चल कुंडली धारामापी क्या है? तथा निलंबित कुंडली धारामापी

चल कुंडली धारामापी क्या है? तथा निलंबित कुंडली धारामापी

moving coil galvanometer in hindi: चल कुंडली धारामापी क्या है, चल कुंडली धारामापी की सहायता से परिपथ में धारा की उपस्थिति तथा उसकी दिशा पता लगा सकते हैं।

धारामापी के प्रकार

धारामापी दो प्रकार के होते हैं।

  1. चल चुंबक धारामापी
  2. चल कुंडली धारामापी

चल कुंडली धारामापी भी दो प्रकार के होते हैं।

  1. कीलकित कुंडली धारामापी
  2. निलंबित कुंडली धारामापी

चल कुंडली धारामापी क्या है

दोस्तों चल कुंडली धारामापी क्या है यह तो मैंने आपको बता दिया है परंतु उसको एक दूसरी परिभाषा में भी जान लेते हैं कि यह क्या है।

चल कुंडली धारामापी के द्वारा किसी विद्युत परिपथ में धारा की उपस्थिति तथा उसकी दिशा ज्ञात की जा सकती है।

निलंबित कुंडली धारामापी

हमने यह तो जान लिया है कि चल कुंडली धारामापी क्या है, तो अब जान लेते हैं कि निलंबित कुंडली धारामापी क्या है।

जब किसी कुंडली को एक समान चुंबक या चुंबकीय क्षेत्र के बीच रखकर उसमें धारा प्रवाहित की जाती है, तो उसपर एक बल युग्म उत्पन्न हो जाता है। अतः इसी को निलंबित कुंडली धारामापी कहते हैं।

निलंबित कुंडली धारामापी की संरचना

एक चुंबकीय पदार्थ की क्रोड होती है जैसे एलुमिनियम की क्रोड होती है। इसके ऊपर तांबे के तार के अनेक फेरे लपेटकर एक कुंडली बनाई जाती है। कुंडली के ऊपरी सिरे पर या ऊपरी भाग पर एक समतल दर्पण (plane mirror) जोड़ दिया जाता है व समतल दर्पण के ऊपरी भाग को एक फास्फर ब्रॉन्ज की पत्ती के द्वारा जोड़ दिया जाता है।

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चल कुंडली धारामापी क्या है? तथा निलंबित कुंडली धारामापी
चल कुंडली धारामापी क्या है, निलंबित कुंडली धारामापी की संरचना

फास्फर ब्रॉन्ज की पत्ती के उपरी सिरे को एक मरोड टोपी से जोड़ देते हैं तथा मरोड टोपी को एक तार द्वारा टर्मिनल T1 से जोड़ दिया जाता है और कुंडली के निचले सिरे को एक स्प्रिंग द्वारा टर्मिनल T2 से जोड़ देते हैं व इस कुंडली को एक प्रबल चुम्बक (strong magnet) के विपरीत ध्रुवों के बीच लटका देते हैं

निलंबित कुंडली धारामापी का सिद्धांत

जब एक धारावाही कुंडली (streamline coil) किसी एक समान चुंबकीय क्षेत्र में स्वतंत्रतापूर्वक इस प्रकार लटकाई जाती है कि इसका तल, चुंबकीय क्षेत्र के समांतर रहे, तो कुंडली पर एक विक्षेपक बल आघूर्ण (deflector moment) लगाता है जो इसे घुमाकर इसके तल चुंबकीय क्षेत्र से लंबवत करने का प्रयास करता है।

यदि कुंडली का क्षेत्रफल A, कुंडली में फेरो की संख्या n, कुंडली में प्रवाहित धारा I तथा चुंबक के ध्रुवो के बीच चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता B है, तो कुंडली पर लगने वाला विक्षेपक बल आघूर्ण अधिकतम होगा।

इस विक्षेपक बल आघूर्ण के कारण जब कुंडली घूमती है, तो उसके निलंबन तार में ऐंठन उत्पन्न हो जाती है जिसके कारण कुंडली पर ऐंठन बल आघूर्ण (spasm torque) लगने लगता है। यह बल आघूर्ण कुंडली के घूमने का विरोध करता है।

ऐंठन बल आघूर्ण का मान कुंडली के विक्षेप के अनुक्रमानुपाती होता है। जब ऐंठन आघूर्ण, विक्षेपक बल आघूर्ण के बराबर हो जाता है, तो कुंडली संतुलन की स्थिति में ठहर जाती है।

यदि संतुलन की स्थिति में निलंबन तार में ऐंठन कोण रेडियन होता है, तो ऐंठन बल आघूर्ण = C∅ जहा C, निलंबन तार की ऐंठन दृढ़ता अर्थात निलंबन तार में एकांक रेडियन उत्पन्न करने के लिए आवश्यक बल आघूर्ण है।

कीलकित कुंडली धारामापी

मैंने आपको निलंबित कुंडली धारामापी क्या है और चल कुंडली धारामापी क्या है इसके बारे में बता दिया है, तो अब जान लेते हैं कि कीलकित कुंडली धारामापी क्या होता है।

कीलकित कुंडली धारामापी में एलुमिनियम के आयताकार अथवा वृत्ताकार फ्रेम (circular frame) पर तांबे के पतले व तार के अनेक फेरे लपेटकर एक कुंडली बनाई जाती है।

चल कुंडली धारामापी क्या है? तथा निलंबित कुंडली धारामापी
चल कुंडली धारामापी क्या है, कीलकित कुंडली धारामापी की संरचना

कुंडली के फ्रेम (coil frame) को एक धुरी पर लगाकर धुरी के सिरे को दो चुलो में इस प्रकार फसाए जाते हैं कि कुंडली, धुरी के परितः आसानी से घूम सकती है।

चल कुंडली धारामापी की सुग्राहिता

यदि धारामापी में कम धारा प्रवाहित करने पर अधिक विक्षेप प्राप्त होता है तो धारामापी की सुग्राहिता (fluorescence sensitivity) अधिक कहीं जाती है, अर्थात धारामापी की सुग्राहिता अधिक होने के लिए राशि ∅/I का मान अधिक होना चाहिए अर्थात कम धारा प्रभावित करने से अधिक पीछे प्राप्त होना चाहिए राशि ∅/I को धारामापी की सुग्रहिता कहते हैं।

सुग्राहिता बढ़ाने के उपाय

  1. कुंडली में फेरो की संख्या n अधिक होने चाहिए।
  2. कुंडली का क्षेत्रफल A अधिक होना चाहिए अर्थात कुंडली बड़ी होनी चाहिए।
  3. चुंबकीय क्षेत्र B प्रबल होना चाहिए।
  4. निलंबन तार या स्प्रिंग की ऐंठन C कम होनी चाहिए।

चल कुंडली धारामापी की विशेषताएं

  1. चल कुंडली धारामापी को किसी भी स्थिति में रखकर प्रयोग कर सकते हैं।
  2. इस पर बाह चुंबकीय क्षेत्र का प्रभाव कम पड़ता है।
  3. इसकी सुग्राहिता अधिक होती है।
  4. इसे अमीटर और वोल्टमीटर में परिवर्तित कर सकते हैं।
  5. इसमें धारा विक्षेप के अनुक्रमानुपाती होती है।
  6. इसके दोलन शीघ्र समाप्त हो जाते हैं।

चल कुंडली धारामापी क्या होता है?

चल कुंडली धारामापी के उपयोग से परिपथ में धारा की उपस्थिति व उसकी दिशा ज्ञात की जा सकती है।

चल कुंडली धारामापी कितने प्रकार की होती है?

धारामापी दो प्रकार के होते हैं (1) चल चुंबक धारामापी
(2) चल कुंडली धारामापी
चल कुंडली भी दो प्रकार का होता है
(1) निलंबित कुंडली धारामापी
(2) कीलकित कुंडली धारामापी

चल कुंडली धारामापी की विशेषताएं बताइए

(1) चल कुंडली धारामापी का दोलन शीघ्र समाप्त हो जाता है।
(2) इसे किसी भी स्थिति में उपयोग किया जा सकता है।
(3) चल कुंडली धारामापी को अमीटर और वोल्टमीटर में परिवर्तित कर सकते हैं।
(4) इसमें धारा विक्षेप के अनुक्रमानुपाती होती है।

अंतिम निष्कर्ष– आज आपको मेरे द्वारा बताई गई जानकारी की चल कुंडली धारामापी क्या है, अगर आपको यह पोस्ट पसंद आती है तो इसे अपने मित्रों में शेयर एंड कमेंट करे और तुरंत जानकारी पाने के लिए हमारा टेलीग्राम चैनल ज्वाइन करें जी धन्यवाद।

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