सरल लोलक के दोलनों में ऊर्जा का रूपांतरण-
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सरल लोलक के दोलनों में ऊर्जा का रूपांतरण-

1-सरल लोलक के दोलनों में ऊर्जा का रूपांतरण

प्रारंभ मै गोलक अपनी मध्य अवस्था में विराम की स्थिति में होता है इस समय इसकी गतिज ऊर्जा शून्य होती हैं इस स्थिति में हम स्थितिज ऊर्जा को भी सोनिया मान लेते हैं।

जब गोलक को मध्य अवस्था से एक और को ले जाते हैं तो इसकी ऊंचाई बढ़ने लगती है और इस क्रिया में हमें गुरुत्वीय बल के विरुद्ध कुछ कार्य करना पड़ता है यह कार्य इसकी स्थित ऊर्जा के रूप में संचित होता जाता है इस प्रकार मध्य अवस्था से अधिकतम विस्थापन की स्थिति में जब हम गोलक को छोड़ते हैं तब उस समय गोलक स्थितिज ऊर्जा अधिकतम तथा गतिज ऊर्जा स्रोत है।

सरल लोलक के दोलनों में ऊर्जा का रूपांतरण-
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सरल लोलक के दोलनों में ऊर्जा का रूपांतरण-

छोड़ने पर गोला धीरे-धीरे माध्य स्थिति की ओर लौटता है इससे गोला की स्थितिज ऊर्जा घटने लगती है परंतु गतिज ऊर्जा बढ़ने लगती है क्योंकि गोलक वायु में होकर गति करता है। गोलक की ऊर्जा का कुछ भाग वायु के घषण के विरुद्ध कार्य करने में व्यव्य हो जाता है। इससे वायु से गुजरता है उस का वेग अधिकतम होता है गतिज ऊर्जा अधिकतम तथा स्थितिज ऊर्जा होती है

गोलक अपने वेग के कारण मध्य अवस्था में नहीं रुक पाता और दूसरी और निकल जाता है इससे गोला की ऊंचाई बढ़ने लगती है अतः उसकी स्थिति ऊर्जा बढ़ने लगती है परंतु गतिज ऊर्जा घटने लगती है।

ऊर्जा का कुछ भाग वायु किसानों को मिल जाता है अंत में गोलक विराम हो जाता है गोला के यहां रुका नहीं रहता अपितु पुणे स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा तथा वाई के अणुओं की दी गई ऊर्जा का योग नियम बना रहता है इस प्रकाश सरल लोलक के दोनों में कुछ ऊर्जा सुरक्षित रहती है।

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गुल्लक का मध्य व्यवस्था के एक और का महत्व स्थापना गोलक की कुल ऊर्जा पर निर्भर करता है गोलक द्वारा वायु के अणुओं की दी गई ऊर्जा पुनः गोलक को वापस नहीं मिल पाती इससे गोलक की कुल ऊर्जा लगातार घटती जाती है।

अतः गोलक के दोलनों का आई एम भी करता है जब गोलक अपनी संपूर्ण ऊर्जा वायु के अणुओं को दे देता है तो उसकी कुल ऊर्जा शून्य हो जाती है। और वह हम सदैव के लिए विराम हो आता है।अंततः गोला की उर्जा वाय के अणुओं को चली जाती है नहीं यह ऊर्जा संरक्षण के नियम का उल्लंघन नहीं है

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