अनुगमन वेग किसे कहते हैं (12th, Physics, Lesson-3)

अनुगमन वेग के बारे में

drift velocity in hindi जब किसी तार को बैटरी से जोड़ा जाता है। तो बैटरी का विभव इलेक्ट्रॉनों को तीव्र गति नहीं दे पाता है तब निम्न विभव से उच्च विभव वाले सिरे की ओर एक नियत वेग ही दे पाता है। इसी नियत वेग को अपवाह वेग या अनुगमन वेग कहते हैं। इसे vd से प्रदर्शित करते है। j = nevd

दूसरे शब्दों में, जब किसी चालक में धारा प्रवाहित की जाती है तो चालक में उपस्थित इलेक्ट्रॉन एक निश्चित वेग 10⁻⁴ मीटर/सेकंड से गति करने लगता है। इलेक्ट्रॉनों के इस नियत सूक्ष्म वेग को अपवाह वेग या अनुगमन वेग कहते हैं।

विद्युत धारा और अनुगमन वेग में संबंध

माना किसी चालक तार का अनुप्रस्थ काट का क्षेत्रफल A तथा चालक की लंबाई l है। चालक में कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या N = nAl, चूंकि चालक पर कुल आवेश Q = N.e, Q = nAl.e, लगने वाला समय t = l/Vd, चूंकि प्रवाहित धारा i = Q/t = i = nAl.e/l/Vd = i = nAle × Vd/l = i = nAeVd यही धारा एवं अनुगमन वेग में संबंध है।

अनुगमन वेग किसे कहते हैं (12th, Physics, Lesson-3)

यदि धारा घनत्व J हो तो J = I/A = nAeVd/A = J = neVd यही धारा घनत्व एवं अनुगमन वेग में संबंध है।

अनुगमन वेग के आधार पर ओम का नियम की उत्पत्ति

माना किसी चालक तार की लंबाई l है और उसका परिच्छेद क्षेत्रफल A है। जब इसके सिरो के बीच विभवांतर स्थापित किया जाता है तो इसमें धारा बहने लगती है। यदि तार में इलेक्ट्रॉन की संख्या n व उनका अनुगमन वेग Vd हो तब धारा i = n.e A Vd (समीकरण 1), यदि तार के सिरों के बीच का विभवांतर V हो तो तार के प्रत्येक बिंदु पर विद्युत क्षेत्र E = V/l, विद्युत क्षेत्र द्वारा प्रत्येक मुक्त इलेक्ट्रॉन पर लगाया गया बल F = e.E = e.V/l चूंकि V/l है। यदि इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान m हो तो इस बल के कारण उत्पन्न a = F/m = a = eV/l.m चूंकि F = eV/l (समीकरण 2)

मुक्त इलेक्ट्रॉन के बार-बार टकराने से, विद्युत क्षेत्र की विपरीत दिशा में इनका वेग बढ़ जाता है। यदि इलेक्ट्रॉनों की धनायनो उसे दो क्रमागत टक्करो का समय τ (टाऊ) हो तो इलेक्ट्रॉन के वेग में aτ की वृद्धि होगी। यदि विद्युत क्षेत्र की अनुपस्थिति में किसी इलेक्ट्रॉन का वेग u₁ हो तो, विद्युत क्षेत्र की उपस्थिति में यह u₁ + aτ₁ हो जायेगा।

इसी प्रकार अन्य इलेक्ट्रॉन के वेग (u₂ + aτ₂), (u₃ + aτ₃) होंगे। तब Vd = (u₁ + aτ₁) + (u₂ + aτ₂) + un + aτn/n, Vd = u₁ + u₂ + un/n + a (τ₁ + τ₂ + τn)/n, Vd = 0 + aτ (समीकरण 3), τ = (τ₁ + τ₂ + τn)/n

समीकरण 2 का मान समीकरण 3 में रखने पर Vd = eVτ/l.m यह अनुगमन Vd, श्रान्तिकाल τ तथा विभवांतर V में सम्बन्ध है।

Vd का मान समीकरण 1 में रखने पर i = neAeVτ/m.l, V/i = ml/ne²Aτ, ml/ne²Aτ एक निश्चित ताप नियतांक है। V/i = R यही ओम का नियम है।

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