संधारित्र में संचित ऊर्जा और उपयोग (12th, Physics, Lesson-3)

संधारित्र में संचित ऊर्जा के बारे में

Energy stored in capacitor in hindi किसी संधारित्र को उसके विद्युत क्षेत्र में आवेशित करने के लिए किया गया कार्य उस चालक की स्थतिज ऊर्जा या उसमें संचित ऊर्जा कहलाती है।

संधारित्र में संचित ऊर्जा और उपयोग (12th, Physics, Lesson-3)

यदि किसी संधारित्र की धारिता C हो तथा उसे q आवेश देने पर उसका विभव V हो तब V = q/c संधारित्र को सूक्ष्म आवेश dq देने में किया गया कार्य

dw = V.dq, dw = q/c.dq {V = q/c} अतः संधारित्र को q आवेश देने में किया गया कार्य w = ∫q₀ q/c. dq, w = 1/c [q²/2]q₀ = 1/2 q²/c अतः संधारित्र में संचित ऊर्जा U = 1/2 q²c = 1/2 CV² = 1/2 Vq इकाई जूल है।

12 pf का 1 संधारित्र 50 वोल्ट की बैटरी से संधारित्र जुड़ा है। संधारित्र में कितनी स्थिर विद्युत ऊर्जा संचित होगी?

C = 12 × 10⁻¹²F, V = 50v, U = 1/2 CV², 1/2 x 12 x 10⁻¹² x (50)², U = 15 x 10⁻⁹ J

संधारित्र का ऊर्जा घनत्व

माना किसी समांतर प्लेट वायु संधारित्र की प्लेटों के बीच दूरी एवं प्रत्येक प्लेट का क्षेत्रफल A है। इसलिए वायु संधारित्र की धारिता C = E₀A/d (समीकरण 1) चूंकि संधारित्र की प्लेट के बीच स्थितिज ऊर्जा U = 1/2 CV² (समीकरण 2) जहा V = संधारित्र की प्लेटों के बीच विभवांतर चूंकि U = 1/2 E₀A/d x V² (समीकरण 3) अथवा U =1/2 E₀A²/axd x V² axd = प्लेटो के बीच का आयतन।

यदि प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र E हो तो V = Exd, U = 1/2 E₀A² x E²d²/axd, अथवा U =1/2 E₀E² (axd) एकांक आवेश में स्थितिज ऊर्जा घनत्व u = U/आयतन = 1/2 E₀E² (axd)/(axd) अथवा u = 1/2 E₀E²

यदि संधारित्र की प्लेटों के बीच K परावैद्युतांक का परावैद्युत माध्यम है तो ऊर्जा घनत्व u = 1/2 K E₀E²

संधारित्र का उपयोग

मोटरो में, छत के पंखे में, कूलर की मोटर, चक्की की मोटर, टेबल पंखों में, स्पार्किंग कम करने में, डी.सी. परिपथ में, ए.सी. से डी.सी. प्राप्त करने में, बैटरी चार्जर में, ट्यूब लाइट स्टार्टर आदि में संधारित्र का उपयोग किया जाता है।

More Informationसंधारित्र का संयोजन (12th, Physics, Lesson-3)



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