हड़प्पा सभ्यता क्या है? तथा प्रमुख विशेषता व इसकी खोज

harappan civilization in hindi: मेरी वेबसाइट पर आपका स्वागत है, मैंने इस पोस्ट के माध्यम से आपको बताया है कि हड़प्पा सभ्यता क्या है? व इसकी कुछ विशेषताएं तथा इसके बारे में संपूर्ण जानकारी बताई है, आप यह जानकारी पाना चाहते हैं, तो इस पोस्ट को पूरा पढ़िए।

हड़प्पा सभ्यता क्या है?

अक्सर पुरानी इमारतें अपनी कहानियां बताती है, लगभग 150 साल पहले पंजाब में पहली बार रेलवे लाइन बिछाई जा रही थी, तो इस काम में जुटे इंजीनियरों को अचानक हड़प्पा पुरातत्व स्थल मिल गया, जो आधुनिक पाकिस्तान में है।

उन्होंने सोचा कि यह एक ऐसा खंडहर है, जहां से अच्छी ईटे मिलेंगी। यह सोचकर वे हड़प्पा के खंडहरों से हजारों ईटे उखाड़कर ले गए, जिससे उन्होंने रेलवे लाइनें बिछानी शुरू कर दी, इस कारण कई इमारतें पूरी तरह नष्ट हो गई।

हड़प्पा सभ्यता के बारे में संपूर्ण जानकारी
हड़प्पा सभ्यता की इमारतें

इसके बाद 1920 में शुरुआती पुरातत्व वेदो ने इस स्थल को ढूंढा, तब पता चला कि यह खंडहर उपमहाद्वीप के सबसे पुराने शहरों में से एक था, क्योंकि इस इलाके का नाम हड़प्पा था। इसलिए बाद में यहां से मिलने वाली सभी पुरातात्विक वस्तुओं और इमारतों का नाम हड़प्पा सभ्यता के नाम पर पड़ा तथा इन नगरों का निर्माण लगभग 4700 साल पहले हुआ था।

हड़प्पा सभ्यता की प्रमुख विशेषता

  1. हड़प्पा सभ्यता के नगरों को दो या उससे ज्यादा भागों में विभाजित किया गया था।
  2. प्राय पश्चिमी भाग छोटा था, लेकिन ऊंचाई पर बना हुआ था और पूर्वी हिस्सा बड़ा था, लेकिन ये निचले हिस्से में था।
  3. ऊंचाई वाले भाग को पुरातत्व वेदों ने शहर का किला और निचले हिस्से को निचला नगर कहा है।
  4. दोनों हिस्सों की चारदीवारी पकी हुई ईंटों से बनाई गई थी, इसकी ईंटें इतनी अच्छी तरह से पकी हुई थी कि की हजारों साल बाद भी आज तक उनकी दीवारें खड़ी हुई है।
  5. दीवारें बनाने के लिए ईटों की चिनाई इस तरह करते थे कि जिससे की दीवार सालों साल मजबूत रहे।
  6. ऊपरी हिस्से के नगरों में कुछ खास इमारतें बनाई गई थी। मिसाल के तौर पर मोहनजोदड़ो में एक खास तालाब बनाया गया था, जिसे पुरातत्व वेदों ने महान स्नानघर कहा था।
  7. इस तालाब को बनाने में ईंट और प्लास्टर का इस्तेमाल किया गया था। इसमें पानी का रिसाव रोकने के लिए प्लास्टर के ऊपर चारकोल की परत चढ़ाई गई थी।
  8. इस सरोवर में दो तरफ से उतरने के लिए सीढ़ियां बनाई गई थी और चारों ओर कमरे बनाए गए थे।
  9. सरोवर में पानी भरने के लिए पानी कुएं से निकाला जाता था और उपयोग के बाद यह पानी खाली कर दिया जाता था।
  10. इस सरोवर में विशिष्ट नागरिक विशेष अवसरों पर यहां स्नान किया करते थे।
  11. कालीबंगा और लोथल जैसे अन्य नगरों में अग्निकुंड भी मिले हैं, यहां संभवतः यज्ञ किए जाते होंगे।
  12. मोहनजोदड़ो और लोथल जैसे कुछ नगरों में बड़े-बड़े भंडार गृह भी मिले।
  13. मोहनजोदड़ो और लोथल जैसे नगरों के घर एक या दो मंजिल के होते थे और घर के आंगन के चारों ओर कमरे बनाए जाते थे, इसके अलावा अधिकांश घरों में अलग-अलग स्नान घर भी होते थे तथा कुछ घरों में तो कुएं भी होते थे।
  14. कई नगरों में ढके हुए नाले थे, इन्हें सावधानी से सीधी लाइन में बनाया गया था तथा हर नाली में हल्की ढलान होती थी, ताकि पानी आसानी से बह सके।
  15. इन नगरो के घरों की नालियों को सड़कों की नालियों के साथ जोड़ दिया जाता था जो बाद में बड़े नालों के साथ मिल जाती थी।
  16. नालों को ढककर जगह-जगह पर मेन होल बनाए गए थे, जिनके जरिए इन नालो की देखभाल और सफाई की जा सके।
  17. घर, नाले और सड़कों का निर्माण योजनाबद्ध तरीके से एक साथ ही किया जाता था।

इन सभी बातों को देखते हुए पता चलता है कि हड़प्पा सभ्यता 4700 साल पहले भी कितनी विकसित थी।

हड़प्पा सभ्यता का नगरीय जीवन

हड़प्पा के नगरों में बड़ी ही हलचल रहा करती होगी और यहां पर ऐसे लोग रहते होंगे जो नगर की बड़ी इमारतों को बनाने में जुटे रहते होंगे।

ये संभवतः यहां के शासक थे और यह भी संभव है कि यह शासक लोगों को दूर-दूर तक भेजकर धातु, बहुमूल्य पत्थर और अन्य उपयोगी चीजें मंगवाते थे।

शायद यहां के शासक लोग अपने पास सोने व चांदी की कीमती धातुओं से बनी चीजों को अपने पास रखते होंगे।

इन नगरों में लिपिक भी होते थे जो मुहरो में लिखते ही थे, पर शायद अन्य चीजों पर भी लिखते होंगे, जो बच नहीं पाई है।

इसके अलावा इन नगरों में शिल्पकार स्त्री और पुरुष भी रहते थे, जो अपने घरों में या अन्य स्थल पर तरह-तरह की चीजें बनाते होंगे।

हड़प्पा सभ्यता के लोग लंबी यात्राएं भी करते थे और वहां से उपयोगी वस्तुएं लाते थे। इसके साथ ही वे अपने साथ लाते थे, दूर के देशों की किस्से व कहानियां।

हड़प्पा सभ्यता की खुदाई के दौरान मिट्टी से बने कई खिलौने भी मिले हैं, जिनसे उस समय के बच्चे खेला करते होंगे।

हड़प्पा के नगरों से प्राप्त वस्तुएं

आइए अब ऐसी वस्तुओं के नाम जानते हैं जो हड़प्पा के नगरों से प्राप्त हुई थी।

पुरातत्व वेदों को जो चीजें वहां से मिली है, उनमें अधिकतर पत्थर, शंख, तांबे, कांसे और सोने व चांदी जैसी धातुओं से बनाई गई वस्तुएं मिली थी।

तांबे और कांसे से गहने व बर्तन बनाए जाते थे और यहां मिले सबसे आकर्षक वस्तुओं में तराजू के बाट व फलक है।

हड़प्पा सभ्यता के बारे में संपूर्ण जानकारी
हड़प्पा के लोगों द्वारा उपयोग किए जाने वाले बर्तन

हड़प्पा सभ्यता के लोग पत्थर की मुहर बनाया करते थे, इन मुहरो पर सामान्यतः जानवरों के चित्र मिलते थे तथा हड़प्पा सभ्यता के लोग लाल मिट्टी के बर्तन बनाया करते थे, जिन पर काले रंग के खूबसूरत डिजाइन भी बने होते थे।

हड़प्पा में लोगों को कई चीजें वहां ही मिल जाया करती थी, लेकिन तांबा, लोहा, सोना व चांदी और बहुमूल्य पत्थरों जैसे पदार्थों को वह बहुत दूर-दूर से लाते थे।

हड़प्पा के लोग तांबे का आयात संभवतः आज के राजस्थान से करते थे और यहां तक कि पश्चिमी एशियाई देश ओमान से भी तांबे का आयात किया जाता था।

कांसा बनाने के लिए तांबे के साथ मिलाई जाने वाली धातु टिन का आयात आधुनिक इरान और अफगानिस्तान से किया जाता था।

सोने का आयात आधुनिक कर्नाटक और बहुमूल्य पत्थर का आयात गुजरात, इरान और अफगानिस्तान से किया जाता था।

इन बातों से यह सिद्ध होता है कि हड़प्पा सभ्यता के लोग हजारों साल पहले भी आयात व निर्यात के द्वारा व्यापार भी किया करते थे।

लोग नगरों के अलावा गांव में भी रहते थे तथा वे अनाज उगाते थे और जानवर भी पालते थे। किसान और चरवाहे शहरों में रहने वाले शासकों, लेखकों और दस्तकारों को खाने का सामान देते थे।

पौधों के अवशेषों से यह पता चलता है कि हड़प्पा के लोग गेहूं, दाले, मटर, धान, तिल और सरसों आदि उगाते थे।

उस समय जमीन की जुताई के लिए हल का प्रयोग एक नई बात थी। हड़प्पा काल के हल तो नहीं बच पाए हैं क्योंकि वे प्राय: लकड़ी से बनाए जाते थे, लेकिन हल के आकार के खिलौने मिले हैं।

इससे यह साबित होता है कि हड़प्पा सभ्यता के लोग हजारों साल पहले भी अपने खेत की जुताई के लिए हल का उपयोग भी करते थे।

हड़प्पा के लोग गाय, भैंस, भेड़ और बकरी भी पालते थे तथा बस्तियों के आसपास तालाब और चारागाह होते थे, लेकिन सूखे महीनों में मवेशियों के झुंडो को चारा, पानी की तलाश में दूर-दूर तक ले जाया जाता था।

हड़प्पा सभ्यता के बारे में संपूर्ण जानकारी

गुजरात में हड़प्पा कालीन नगर का सूक्ष्म निरीक्षण

कच्छ के इलाके में खादिर वेद के किनारे धोलावीरा नगर बसा था, वहां साफ पानी मिलता था और जमीन उपजाऊ थी, जहां हड़प्पा सभ्यता के कई नगर दो भागों में बंटे थे।

धोलावीरा नगर को तीन भागों में बांटा गया था, इसके हर हिस्से के चारों ओर पत्थर की ऊंची-ऊंची दीवार बनाई गई थी और इसके अंदर जाने के लिए बड़े-बड़े प्रवेश द्वार थे। इन नगर में एक खुला स्थान भी था, जहां सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किये जाते थे।

धोलावीरा में मिले कुछ अवशेषों में हड़प्पा लिपि के बड़े-बड़े अक्षरों को पत्थरो में खुदा पाया गया है। इन लेखों को संभवतः लकड़ी में जड़ा गया था, ये एक अनोखा अवशेष है, क्योंकि आमतौर पर हड़प्पा के लेख मुहर जैसी छोटी वस्तुओं पर ही पाए जाते हैं।

गुजरात की खंभात की खाड़ी में मिलने वाली साबरमती की उपनदी के किनारे बसा लोथल नगर ऐसे स्थान पर बसा था जहां कीमती पत्थर जैसा कच्चा माल आसानी से मिल जाता था। ये पत्थरों, शंखो और धातुओं से बनाई गई वस्तुओं का एक महत्वपूर्ण केंद्र था।

इस नगर में एक भंडार गृह भी था और यहां पर एक इमारत भी मिली है जहां संभवतः मनके बनाने का काम होता था

हड़प्पा सभ्यता के अंत का रहस्य

लगभग 3900 साल पहले एक बड़ा बदलाव देखने को मिलता है। अचानक लोगों ने इन नगरों को छोड़ दिया, लेखन, मुहर और बांटो का प्रयोग बंद हो गया तथा दूर-दूर से कच्चे माल का आयात भी काफी कम हो गया था।

मोहनजोदड़ो में सड़को पर कचरे के ढेर बनने लगे, जल निकास प्रणाली नष्ट हो गई और सड़कों पर ही झुग्गी नुमा घर बनाए जाने लगे, आखिर ये सब क्यों हुआ यह आज भी एक रहस्य है।

कुछ विद्वानों का कहना है कि नदियां सूख गई थी और अन्य का कहना है कि जंगलों का विनाश हो गया था। इसका कारण यह हो सकता है कि ईंटें पकाने के लिए ईंधन की जरूरत पड़ती थी, जिसके लिए उन्होंने जंगलों को काटा होगा। इसके अलावा मवेशियों के बड़े-बड़े झुंडो से चारागाह और घास वाले मैदान समाप्त हो गए होंगे और कुछ इलाकों में बाढ़ आ गई।

लेकिन इन कारणों से यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि सभी नगरों का अंत कैसे हो गया क्योंकि बाढ़ और नदियों के सूखने का असर तो कुछ ही इलाकों में हुआ होगा।

ऐसा लगता है कि उस समय के शासकों का नियंत्रण समाप्त हो गया था। खैर जो भी हुआ हो, परिवर्तन का असर बिल्कुल साफ दिखाई देता है।

आधुनिक पाकिस्तान के पंजाब और सिंध की बस्तियां उजड़ गई थी। कई लोग पूर्व और दक्षिण के इलाकों में नई और छोटी बस्तियों में जाकर बस गए, इसके लगभग 14 सौ साल बाद नये नगरों का विकास हुआ।

हड़प्पा सभ्यता की खोज किसने की थी?

हड़प्पा सभ्यता के बारे में संपूर्ण जानकारी

हड़प्पा सभ्यता की खोज राय बहादुर दयाराम साहनी ने सन् 1826 में की थी और पहली बार पुरातत्व वेदों ने सन् 1920 और 1921 में इसकी खुदाई की थी।

हड़प्पा सभ्यता का पतन कैसे हुआ था?

विद्वानों का कहना है कि हड़प्पा सभ्यता का पतन नदियों के सूख जाने और जंगलों के नष्ट हो जाने से हुआ था, लेकिन यह सिर्फ एक अनुमान है।

हड़प्पा सभ्यता लिपि क्या है?

हड़प्पा सभ्यता के लोगों द्वारा निर्मित छोटे-छोटे संकेतों के समूह को लिपि कहते हैं।

हड़प्पा सभ्यता का विस्तार कहां हुआ था?

हड़प्पा सभ्यता का विस्तार सिंधु नदी के किनारे हुआ था और मोहनजोदड़ो, कालीबंगा, लोथल, धोलावीरा, राखीगढ़ी इसके प्रमुख केंद्र थे।

हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख स्थल कौन से थे?

हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख स्थल मोहनजोदड़ो, कालीबंगा, लोथल, धोलावीरा, राखीगढ़ी इसके प्रमुख स्थल थे।

हड़प्पा सभ्यता का आरंभ कब हुआ था?

हड़प्पा सभ्यता का आरंभ लगभग 4700 साल पहले हुआ था।

अंतिम निष्कर्ष– दोस्तों उम्मीद है, आपको हमारे द्वारा बताई गई हड़प्पा सभ्यता के बारे में संपूर्ण जानकारी, आपको यह पसंद आई होगी। अगर आपको हमारे द्वारा बताई गई है जानकारी पसंद आती है, तो आप अपनी खुशी कमेंट में जाहिर कर सकते हैं।

जिससे आपकी कमेंट के माध्यम से मुझे कुछ नया करने की प्रेरणा मिलेगी और हम ऐसी ही नई-नई चीजें आपके पास लाया करेंगे।

मेरे इस आर्टिकल को पढ़ने वाले भाई और बहनों से विनम्र निवेदन है कि आप कमेंट में अपना कोई भी सवाल मुझसे पूछ सकते हैं, मैं उस सवाल का उत्तर आपको जरूर दूंगा।

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