जर्मनी के एकीकरण की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।
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जर्मनी के एकीकरण की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।

जर्मनी का एकीकरण जिन-जिन सौंपानों में हुआ उनका संक्षिप्त विवरण निम्नलिखित है-

1. पहली अवस्था-

18वीं शताब्दी में जर्मनी अनेक राज्यों- प्रशिया,बावेरिया, सैकसनी आदि में विभाजित था। इसलिए इसके आर्थिक विकास की गति भी बहुत धीमी थी। राष्ट्रीय चेतना के जाग्रत होने पर जर्मनी के विभिन्न राज्यों केके लिलोगों ने एकीकरण की मांग उठाना आरम्भ कर दी। 1815 ई० में जर्मनी के राज्यों को ऑस्ट्रिया के साथ मिलाकर एक जर्मन महासंघ की स्थापना का प्रयास किया। फ्रैंकफर्ट में एक राष्ट्रीय पार्लियामेण्ट बुलाई गई जिसे संविधान बनाने का कार्य तक सौंपा गया। परन्तु इस पार्लियामेण्ट को ऑस्ट्रिया के विरोध के कारण सफलता प्राप्त न हो सकी।

2. दूसरी अवस्था-

इस क्रान्ति की असफलता के पश्चात् जर्मनी के एकीकरण का कार्य लोकतन्त्र के रूप में न होकर बिस्मार्क द्वारा सैन्य शक्ति एवं कूटनीति के सहारे किया जाने लगा। बिस्मार्क ने अपनी रक्त और लौह की नीति द्वारा इस एकीकरण के कार्य को पूरा किया। सबसे पहले 1864 ई० में बिस्मार्क के नेतृत्व में प्रशिया और डेनमार्क में एक युद्ध हुआ जिसमें प्रशिया की जीत हुई और उसे शेल्सविंग का प्रदेश प्राप्त हुआ।

3. तीसरी अवस्था-

1866 ई० में प्रशिया (या जर्मनी) का ऑस्ट्रिया के साथ युद्ध हुआ। इस युद्ध में विजय के पश्चात् प्रशिया के साथ अनेक प्रदेश (जैसे हैनोवर, होल्सटीन, लक्समबर्ग, कैसल तथा फ्रैंकफर्ट आदि) आ मिले। जर्मनी से ऑस्ट्रिया का प्रभाव अब हमेशा के लिए समाप्त हो गया और इससे जर्मनी के एकीकरण का कार्य भी सरल हो गया।

4. चौथी अवस्था –

अन्त में 1870 ई० में फ्रांस के साथ जर्मनी का एक भयंकर युद्ध हुआ जिसमें फ्रांस को पराजय का सामना करना पड़ा और उससे आल्सेस और लारेन के महत्त्वपूर्ण प्रदेश छीन लिए गए। इन विजयों से प्रभावित होकर शेष बचे हुए जर्मन प्रदेश (जैसे बवेरिया, बर्टमबर्ग, बेडन और दक्षिणी हैस) भी जर्मन महासंघ में सम्मिलित हो गए और परसिया के शासक बिलियन प्रथम को 1831 ईस्वी में संयुक्त जर्मनी का सम्राट घोषित कर दिया गया।

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