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कक्षा-10 साहित्यिक गद्यांश(450 से 600 शब्द)

1-गद्यांश(1)

बहुत ही गहरी इंसान थे कलाम साहब। लोगों के लिए वे अग्नि पुरुष, मिसाइल मैन और न जाने क्या-क्या थे। मगर हमारे लिए भी एक ऐसी शख्सियत थे, जिन्होंने अपने जीवन में इंसानियत को सबसे ज्यादा तवज्जो दी। वह सच्चाई और शांति के साथ किसी भी काम को करने में यकीन रखते थे। वैज्ञानिक होते हुए भी मूल्यों पर भरोसा करते थे।

बौद्ध, हिंदू जैसे दुनिया के तमाम धर्मों में उनकी गहरी रुचि थी। अच्छी सोच होना अलग बात है, मगर उसे अपने जीवन में अमल में लाना बिल्कुल दूसरी बात है। मगर कलाम साहब ने अच्छी सोच को अपनी जिंदगी में उतारा भी। सच्चाई, साफगोई और शालीनता उनकी पहचान थी। दोहरेपन का जीवन तो उन्होंने कभी जिया ही नहीं।

बहुत कम समय में भी वह बड़ी ही गहराई के साथ लोगों से जुड़ जाते थे। असफलताएं उन्हें निराश नहीं करती थी। वह उनकी सीखकर आगे बढ़ जाते। उनका हर काम जिंदगी को बेहतर करने के लिए था। उनकी सोच जीवन को खुशनुमा बनाने के लिए थी।

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भले ही उन्होंने मिसाइल बनाई, मगर उनकी सोच, उनका दिल आम आदमी की जिंदगी की बेहतरी के लिए धड़कता था। उन्हें राष्ट्रपति बनने का कभी दम्भ नहीं रहा। बच्चों से मुलाकात के दौरान तो वह खुद बच्चे हो जाते थे। यही वजह है कि ताउम्र बच्चों से मिलने में उन्होंने कभी गुरेज नहीं किया।

लाखों बच्चों से मिले। भारत के बारे में, जिंदगी के बारे में और समाज के बारे में उनके नजरिए को अपने साथ साझा किया। वी बच्चों की जिज्ञासा और उत्सुकता को शांत करने की कोशिश करते उनका कहना था-आइए हम अपने आज का बलिदान कर दें,

ताकि हमारे बच्चों का कल बेहतर हो सके। डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का कथन है सपने वह नहीं जो आप सोते समय देखते हैं, सपने वह होते हैं जो आपको सोने नहीं देते हैं। उन्होंने देश को विकसित बनाने का सपना देखा।

वह मानते थे कि बिना परिकल्पना के कोई भी देख अपने लक्ष्यों को हासिल नहीं कर सकता। अपनी किताब 21वीं सदी का भारत: नव निर्माण की रूपरेखा मैं कलाम साहब ने देश की पहली परिकल्पना भारत की आजादी को बताया था। उनकी दूसरी परिकल्पना विकसित भारत की थी।

प्रश्न :(क) कलाम साहब वैज्ञानिक होते हुए भी किन विषयोंं मे रुचि रखते थे?

(ख) वी असफलताओं से सीख कर क्या करते थे?

(ग) बच्चों का कल बेहतर बनाने हेतु क्या उपाय बताते थे।

(घ) उपयुक्त गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक लिखिए।

उत्तर :(क) कलाम साहब वैज्ञानिक होते हुए भी दुनिया के तमाम धर्मों में रुचि रखते थे।

(ख) वे असफलताओं से सीख कर आगे बढ़ जाते थे।

(ग) बच्चों का कल बेहतर बनाने हेतु अपने आज का बलिदान करने का उपाय बताया है।

(घ) कलाम साहब की परिकल्पना का भारत, उपयुक्तत गद्यांश का उपयुक्तत शीर्षक हो सकता है।

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