेहतर अवसर: वैश्वीकरण के कारण आर्थिक गतिविधियाँ तेजी से बढ़ी हैं। रोजगार के नये-नये अवसरों का सृजन हुआ है। कई नये आर्थिक केंद्रों का विकास तो वैश्वीकरण के बाद ही हुआ है, जैसे गुड़गांव, चंडीगढ़, पुणे, हैदराबाद, नोएडा, आदि।

जीवनशैली में बदलाव: वैश्वीकरण ने लोगों की जीवनशैली को पूरी तरह बदल दिया है। 1990 के पहले अधिकतर लोग दो जोड़ी पैंट शर्ट में गुजर बसर कर लेते थे। ज्यादातर स्कूली छात्रों के पास स्कूल ड्रेस के अलावा गिने चुने ही ड्रेस होते थे। आज अधिकतर छात्रों के पास स्कूल के लिए अलग ड्रेस, खेलने के लिए अलग ड्रेस, बाजार जाने के लिए अलग ड्रेस और पार्टी के लिये अलग ड्रेस होते हैं। पहले लोग स्नैक्स के नाम पर तला हुआ पापड़ या घर में बनी आलू की चिप्स खाते थे। अब तो अलग-अलग फ्लेवर के चिप्स पैकेट में मिलते हैं।

विकास के असमान लाभ: वैश्वीकरण ने आर्थिक असमानता को और भी तेजी से बढ़ाया है। एक ओर तो किसी बड़ी कम्पनी का मैनेजर लाखों रुपये का वेतन पाता है, वहीं दूसरी ओर दिहाड़ी मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी भी नहीं मिलती है। आज भी आबादी के एक बड़े हिस्से के लिये दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल हो जाता है।

विकसित देशों द्वारा गलत तरीकों का इस्तेमाल: विकसित देश एक तरफ तो ट्रेड बैरियर कम करने की वकालत करते हैं वहीं अपने देश में ट्रेड बैरियर का इस्तेमाल करते हैं। अमेरिका जैसे देश अपने किसानों को भारी अनुदान देते हैं। विकासशील देशों को इससे हानि ही होती है।

5-महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर-

प्रश्न 1. वैश्वीकरण से आप क्या समझते हैं? अपने शब्दों में स्पष्ट कीजिए।

उत्तर: आज पूरी दुनिया की आर्थव्यवस्था जिस प्रकार से आपस में जुड़ी हुई है उस जुड़ाव को वैश्वीकरण कहते हैं। इसे समझने के लिए गूगल का उदाहरण लेते हैं। यह अमेरिका में स्थित है लेकिन इसके उपभोक्ता दुनिया के हर कोने में हैं। आप दिल्ली में हों या देहरादून में, गूगल की मदद से कोई भी सूचना आपको चुटकियों में मिल सकती है। आज इस कंपनी के ऑफिस भारत जैसे कई देशों में हैं। गूगल आज वैश्वीकरण का एक जीता जागता उदाहरण है।

प्रश्न 2. भारत सरकार द्वारा विदेश व्यापार एवं विदेशी निवेश पर अवरोधक लगाने के क्या कारण थे? इन अवरोधकों को सरकार क्यों हटाना चाहती थी?

उत्तर: आजादी के समय भारत के निजी उद्यमियों के पास पूँजी की कमी थी। इसलिए उस समय स्थानीय उद्योग को संरक्षण की जरूरत थी। स्थानीय उद्योग धंधे फल-फूल सकें इसलिए भारत सरकार ने विदेश व्यापार और विदेशी निवेश पर अवरोधक लगाये गये। धीरे-धीरे स्थितियाँ बदलने लगीं और भारत का बाजार आकर्षक बन गया। उसके बाद सरकार ने इन अवरोधकों को हटाने का निर्णय लिया।

प्रश्न 3. श्रम कानूनों में लचीलापन कंपनियों को कैसे मदद करेगा?

उत्तर: श्रम कानूनों में लचीलापन कम्पनियों को लाभ पहुँचाएगा। इस कानून की मदद से कम्पनियाँ श्रमिकों की संख्या को नियंत्रित कर पाएँगी। कई व्यवसाय में श्रमिकों की मांग कुछ खास महीनों में ही होती है। अन्य महीनों में ऐसे श्रमिकों की मजदूरी पर का खर्च कम्पनियों को घाटे में ला देता है। लचीले कानून होने से इस बात से छुटकारा मिलेगा और कम्पनी के मुनाफे में सुधार होगा।

प्रश्न 4. दूसरे देशों में बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ किस प्रकार उत्पादन या उत्पाद पर नियंत्रण स्थापित करती हैं?

उत्तर: दूसरे देशों में बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ कई तरीकों से उत्पादन या उत्पाद पर नियंत्रण स्थापित करती हैं। इनमे से कुछ नीचे दिये गये हैं:

  • अधिकतर MNC शुरु में किसी स्थानीय कम्पनी से साझा वेंचर करते हैं ताकि उनका काम शुरु हो सके। ऐसा इसलिए किया जाता है कि स्थानीय कम्पनी को स्थानीय बाजार का जो ज्ञान होता है उसका लाभ उठाया जा सके। स्थानीय कम्पनी का व्यवसाय पहले से ही जमा जमाया होने का लाभ भी मिलता है।
  • एक समय आता है जब व्यवसाय में अच्छी खासी बढ़ोतरी होती है। उसके बाद MNC साझा वेंचर को समाप्त कर देती है। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि व्यवसाय पर नियंत्रण और भी बेहतर हो जाये।
  • कुछ MNC पहले दिन से ही स्वतंत्र रूप से काम करना शुरु करती है। ऐसी कम्पनी अक्सर शुरु से ही अपना पूरा नियंत्रण रखना चाहती है।
  • कुछ MNC केवल स्थानीय बाजार के लिये उत्पादन करती है, वहीं कुछ अन्य निर्यात के लिये उत्पादन करती है।

प्रश्न 5. विकसित देश, विकासशील देशों से उनके व्यापार और निवेश का उदारीकरण क्यों चाहते हैं? क्या आप मानते हैं कि विकासशील देशों को भी बदले में ऐसी माँग करनी चाहिए?

उत्तर: अक्सर विकसित देश की कम्पनियाँ दूसरे देशों में व्यवसाय के लिये अनुकूल माहौल बनाने के लिए अपनी सरकार पर दबाव डालती हैं। उस दबाव में आकर विकसित देश, विकासशील देशों से उनके व्यापार और निवेश का उदारीकरण चाहते हैं। विकासशील देशों को भी ऐसा ही करना चाहिए।

प्रश्न 6. ‘वैश्वीकरण का प्रभाव एक समान नहीं है’। इस कथन की अपने शब्दों में व्याख्या कीजिए।

उत्तर: यह बात सही है कि वैश्वीकरण का प्रभाव एक समान नहीं है। इससे फायदे और नुकसान दोनों हुए हैं। आर्थिक उदारीकरण के बाद भारत के लोगों के जीवन स्तर में सुधार हुआ है। रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं। लेकिन अमीरों और गरीबों के बीच की खाई और भी चौड़ी हो गई है। आर्थिक उदारीकरण के बाद प्रतिस्पर्द्धा भी बढ़ी है जिसके कारण छोटे व्यवसायियों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है।

प्रश्न 7. व्यापार और निवेश नीतियों का उदारीकरण वैश्वीकरण प्रक्रिया में कैसे सहायता पहुँचाती है?

उत्तर: व्यापार और निवेश नीतियों के उदारीकरण से वैश्विक प्रक्रिया में बहुत मदद मिलती है। इन नीतियों के कारण विदेशी निवेश का रास्ता साफ हो जाता है। इसके साथ ही आयात और निर्यात के रास्ते भी खुल जाते हैं। स्थानीय कम्पनियों और व्यवसायियों को क्वालिटी सुधारने की प्रेरणा मिलती है। कई बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को इस बात का मौका मिल जाता है कि विभिन्न देशों से उत्पादन के विभिन्न चरणों को करवा सकें।

प्रश्न 8. विदेश व्यापार विभिन्न्न देशों के बाजारों के एकीकरण में किस प्रकार मदद करता है? यहाँ दिए गए उदाहरण से भिन्न उदाहरण सहित व्याख्या कीजिए।

उत्तर: विदेश व्यापार से विश्व के विभिन्न बाजार आपस में जुड़ जाते हैं जिससे उनका एकीकरण होता है। इसे समझने के लिए कार का उदाहरण लेते हैं। फोर्ड अमेरिकी कम्पनी है और कार बनाती है। उसके किसी कार का इंजन अमेरिका में बनता है तो सीट बेल्ट भारत में। हेडलाइट चीन में बनता है तो गियर बॉक्स ताइवान में। इस तरह से कार निर्माण के विभिन्न चरण दुनिया के विभिन्न कोनों में होते हैं। उसके बाद तैयार कार कई देशों में बिकती है।

प्रश्न 9. वैश्वीकरण भविष्य में जारी रहेगा। क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि आज से बीस वर्ष बाद विश्व कैसा होगा? अपने उत्तर का कारण दीजिए।

उत्तर: आज से बीस साल बाद क्या होगा, इसे समझने के लिए आज की तारीख में तेजी से बढ़ते ई-कॉमर्स को देखने की जरूरत है। आज आप जब अमेजॉन पर कोई चीज खरीदने के लिए ऑर्डर लगाते हैं तो हो सकता है वह वस्तु आपसे तीन हजार किलोमीटर स्थित किसी कारखाने में बन रही हो। उसे आपतक पहुँचने में शायद चार पाँच राज्य पार करने पड़े। इसी का विस्तृत रूप हमें बीच साल बाद देखने को मिलेगा। आप झुमरी तिलैया में बैठकर पेरिस कि किसी दुकान से सूट मंगा सकते हैं। इस सबको अंजाम देने में कई टेक्नॉलोजी की भूमिका होगी, जैसे इंटरनेट, तेज गति के यातायात के साधन, ड्रोन, ऑनलाइन पेमेंट, आदि।

प्रश्न 10. मान लीजिए कि आप दो लोगों को तर्क करते हुए पाते हैं – एक कह रहा है कि वैश्वीकरण ने हमारे देश के विकास को क्षति पहुँचाई है, दूसरा कह रहा है कि वैश्वीकरण ने भारत के विकास में सहायता की है। इन लोगों को आप कैसे जवाब दोगे?

उत्तर: मुझे लगता है कि वैश्वीकरण से भारत के विकास में मदद मिली है। मेरे माता पिता बताते हैं मेरे जन्म से पहले टेलिफोन एक विलासिता की वस्तु हुआ करती थी। टेलिफोन कनेक्शन के लिये लोगों को वर्षों इंतजार करना पड़ता था। जब शुरु शुरु में मोबाइल फोन आया तो इतना महंगा था कि आम लोग उसे खरीद नहीं सकते थे। सिमकार्ड लेने के लिए लाइन में लगना पड़ता था। आज मोबाइल के बिना तो पढ़ना भी मुश्किल लगता है। मेरे स्कूल से नोटिस, होमवर्क, आदि मोबाइल के जरिये ही आते हैं। मेरी समाजशास्त्र की टीचर तो कई प्रश्नों के जवाब भी मोबाइल से ही भेज देती हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *