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1स्पष्ट और निष्पक्ष उद्देश्य-

ब्रिटिश लोगों को शक्ति हस्तांतरण की प्रक्रिया में देरी करने के लिए।

सांप्रदायिक भावनाओं को व्यापक रूप से विस्तार करने के लिए जो कि दोनों समुदायों के हितों का विरोध पूरी तरह से कर सकते थे।

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लोगों को दिखाने के लिए कि लोगों के आत्म-नियम देने में प्रयासों में ब्रिटिश ईमानदार थे, लेकिन यह भारतीय थे जो सत्ता-साझाकरण पर सहमति के बारे में फैसला नहीं कर सके।

संघीय संविधान की छाप देने के लिए ताकि सप्ताह केंद्र और एक शक्तिशाली प्रांत बनाया जा सके। यह क्षेत्रीयवाद की भावना पैदा करेगा, जो राष्ट्रवाद के प्रतिद्वंद्वी थे।

आर्थिक स्वायत्तता के बिना राजनीतिक स्वायत्तता देने के लिए।

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2-साइमन कमीशन की और जानकारियां-

साइमन आयोग सात ब्रिटिश सांसदो का समूह था, जिसका गठन 1927 में भारत में संविधान सुधारों के अध्ययन के लिये किया गया था. इसे साइमन आयोग (कमीशन) इसके अध्यक्ष सर जोन साइमन के नाम पर कहा जाता है.

साइमन कमीशन की रिपोर्ट में सुझाव दिया गया कि- (१) प्रांतीय क्षेत्र में विधि तथा व्यवस्था सहित सभी क्षेत्रों में उत्तरदायी सरकार गठित की जाए. (२) केन्द्र में उत्तरदायी सरकार के गठन का अभी समय नहीं आया. (३) केंद्रीय विधान मण्डल को पुनर्गठित किया जाय जिसमें एक इकाई की भावना को छोड़कर संघीय भावना का पालन किया जाय. साथ ही इसके सदस्य परोक्ष पद्धति से प्रांतीय विधान मण्डलों द्वारा चुने जाएं.

कमीशन के सभी सदस्य अंग्रेज (केवल बाबा साहब अम्बेडकर को छोड़कर) थे जो भारतीयों का बहुत बड़ा अपमान था.चौरी चौरा की घटना के बाद असहयोग आन्दोलन वापस लिए जाने के बाद आजा़दी की लड़ाई में जो ठहराव आ गया था वह अब साइमन कमीशन के गठन की घोषणा से टूट गया. 1927 में मद्रास में कांग्रेस का अधिवेशन हुआ जिसमें सर्वसम्मति से साइमन कमीशन के बहिष्कार का फैसला लिया गया. मुस्लिम लीग ने भी साइमन के बहिष्कार का फैसला किया.

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