विसरण किसे कहते है व उसके प्रकार (12th, biology, Lesson-1)

विसरण के बारे में

“किसी ठोस, द्रव्य या गैस के अणुओं या आयनों का अधिक सांद्रता वाले क्षेत्र से कम सांद्रता (Concentrations) वाले क्षेत्र की ओर गमन विसरण कहलाता है।”

अगरबत्ती की खुश्बू का पूरे कमरे में फैल जाना, शक्कर का पानी में घुलना, लाल दवा (KMnO₄) का पानी में डालने पर उसका जल में घुलकर फैलना, प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में CO₂ को वातावरण (environment) से लेना तथा O₂ का निकलना आदि सभी विसरण (diffuse) के उदाहरण हैं। गैस, द्रव तथा ठोस पदार्थ के कण (particle) एक-दूसरे में विसरित (diffuse) होते हैं। विसरण की दर गैसों में सबसे अधिक, द्रवों में गैसों से कम तथा विलेय (ठोस) को विलायक (द्रव) में घोलने पर द्रवों में अपेक्षाकृत कम होती है।

विसरण किसे कहते है (12th, biology, Lesson-1)

एक ही तंत्र (mechanism) में उपस्थित दो या अधिक पदार्थों के अणुओं (molecule) के डिफ्युजन की दिशा व गति एक-दूसरे पर निर्भर नहीं करती है अर्थात किसी भी तंत्र में विभिन्न प्रकार के अणुओं का डिफ्युजन (विसरण) अपने ही अणुओं की सांद्रता (Concentrations) पर निर्भर करता है।

उदाहरण के लिए, किसी पानी से भरे बीकर (beaker) में, यदि नमक और चीनी कण (particle) एक साथ डाले जाएं तो दोनों स्वतंत्र रूप से पानी में विसरित (diffused) हो जाएंगे। किंतु यह तभी होगा जब ये पदार्थ एक-दूसरे से रासायनिक क्रिया (chemical action) न करते हो। इन दोनों पदार्थों के विसरित होने की गतियां (motions) भिन्न-भिन्न होगी, किंतु अंत में एक ऐसी अवस्था आ जाएगी जब घोल अथवा विलयन (solution) के प्रत्येक भाग में नमक की सांद्रता समान होगी और चीनी (sugar) की भी सांद्रता घोल के प्रत्येक भाग में समान होगी, परंतु दोनों पदार्थों की सांद्रताए (Concentrations) एक-दूसरे से भिन्न होगी, क्योंकि यह प्रत्येक पदार्थ के कुल कितने अणु (particle) पानी में डाले गए हैं, इस पर निर्भर नहीं करता विसरण की इस विशेषता को स्वतंत्र विसरण का नियम (principal of independent diffusion) कहते हैं।

डिफ्यूजन के उदाहरण

विसरण (diffusion) को निम्नलिखित तीन उदाहरणों की सहायता से समझाया जा सकता है-

  1. जब कॉपर सल्फेट (CuSO₄) का एक टुकड़ा पानी से भरे बीकर (beaker) में रखा जाता है, तो कुछ समय बाद कॉपर सल्फेट के टुकड़े (pieces) के चारों ओर का पानी नीले रंग का हो जाता है क्योंकि कॉपर सल्फेट के अणु सभी दिशाओं में तब तक डिफ्युजन करते हैं जब तक कि ये बीकर के पानी में समान रूप से विसरित न हो जाये तथा संपूर्ण पानी (All water) का रंग समान रूप से नीला न हो जाये।
  2. कोशिका झिल्ली एक छिद्रयुक्त (porous) झिल्ली है, जिसमें असंख्य के छोटे-छोटे छिद्र पाये जाते हैं। ये 7A°-10A° व्यास वाले होते हैं। ये छिद्र कुछ विशिष्ट प्रोटीन अणुओं के द्वारा बनते हैं तथा इनमें कुछ छिद्र धनावेशित (positive charge) तथा ऋण आवेशित (negative charge) होते हैं। ये छिद्र या तो हमेशा खुले (open) रहते हैं अथवा ये छिद्र एक वाल्व की तरह कार्य करते हैं तथा तभी खुलते हैं जब इनकी आवश्यकता होती है। अनेक प्रकार के आयन्स, जैसे – K⁺, C1⁻, HCO₃ इत्यादि इन छिद्रों से विद्युत-रासायनिक प्रवणता के अनुसार प्रवेश करते हैं।
  3. किसी तंत्र में किसी एक गैस के डिफ्युजन दाब को आंशिक दाब (partial pressure) कहते हैं। गैस हमेशा उच्च आंशिक दाब के क्षेत्र से निम्न आंशिक दाब के क्षेत्र की ओर डिफ्युजन करती है, जैसे- ऊतक श्वसन में गैसों का आदान-प्रदान। उपयुक्त तीनों उदाहरणों से यह निष्कर्ष निकलता है कि विद्युत-अपघटन (non-electrolyte) के अणुओं का विसरण सांद्रण प्रवणता के अनुसार, विद्युत-अपघटन (electrolyte) के अणुओं या आयनों का विसरण विद्युत-रासायनिक प्रवणता के अनुसार एवं गैसों का डिफ्युजन आंशिक दाब के अनुसार होता है।

विसरण दाब

डिफ्यूजन (विसरण) दाब एक परिकल्पनात्मक शब्द (Hypothetical term) है। इसका संबंध विसरित होने वाले पदार्थों की सांद्रता से होता है। “किसी पदार्थ के अणुओ या आयनों की विसरित होने की प्रवृत्ति के फलस्वरूप उत्पन्न दाब विसरण दाब (diffusion pressure) कहलाता है।” यह दाब डिफ्युजन करने वाले अणुओं (molecule) की सांद्रता के सीधे समानुपाती (proportionate) होता है। किंतु दो बिंदुओं (point) डिफ्युजन दाब में अंतर विसरण दाब की प्रवणता (diffusion pressure gradient) कहलाती है। डिफ्युजन सदैव अधिक डिफ्युजन दाब (सांद्रता) वाले क्षेत्र से कम डिफ्युजन दाब वाले क्षेत्र की ओर होता है अर्थात डिफ्युजन दाब प्रवणता (gradient) के अनुसार होता है। इस प्रकार किसी क्षेत्र में डिफ्युजन की दर उस क्षेत्र के दो बिंदुओं के विसरण (diffusion) दाब अंतर पर निर्भर करती है।

विसरण दर को प्रभावित करने वाले कारक

  • तापक्रम (temperature)– तापक्रम के बढ़ाने से विसरण की दर भी बढ़ जाती है।
  • माध्यम की सांद्रता (concentration of the medium )– माध्यम की सांद्रता के कम होने पर विसरण दर अधिक तथा सांद्रता अधिक होने पर डिफ्युजन दर कम होती जाती है।
  • विसरण करने वाले कणों का आकार एवं भार (The size and weight of the diffusing particles)– अणुओं का आकार एवं भार जितना कम होगा उतना ही उनका डिफ्युजन अधिक होगा।
  • विसरण दाब प्रवणता (diffusing pressure gradient)– डिफ्युजन दाब में जितना अधिक अन्तर होगा उतना ही डिफ्युजन की दर अधिक होगी।
  • विसरण करने वाले कणों का घनत्व (Density of the diffusing particles)– ग्राह्म (grahm) के डिफ्युजन नियम के अनुसार किसी गैस के डिफ्युजन की दर उसके घनत्व के वर्गमूल (square root) के व्युत्कृमानुपाती होती है।

पादपों में विसरण का महत्व

  1. विसरण, कोशिकाद्रव्य (cystoplasm) में पदार्थों के समान रूप से डिफ्युजन में सहायक है।
  2. पुष्प खुशबूदार रसायन स्रावित करते हैं। ये रसायन हवा में विसरित हो जाते हैं तथा परागण के लिए कीटों (insect) को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।
  3. जड़ों द्वारा जल का अवशोषण (absorption) विसरण (Diffusion) द्वारा होता है।
  4. पौधों (plant) में वाष्पोत्सर्जन (transpiration) की क्रिया विसरण द्वारा होती है।
  5. खनिज लवणों (mineral salts) का निष्क्रिय अवशोषण विसरण द्वारा होता है।
  6. पत्तियों के स्टोमेटा द्वारा वायुमंडल से ऑक्सीजन (O₂) व कार्बन डाइ-ऑक्साइड (CO₂) गैसों का विनिमय विसरण द्वारा ही होता है।

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