जीवमंडल की परिभाषा क्या है।
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जीवमंडल की परिभाषा क्या है?

स्थलमंडल, जलमंडल तथा वायुमंडल का वह क्षेत्र जिसमें जीवधारी पाए जाते हैं, जीवमंडल कहलाता है।

जीवमंडल की परिभाषा क्या है।
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जीवमंडल की परिभाषा क्या है।

जीवमंडल में ऊर्जा तथा पदार्थों का निरंतर आदान-प्रदान जैविक तथा अजैविक घटकों के मध्य होता रहता है। जीवमंडल का विस्तार लगभग 14-15 किमी होता है। वायुमंडल में 7-8 किमी ऊपर तक तथा समुद्र में 6-7 किमी गहराई तक जीवधारी पाए जाते हैं।

जीवमंडल के तीन प्रमुख भाग-

  1. स्थलमंडल (Lithosphere) – यह पृथ्वी का ठोस भाग है। इनका निर्माण चट्टानों, मृदा, रेत आदि से होता है। पौधे अपने लिए आवश्यक खनिज लवण मृदा से घुलनशील अवस्था में ग्रहण करते हैं।
  2. जलमंडल (Hydrosphere)– स्थलमंडल पर उपस्थित तालाब, झील, नदी, समुंद्र आदि मिलकर जलमंडल बनाते हैं। जलीय जीव धारी अपने लिए आवश्यक खनिज, जल से प्राप्त करते हैं। जल जीवन के लिए अति महत्वपूर्ण होता है। यह जीव द्रव्य का अधिकांश भाग बनाता है। पौधे जोड़ों के द्वारा या शरीर सतह से जल ग्रहण करते हैं। जंतु जल को भोजन के साथ ग्रहण करते हैं तथा आवश्यकतानुसार इसकी पूर्ति जल पीकर भी करते हैं।
  3. वायुमंडल (Atmosphere) – पृथ्वी के चारों ओर स्थित गैसीय आवरण को वायुमंडल कहते हैं। वायुमंडल में विभिन्न गेसै संतुलित मात्रा में पाई जाती है।

अजैविक घटक (Abiotic components) –

परीतंत्र के अजैविक घटक जैविक घटकों को प्रभावित करते हैं और स्वयं जैविक घटकों से प्रवाहित होते हैं। अजैविक घटकों के अंतर्गत निम्नलिखित घटक कहते हैं।

  1. जलवायवीय कारक – प्रकाश, ताप, आकाशीय विद्युत आदि।
  2. अकार्बनिक पदार्थ- ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड आदि।
  3. कार्बनिक पदार्थ- कार्बोहाइड्रेट्स, प्रोटींस, न्यूक्लिक अम्ल आदि।

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