ठोसो में निविड संकुलन संरचनाएं (12th, Chemistry, Lesson-1)

ठोसो निविड संकुलन क्या है

निविड संकुलन (close packed): ब्रह्मांड का प्रत्येक तंत्र स्थायित्व की ओर अग्रसर है। अतः क्रिस्टल निर्माण भी स्थायित्व के लिए होता है। क्रिस्टल के रचक अवयव इस प्रकार संतुलित (pack) होते हैं कि उनका घनत्व स्थायित्व अधिकतम रहे। क्रिस्टलो के रचक अवयव (Stirring component) आकार में भिन्न होते हैं, अतः उनका संकुलन भी ज्यामिति (geometry) के अनुसार भिन्न होता है। ठोसो के क्रिस्टल (Solid crystal) में यह संकुलन दो प्रकार का कहलाता है।

  1. द्विविमीय निविड संकुलन (two dimensional close packing)
  2. त्रिविमीय निविड संकुलन (three dimensional close packing)

समन्वय संख्या

किसी क्रिस्टल जालक में कोई परमाणु अपने निकटतम जितने परमाणुओ या पड़ोसियों से घिरा रहता है उसे उस परमाणुओं की समन्वय संख्या कहते हैं। यह किसी त्रिविम (space) जालक की विशिष्टता है तथा क्रिस्टल जालक मॉडल (Crystal lattice model) के निरीक्षण से इस का मान ज्ञात किया जा सकता है। सरल घनीय जालक (Simple cubic lattice) की समन्वय संख्या का मान 6, काय केंद्रित घनीय जालक (Functional concentric lattice) की समन्वय संख्या का मान 8 तथा फलक केंद्रित घनीय जालक की समन्वयन संख्या का मान 12 होता है। इसी प्रकार द्विविमीय जालको में भिन्न-भिन्न समन्वयन संख्या होती है।

द्विविमीय निविड संकुलन

किसी ताल में क्रिस्टल के रचक अवयवो का संकुलन द्विविमीय संकुलन कहलाता हैं। रचक गोलाकार (spherical) माने जाते हैं। द्विविमीय संकुलन दो प्रकार के हो सकते हैं-

वर्गाकार निविड संकुलन

इस प्रकार के संकुलन में प्रत्येक पंक्ति के गोले (रचक अवयव) अपने से नीचे वाले गोलो की सीध में होते हैं (चित्र 1.7 देखे)। इस संकुलन में समन्वय अंक चार होता है।

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षट्भुजाकर निविड संकुलन

इस प्रकार के संकुलन में प्रत्येक पंक्ति के गोले अपने से नीचे वाली पंक्ति के गोलो से बने छिद्रों पर रखे जाते है (चित्र 1.8 देखें) इस संकुलन में समन्वय अंक छः होता है।

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षट्भुजाकर संकुलन वर्गाकार संकुलन की तुलना में अधिक घना (dense) है। वर्गाकार संकुलन में कुल 52.4 प्रतिशत स्थान गोलो द्वारा घिरा होता है। जबकि षट्भुभुजिया संकुलन में 60.4 प्रतिशत।

त्रिविमीय निविड संकुलन

सभी क्रिस्टल त्रिविमीय (Three dimensional) होते हैं। त्रिविमीय निविड संकुलन में द्विविमीय निविड संकुलित (Two dimensional fluid agglomeration) गोलो के ऊपर गोले या उन पर बने छिद्रों (hole) पर गोले रखकर क्रमशः परतें (layers) बनती जाती है। चूंकि द्विविमीय संकुलन (Two dimensional agglomeration) दो प्रकार के होते हैं, अतः त्रिविमीय संकुलन भी दो प्रकार का होता है।

(a) वर्गाकार निविड संकुलन (Square condensation) से त्रिविमीय निविड संकुलन– इस त्रिविमीय संकुलन में द्विविमीय वर्गाकार संकुलित (Two dimensional square packaged) गोलो के ठीक ऊपर गोले रखे होते हैं। अर्थात प्रत्येक तल (surface) अपने नीचे वाले तल के गोलों के ऊपर गोले रखकर बनता है। इस संकुलन से सरल घनीय जालक (simple cubic lattice) बनता है। इस जालक का एकक सेल प्राथमिक घनीय एकक सेल कहलता है। इसका समन्वयन अंक (Co-ordination number) छः होता है (चित्र 1.9 देखें)।

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(b) षट्भुजीय द्विविमीय निविड संकुलन से त्रिविमीय निविड संकुलन– षट्भुजाकर द्विविमीय संकुलन वाले तल के गोलों से बने छिद्रों पर गोले रखकर द्वितीय परत बनती है। प्रथम परत A तथा द्वितीय परत B कही जा सकती है। द्वितीय परत के गोलों को रखने पर दो प्रकार के छिद्र उत्पन्न होते हैं। समचतुष्फलकीय (tetrahedral) एवं अष्टफलकीय (octahedral) (चित्र 1.10 देखे)।

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समचतुष्फलकीय छिद्र प्रथम परत के गोलों के ऊपर बनते हैं जबकि अष्टफलकीय छिद्र प्रथम परत के गोलों के छिद्रों पर बनते हैं। समचतुष्फलकीय छिद्र प्रत्येक परत के गोले बनाते हैं जबकि अष्टफलकीय छिद्र प्रत्येक परत के गोले बनाते हैं जबकि अष्टफलकीय छिद्र (Octahedral hole) दो परतो के गोले मिलकर बनाते हैं (चित्र 1.11 देखे) अब तृतीय परत के गोले दो प्रकार से द्वितीय परत (Second layer) के गोलो पर रखे जा सकते हैं। इसमें संकुलन (packing) भी दो प्रकार का प्राप्त होता है।

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षट्भुजीय निविड संकुलन

तृतीय परत पर बने समचतुष्फलक छिद्रों (Rhombus holes) पर तृतीय परत के गोले रखने से यह परत प्रथम परत (First layer) के समान हो जाती है। अतः यह भी A परत होती है। चतुर्थ परत B के अर्थात द्वितीय परत के समान हो जाती है। इस प्रकार यह संकुलन ABABAB… संकुलन भी कहलाता है। यह संकुलन षट्भुजीय (hexagonal) सममिति (symmetry) देता है। इस संकुलन में समन्वय संख्या 12 होती है। मैग्निशियम (Mg), जिंक (Zn) आदि में यह संकुलन पाया जाता है।

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घनीय निविड संकुलन

द्वितीय पद पर बने अष्टफलकीय छिद्रों (Octahedral hole) पर तृतीय परत के गोले रखने से एक नए प्रकार की परत (new layer) बनती है। यह परत प्रथम व द्वितीय किसी भी परत से समानता (similarity) नही रखती है। इसे C परत कहते हैं। यहां चतुर्थ परत प्रथम परत से समानता रखती है। इस प्रकार यह संकुलन ABCABCABC… संकुलन भी कहलाता है। यह संकुलन घनीय (cubic) सममिति देता है। इस संकुलन में समन्वय संख्या 12 होती है। कॉपर (Cu), सिल्वर (Ag) आदि में यह संकुलन पाया जाता है। इस संकुलन में एकक सेल फलक केंद्रित घन (face centred cubic-fcc) होता है।

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उपर्युक्त त्रिविमीय संकुलन के अतिरिक्त काय केंद्रित घनीय (body centred cubic packing-bbc) भी ठोस क्रिस्टलो में पाया जाता है। इस संकुलन में प्रथम परत वर्गाकार द्विविमीय संकुलन के समान मानी जा सकती है। परंतु इसमें गोले एक-दूसरे के संपर्क में न होकर कुछ दूरी पर होते हैं। द्वितीय परत प्रथम परत के छिद्रों पर गोले रखकर प्राप्त होती है। तृतीय परत प्रथम परत की पुनरावृत्ति (repetition) होती है। इस संकुलन में समन्वय संख्या आठ होती है। इस संकुलन के एकक सेल को काय केंद्रित घन (body centred cube) कहा जाता है।

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