सक्रिय अवशोषण और निष्क्रिय अवशोषण (12th, Biology, Lesson-1)

सक्रिय अवशोषण और निष्क्रिय अवशोषण के बारे में

सक्रिय अवशोषण और निष्क्रिय अवशोषण– जल का पौधों द्वारा अवशोषण जल उदग्रहण (water uptake) भी कहलाता है। रैनर (Renner, 1915) ने जल अवशोषण के लिए सक्रिय तथा निष्क्रिय शब्दों का प्रयोग किया था। क्रैमर (kramer, 1949) ने इसका विस्तार पूर्वक वर्णन किया। क्रैमर के अनुसार पौधों में जल का अवशोषण स्पष्ट रूप से भिन्न दो स्वतंत्र विधियों द्वारा होता है। सक्रिय अवशोषण (Active absorption) और निष्क्रिय अवशोषण (Passive absorption)।

सक्रिय अवशोषण

यह अवशोषण (absorption) मृदा में पर्याप्त जल की मात्रा उपलब्ध होने पर उन पौधों में पाया जाता है जिनमें वाष्पोत्सर्जन (transpiration) कम होता है। सक्रिय अवशोषण में जड़ सक्रिय रूप से भाग लेती है तथा किसी प्रकार के बाहरी दबाव (external pressure) (जैसे वाष्पोत्सर्जन खिंचाव) से मुक्त होती है। सक्रिय शोषण (active exploitation) में जल की कोशिकाओं जड़ की कोशिकाओं (root cells) में होने वाले श्वसन द्वारा मुक्त ऊर्जा (ATP) की आवश्यकता पड़ती है। यह अवशोषण दो प्रकार का होता है- परासरणी सक्रिय अवशोषण अपरासरणी सक्रिय अवशोषण।

परासरणी सक्रिय अवशोषण

परासरणी सक्रिय अवशोषण में जड़ एक प्रकार के परासरणमापी (osmometer) की भांति कार्य करती है। इसमें जल का अवशोषण परासरण के सामान्य नियमों और परासरण पृवणता (osmotic gradient) के अनुसार होता है।

इस अवशोषण में सर्वप्रथम मूलरोम की कोशिका भित्ति की बाहरी पेक्टिक परत मृदा जल का अंतःशोषण (imbibition) करती है क्योंकि इसकी प्रकृति जलरागी (hydrophilic) होती है। मृदा विलयन का परासरण दाब (OP) जल के अवशोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सामान्यतः मृदा विलयन का परासरण दाब 1 atm से कम होता है जबकि मूलरोम के अंदर विलयन (कोशिका-रस) का परासरण दाब 2 से 8 atm होता है अर्थात दोनों तरफ के परासरण दाब (OP) में बहुत बड़ा अंतर पाया जाता है।

सक्रिय अवशोषण और निष्क्रिय अवशोषण (12th, Biology, Lesson-1)

अतः मृदा जल अंतःपरासरण (endosmosis) के द्वारा मूलरोम में आ जाता है, जिसके फलस्वरूप मूलरोम का परासरण दाब (OP) कम हो जाता है तथा स्फीति दाब (TP) बढ़ जाता है। अतः मूलरोम में विसरण दाब न्यूनता (DPD) कम हो जाती है क्योंकि DPD = OP – TP होता है। इस समय मूलरोम की अपेक्षा सलंग्न वल्कुट (cortex) कोशिका की विसरण दाब न्यूनता (DPD) अधिक होती है। अतः जल मूलरोम (water root) से संलग्न वल्कुट कोशिका में परासरण क्रिया (osmosis) द्वारा विसरित हो जाता है।

जल ग्रहण करने पर इस वल्कुट कोशिका (valve cell) की विसरण दाब न्यूनता (diffusion pressure reduction) दूसरी सलंग्न कोशिका में विसरित (diffuse) हो जाता है। इस प्रकार जल परासरण क्रिया (water osmosis) एक कोशिका से दूसरी कोशिका में होता हुआ अन्तस्त्वचा तक पहुंच जाता है। अन्तस्त्वचा की कोशिकाओं में कैस्पेरियन पट्टिका पाई जाती है। लेकिन बीच-बीच में कुछ पतली भित्ति वाली मार्ग कोशिकाएं (passage cells) भी पाई जाती है।

इन्हीं मार्ग कोशिकाओं से होता हुआ जल अंततः जाइलम में पहुंच जाता है। जाइलम कोशिकाओं को विसरण दाब न्यूनता (DPD) लवणों के संचयन के कारण सदैव वल्कुट कोशिकाओं से अधिक बनी रहती है जिसके फलस्वरूप इनमें जल का प्रवेश लगातार (continue) जारी रहता है।

मूलरोम से जल संलग्न वल्कुट कोशिका में पहुंचने पर इसके अंदर की विसरण दाब न्यूनता पुनः बढ़ जाती है। फलस्वरुप मृदा जल परासरण क्रिया द्वारा पुनः मूलरोम में प्रवेश कर जाता है और यही क्रम लगातार (continue) चलता रहता है।

इस अवशोषण में जल का परिवहन सिमप्लास्ट पथ (symplast pathway) द्वारा होता है अर्थात जल एक कोशिका के जीवद्रव्य में प्रवेश करता है तथा फिर दूसरी कोशिकाओं के जीवद्रव में प्रवेश करता है।

यद्यपि इस विधि में कहीं भी प्रत्यक्ष रूप से ऊर्जा (ATP) का प्रयोग नहीं होता है। लेकिन जड़ की कोशिकाओं (Cells) में लवणों के अवशोषण (absorption) एवं संचयन के लिए, जो की जड़ की कोशिकाओ में परासरण दाब (OP) को बनाये रखने के लिए जरूरी होते हैं, उपापचयी ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है।

अपरासरणी सक्रिय अवशोषण

इसमें जल का अवशोषण परासरण प्रवणता (osmotic gradient) के विपरीत होता है। इस क्रिया में अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। क्रैमर (kramer) के अनुसार पौधे मृदा से जल का अवशोषण (water absorption) एक सक्रिय अपरासरणी क्रियाविधि द्वारा करते हैं। इस विधि में जल अवशोषण उस समय भी होता है जब मृदा जल का परासरण दाब (OP) मूलरोम के कोशिका रस के परासरण दाब से अधिक होता है।

सामान्यतः ऐसी दशा में जल के अणुओं (particle) का विसरण मूलरोम से बाहर के विलयन (solution) में होना चाहिए, फिर भी सांद्रता प्रवणता (gradient) के विरुद्ध जल का अवशोषण होता है। इस प्रकार के अवशोषण के लिए उपापचयी क्रियाओं (metabolic actions) (जैसे श्वसन) द्वारा उत्पन्न ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यह ऊर्जा किस प्रकार प्रयोग होती है। इसके बारे में अभी सही जानकारी नहीं है। ऊर्जा का प्रयोग प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से हो सकता है। अनेक प्रयोगात्मक प्रमाणों (Experimental evidence) से सिद्ध होता है कि इस प्रकार के जल अवशोषण (water absorption) में ऊर्जा की आवश्यकता पड़ती है।

  1. वे सभी कारक, जैसे- कम ताप, कम ऑक्सीजन, श्वसन संदमक (respiratory inhibitors) आदि जो श्वसन की दर को कम करते हैं, जल अवशोषण की दर को भी घटा देते हैं।
  2. ऑक्सिंन (auxins) जो श्वसन की दर को बढ़ा देते हैं, वे जल अवशोषण की दर को भी बढ़ा देते हैं। उपर्युक्त प्रभावों से स्पष्ट होता है कि श्वसन दर एवं जल अवशोषण (water absorption) में निकट का संबंध है तथा श्वसन के दौरान मुक्त ऊर्जा (free energy) किसी न किसी रूप में अपरासरणी जल अवशोषण (osmotic water absorption) में भाग लेती है।

निष्क्रिय अवशोषण

निष्क्रिय अवशोषण जल अवशोषण की सबसे सामान्य एवं द्रुत (rapid) विधि है। परंतु इसके लिए मृदा में जल की पर्याप्त मात्रा का उपस्थित होना आवश्यक है। यह पौधे द्वारा संपूर्ण उद्ग्रहण जल (uptake water) का लगभग 98% होता है। इस विधि में जल का अवशोषण जड़ों के द्वारा नहीं बल्कि जड़ों से होकर होता है अर्थात इसमें जड़े निष्क्रिय रूप से भाग लेती है तथा सिर्फ एक जल वाहक (water carrier) का कार्य करती है।

इस अवशोषण में ऊर्जा (energy) की आवश्यकता भी नहीं होती है। निष्क्रिय जल अवशोषण (passive water absorption) में पौधे के वायवीय भागों में वाष्पोत्सर्जन के कारण एक बल (force) उत्पन्न होता है जो पत्तियों की मीजोफिल (mesophyll) कोशिकाओं में एक तनाव (tension) अथवा अधिक विसरण दाब न्यूनता (DPD) उत्पन्न करता है। इस विसरण दाब न्यूनता को कम करने के लिए जल पत्तियों की जाइलम कोशिकाओं (वाहिकाओं) से मीजोफिल कोशिकाओं में प्रवेश करता है। जाइलम में एक तनाव (stress) उत्पन्न होता है जो पर्णवृन्त (Foliage), शाखा तथा मुख्य तने से होते हुए अंततः जड़ की जाइलम में स्थानांतरित (moved) हो जाता है।

सक्रिय अवशोषण और निष्क्रिय अवशोषण (12th, Biology, Lesson-1)

यह अवस्था में तरुण जड़ों की परिधीय (peripheral roots) कोशिकाओ में विसरण दाब न्यूनता काफी अधिक बढ़ जाती है। जड़ में विसरण दाब न्यूनतम (diffusion pressure minimum) जाइलम कोशिकाओ से बाहरी त्वचा रोमो तक पहुंच जाती है। इसके फलस्वरूप मूलरोमो (root) से जल का विसरण वल्कुट की कोशिकाओ (cells) में होने लगता है और इससे मूलरोम के कोशिका रस (cell juice) की परासरण सांद्रता बढ जाती है, चूंकि मृदा विलयन की सांद्रता मूलरोम (root) के कोशिका रस से कम होती है अतः जल मूलरोम (water root) में प्रवेश करता है।

इस प्रकार वाष्पोत्सर्जन के फलस्वरुप मीजोफिल कोशिकाओं में उत्पन्न विसरण दाम न्यूनता (DPD) और जाइलम कोशिकाओं में उत्पन्न तनाव के कारण मूलरोम मृदा से जल का अवशोषण करते हैं। इस प्रकार के अवशोषण में जल का परिवहन (water transport) मुख्यतः एपोप्लास्ट पथ (apoplast pathway) द्वारा होता है।

सक्रिय अवशोषण एवं निष्क्रिय अवशोषण में अंतर

क्रमांकसक्रिय जल अवशोषणनिष्क्रिय जल अवशोषण
1.इसमें जड़ की सक्रिय भूमिका (active role) होती है।इसमें जड़ की निष्क्रिय (passive role) भूमिका होती है।
2.यह जड़ विशेषकर मुलरोम (root) की सक्रियता के कारण होता है।यह पौधे के वायवीय भाग, जैसे- प्ररोह एवं पत्तियों (leaf) कि सक्रियता के कारण होता है।
3.जल का अवशोषण परासरण अथवा अपरासरण क्रियाविधियों (osmosis methods) द्वारा होता है।जल का अवशोषण पौधे के ऊपरी भाग में सक्रिय वाष्पोत्सजन (active transpiration) के कारण उत्पन्न तनाव के कारण होता है।
4.इसमें उपापचयी ऊर्जा की आवश्यकता होती है विशेषकर अपरासरण जल अवशोषण (Osmosis water absorption) में।इसमें उपापचयी ऊर्जा (metabolic energy) की आवश्यकता नहीं होती है।
5.इसमें जल का परिवहन सिमप्लास्ट पथ (simplast Path) द्वारा होता है।इसमें जल का परिवहन एपोप्लास्ट पथ (apoplast tract) द्वारा होता है।
6.यह अवशोषण केवल जड़ (root) की उपस्थिति में ही होता है।यह जड़ रहित पौधे (rootless plants) में भी हो सकता है।
7.यह वाष्पोत्सजन की दर (transpiration rate) पर निर्भर नहीं करता है।यह वाष्पोत्सजन की दर पर निर्भर करता है।
8.यह उपापचयी अवरोधकों द्वारा प्रभावित होता है।यह उपापचयी अवरोधकों (metabolic inhibitors) द्वारा प्रभावित नहीं होता है।
9.श्वसन दर का अवशोषण (absorption) दर से सीधा संबंध (अपरासरण सक्रिय अवपोषण) होता है।श्वसन दर का निष्क्रिय अवशोषण (passive absorption) से कोई संबंध नहीं होता है।

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