अंतःशोषण क्या है व अंतःशोषण की परिभाषा (12th, Biology, Lesson-1)

अंतःशोषण के बारे में

“किसी पदार्थ के ठोस कणों (Solid particles) के द्वारा जल अथवा किसी द्रव का बिना विलयन (solution) बनाएं अधिशोषण करने को अवशोषण अंतःशोषण (imbibition) कहते हैं।”

अंतःशोषण क्या है व अंतःशोषण की परिभाषा (12th, Biology, Lesson-1)

अंतःशोषण करने वाला पदार्थ अंतःशोषक (imbibant) कहलाता है। पौधों (plants) में प्रोटीन, मण्ड, सेल्यूलोज, पेक्टिन (pectin) आदि पदार्थ जलरागी कोलाइड्स (hydrophilic colloids) के रूप में पाए जाते हैं, जो अंतःशोषक का कार्य करते हैं। ये अपने भार से कई गुना अधिक जल अधिशोषित (undeclared) करते हैं। अंतःशोषण के फलस्वरुप अतःशोषक के आयतन (volume) में वृद्धि होती है, परंतु यह वृद्धि अधिशोषित जल के आयतन से कम होती है, क्योंकि जाल अणु अतःशोषण कणों के बीच एवं उनकी सतह अत्यंत पास-पास व्यवस्थित (pack) होते हैं।

  • अंतःशोषण की क्रिया में जल अणुओं (Water molecules) की गतिज ऊर्जा (kinetic energy) की हानि होती है जो ऊष्मा (heat) के रूप में निकलती है, इसे आद्रता की उष्मा (heat of wetting) भी कहते हैं। यही कारण है कि आटा गूंथते समय गर्मी का अहसास होता है।
  • प्रोटीन में मण्ड की तुलना में अतःशोषण क्षमता अधिक होती है। इसलिए प्रोटीनयुक्त बीज, जैसे- मटर, चना आदि जल में रखने पर मण्डयुक्त बीजों, जैसे- गेहूं, मक्का आदि की तुलना में अधिक फूलते हैं।

अंतःशोषण दाब

अंतःशोषण द्वारा जल अधिशोषण के पश्चात उसमें एक दाब उत्पन्न होता है, जिसे अंतःशोषण दाब (imbibitional pressure) कहते हैं। जल के प्रवेश करने पर अतःशोषक में स्फीति दाब (TP) उत्पन्न होता है। परंतु स्फीति दाब तभी उत्पन्न होगा तब जब अतःशोषक को बंद करके रखते हैं, जैसे कि किसी डिब्बे में। अंतःशोषण दाब (IP), स्फीति दाब (TP) तथा विसरण दाब न्यूनता (DPD) के संबंध को निम्नलिखित समीकरण द्वारा दर्शाया जाता है।

DPD = IP – TP

एक शुष्क अंतःशोषक के लिए TP = 0 अर्थात DPD = IP होगा, एक पूर्णतः गीले अंतःशोषक के लिए TP = IP, अतः DPD = 0 होगा।

अंतःशोषण एक विशिष्ट प्रकार की विसरण क्रिया है। अंतःशोषक होने वाले द्रव के विसरण दाब (DP) में बहुत अंतर होता है और दाब के इसी अंतर के कारण अतःशोषण होता है। उदाहरण के लिए, सूखे बिजो अथवा सूखी लकड़ी का विसरण दाब (Diffusion pressure) शून्य व जल का विसरण दाब सबसे अधिक होता है। जब सूखे बीज अथवा लकड़ी को जल में या जल के संपर्क (contact) में रखते हैं, तो जल का इनमें विसरण (Diffusion) तब तक होता रहेगा जब तक कि इनके अंदर व बाहर के विसरण दाब (Diffusion pressure) बराबर न हो जाये।

  • IP, OP के सदृश (analogous) है अर्थात दोनों का कार्य समान है लेकिन उत्पत्ति भिन्न है।
  • रबड़ का पेट्रोलियम या मिट्टी के तेल (Kerosene) में फूलना भी अंतःशोषण का उदाहरण है।

अतःशोषण के लिए यह आवश्यक है कि अतःशोषक (So-called) तथा बाहरी माध्यम में उपस्थित द्रव के बीच पारस्परिक आकर्षण (mutual attraction) भी हो। यदि दोनों के अणुओं (particle) बीच आकर्षण का अभाव हो तो उस स्थिति में अंतःशोषण नहीं हो पाता है, जैसे- रबड़ के टुकड़े को जल में रखने पर अतःशोषण (imbibition) नहीं होता है क्योंकि रबड़ तथा जल के अणुओं के बीच पारस्परिक आकर्षण (mutual attraction) का अभाव होता है।

अंतःशोषण का महत्त्व

  1. अंतःशोषण बीज अंकुरण में सहायक होता है। बीज की गीरी (kernel) [भ्रूणपोष (endosperm) अथवा बीजपत्र (cotyledon)] प्रोटीनयुक्त या मण्डयुक्त होती है जबकि बीज आवरण (seed coat) सेल्युलोज का होता है। अतः बीज आवरण (seed cover) गीरी की तुलना में कम फूलता है तथा फट जाता है जिससे मूलांकुर (radicle) बाहर आ जाता है।
  2. वर्षा के दिनों में मकानों के दरवाजों (doors), खिड़कियों आदि का फूल जाना अंतःशोषण (imbibition) का परिणाम है।
  3. पौधों की जड़ों द्वारा जल का अवशोषण में मूलरोम की कोशिका भित्ति (cell wall) अंतःशोषण द्वारा जल का अधिशोषण करती है।
  4. अनेक पौधों, जैसे- सिलेजिनैला (selaginella) तथा लाइकेन (lichen) में पुनर्जीवन (resurrection) क्रिया भी अंतःशोषण के कारण होती है।
  5. पुराने समय में चट्टानों को तोड़ने (break) के लिए सूखी लकड़ी के टुकड़ों को पानी से भिगोकर (Soaked) दरारों में फंसा दिया जाता था। लकड़ी जल का अतःशोषण (imbibition) कर फूल जाती थी तथा इससे इतना अधिक बल (force) उत्पन्न होता था कि चट्टाने आसानी से टूट जाती थी।
  6. कपाल (skull) की हड्डियों को अलग करने के लिए भी अतःशोषण का प्रयोग किया जाता है।

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