भारतीय संघवाद की प्रमुख विशेषताएं
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भारतीय संघवाद की प्रमुख विशेषताएं।

1. लिखित एवं कठोर संविधान

भारतीय संविधान लिखित संविधान है। इसमें 395 अनुच्छेद हैं। इसका निर्माण संविधान सभा द्वारा किया गया था। संविधान कठोर है क्योंकि इसका संशोधन विशिष्ट प्रक्रिया द्वारा किया जाता है। संविधान संशोधन में केंद्र तथा राज्य दोनों की समान भूमिका है।

2. शक्तियों का विभाजन

संविधान द्वारा केंद्र तथा राज्यों में शक्तियों का विभाजन किया गया है। इस संबंध में तीन सूचियों केंद्र सूची, राज्य सूची तथा समवर्ती सूची का निर्माण किया गया है। अविशिष्ट शक्तियां केंद्र को प्रदान की गई है।

3. स्वतंत्र एवं निष्पक्ष न्यायपालिका

शक्तियों के विभाजन को बनाए रखने तथा संविधान की रक्षा करने के उद्देश्य से स्वतंत्र,सर्वोच्च तथा निष्पक्ष न्यायपालिका की भी व्यवस्था की गई है।

4. एकात्मक की और झुकी हुई संघात्मक व्यवस्था

भारतीय संघवाद की यह प्रमुख विशेषता है कि यहां एकात्मक की ओर झुकी है।इसलिए कुछ विद्वानों ने इससे आज संघ की संज्ञा प्रदान की है तो कुछ नहीं इसके शरीर को संघात्मक तथा आत्मा को एकात्मक की संज्ञा प्रदान की है।

5. भिखारी नागरिकता तथा इकहरा संविधान

भारतीय संघ में अन्य देशों की संगत मक्का के विपरीत इकहरी नागरिकता तथा इकहरी संविधान की व्यवस्था है।

6. राज्य सभा में राज्यों का असमान प्रतिनिधित्व

भारतीय संघ में राज्यसभा में राज्यों को समान प्रतिनिधित्व प्रदान नहीं किया गया है।छोटे राज्यों की तुलना में बड़े राज्यों का अधिक प्रतिनिधित्व है।

7. राज्यों को अपनी भाषा तथा लिपि बनाए रखने का अधिकार

भारत में राज्यों को अपनी संस्कृति, भाषा तथा लिपि को बनाए रखने का अधिकार है।किसी राज्य में उसकी इच्छा के विपरीत अन्य भाषा को थोपा नहीं जाएगा।

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