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विद्युत मोटर क्या है? | सिद्धांत | कार्य विधि | महत्व | अंतर

नमस्कार दोस्तों, आज के इस लेख में हम आपको, इलेक्ट्रिक मोटर क्या होती है, ओर “इलेक्ट्रिक मोटर के कार्य” करने का “वर्किंग प्रिंसिपल” बताने वाले हैं कि इलेक्ट्रिक मोटर कैसे काम करती है उसके पीछे कौन सा “सिद्धांत” काम करता है तो अगर आप “इलेक्ट्रिक मोटर का वर्किंग प्रिंसिपल” के बारे में जानना चाहते हैं तो इस लेख को लास्ट तक जरूर पड़े तो चलिए शुरू करते हैं।

विद्युत मोटर क्या है? | vidyut motor kya hai

विद्युत मोटर एक ऐसी मशीन होती है, जो विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदल देती है। अर्थात जब हम किसी मोटर पर विद्युत सप्लाई देते हैं तो मोटर घूमने लगती है और मोटर में यांत्रिक बल उत्पन्न हो जाता है और इस बल का इस्तेमाल बहुत बड़े पैमाने पर किया जाता है।

आज के समय में विश्व में विद्युत मोटर का सबसे ज्यादा इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहन में उपयोग हो रहा है जिसकी वजह से गाड़ियों के पहिए घूमते होते हैं और आपको यात्रिक ऊर्जा मिल जाती है।

विद्युत मोटर क्या है? | सिद्धांत | कार्य विधि | महत्व | अंतर
विद्युत मोटर क्या है? | सिद्धांत | कार्य विधि | महत्व | अंतर

विद्युत मोटर का सिद्धांत क्या है? | vidyut motor ka siddhant

जब किसी कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र में रखकर उसमें धारा प्रवाहित की जाती है। तो कुंडली पर एक बल युग्म कार्य करने लगता है, जो कुंडली को उसकी अक्ष पर घूमने के लिए स्वतंत्र हो तो वह घूमने लगती हैं।

विद्युत मोटर की कार्य विधि क्या है? | vidyut motor ki karyavidhi

जब बैटरी से कुंडली में विद्युत धारा प्रवाहित करते हैं तो फ्लेमिंग के बाएं हाथ के नियम से कुंडली की भुजाओं AB तथा CD पर बराबर, परंतु विपरीत दिशा में दो बल कार्य करने लगते हैं। यह बल एक बल-युग्म बनाते हैं जिसके कारण कुंडली दक्षिणावर्त दिशा में घूमने लगती है। विभक्त वलयों की सहायता से धारा की दिशा इस प्रकार रखी जाती है। की कुंडली पर बल लगाकर एक ही दिशा में कार्य करें, अर्थात कुंडली एक दिशा में घूमते रहे।

विभक्त वलय का महत्व? | vidyut walay ka mahatva

विभक्त वलय का अर्थ का “कार्य कुंडली में प्रवाहित धारा की दिशा को बदलना” है। विद्युत शक्ति का मानव विकास में एक महत्वपूर्ण योगदान दिया है। जब कुंडली आधा चक्कर पूर्ण कर लेती है तो विभक्त बलयों का ब्रुशो से संपर्क समाप्त हो जाता है और विपरीत ब्रुशो से संपर्क जुड़ जाता है। इसके फलस्वरूप कुंडली में धारा की दिशा सदैव इस प्रकार बनी रहती है कि कुंडली एक दिशा में घूमती रहे।

विद्युत मोटर तथा विद्युत जनित्र में कार्य के आधार पर अंतर-

विद्युत मोटर विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है,जबकि विद्युत जनित्र यांत्रिक कार्य को विद्युत ऊर्जा में बदलता है।

विद्युत मोटर किसे कहते हैं।

विद्युत मोटर एक ऐसा साधन है, जो विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में बदलता है।

विद्युत मोटर का सिद्धांत क्या है।

जब किसी कुंडली को चुंबकीय क्षेत्र में रखकर उसमें धारा प्रवाहित की जाती है। तो कुंडली पर एक बल युग्म कार्य करने लगता है, जो कुंडली को उसकी अक्ष पर घूमने के लिए स्वतंत्र हो तो वह घूमने लगती हैं।

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