वन संरक्षण का अर्थ बताइए?
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वन संरक्षण का अर्थ बताइए?

वन संरक्षण(Forest preservation)

वन संरक्षण का अर्थ है-वनों का विवेकपूर्ण उपयोग और वन क्षेत्र मैं वृद्धि करना। प्राचीन काल में भारत में वनों का विस्तार पर्याप्त क्षेत्रफल में था। परंतु जनसंख्या के बढ़ते दबाव के फल स्वरुप आवास, कृषि, सड़कें, रेल मार्ग और उद्योगों की स्थापना के लिए वनों का निर्माता से विनाश किया गया।

वन क्षेत्र का अभाव हो जाने से पर्यावरण असंतुलन के दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं। वर्तमान में सरकार ने भी इस और ध्यान दिया है तथा राष्ट्रीय वन नीति, 1952 एवं संशोधन राष्ट्रीय वन नीति, 1988 घोषित की है, जिसके अनुसार कल भूमि के एक तिहाई भाग पर वन होने चाहिए। वन महोत्सव और सामाजिक वानिकी कार्यक्रम इसी दिशा में हमारे बढ़ते कदम है।

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वन संरक्षण की आवश्यकता

वस्तुत वन संपदा हमारी अमूल्य धरोहर है, हमें इसे नष्ट नहीं करना चाहिए। हमारा कर्तव्य होना चाहिए कि हम इसमें वृद्धि कर आगे आने वाली पीढ़ियों को दें।वन संरक्षण की आवश्यकता के निम्नलिखित कारण महत्वपूर्ण है-

1.लगभग 50 टन भार का एक सामान्य स्वाभाविक रूप से अपने अंत तक पर्यावरण में ऑक्सीजन देकर, मृदा क्षरण को रोककर, प्रदूषण कम करने प्रोटीन तथा अन्य उत्पादों के माध्यम से लगभग 1500000 ₹17000 का लाभ मानव समाज को देता है।

2.वनों का अंधाधुंध कटाव सभ्य समाज का अविवेकपूर्ण कृत्य है। ऐसा करके हम विनाश की ओर अग्रसर हो रहे हैं।

3.पृथ्वी के बढ़ते तापमान से मौसम पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसी कारण देश के हिम क्षेत्रों का निरंतर पीछे हटना और विलुप्त होना भावी संकट का संकेत है जिसके पीछे मूल कारण वनों का विनाश है।

4.अनियंत्रित आखेट, पन बिजली परियोजना, खानो और खेतिहर भूमि के विस्तार के कारण जंगलों का बारी विनाश हुआ है। जिस कारण वन्य जीवो की बहुत सी प्रजातियां विलुप्त हो चुकी है।

1. वन संरक्षण की एक आवश्यकता बताएं।

लगभग 50 टन भार का एक सामान्य स्वाभाविक रूप से अपने अंत तक पर्यावरण में ऑक्सीजन देकर, मृदा क्षरण को रोककर, प्रदूषण कम करने प्रोटीन तथा अन्य उत्पादों के माध्यम से लगभग 1500000 ₹17000 का लाभ मानव समाज को देता है।

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