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लोकतंत्र के गुण तथा दोष | democracy pros and cons

नमस्कार दोस्तों अगर आप लोकतंत्र के गुण और दोष के बारे में जानना चाहते हैं तो हमने इस लेख के माध्यम से आपको यह जानकारी देने का प्रयास किया है इस लेख में हम ने विभिन्न सारे लोकतंत्र के गुणों की सूची बनाई है और साथ ही साथ लोकतंत्र के दोष कौन-कौन से हैं उनकी भी सूची बनाई है तो आप हमारे नीचे दिए गए जानकारी को जरूर पढ़ें।

एक लोकतांत्रिक सरकार (democratic government) एक बेहतर सरकार है क्योंकि यह सरकार (government) का अधिक जवाबदेह रूप है। लोकतंत्र निर्णय (democracy decision) लेने की गुणवत्ता में सुधार करता है। लोकतंत्र मतभेदों और संघर्षों ( Democracy differences and conflicts ) से निपटने का एक तरीका प्रदान करता है। लोकतंत्र लोगों को अपनी गलतियों को सुधारने की अनुमति देता है।

योग्यता और अवगुण वस्तुओं में मूल्य निर्णय करना शामिल है कि आपके लिए कुछ अच्छा है या बुरा। वर्गीकरण हमेशा सीधा नहीं होता है। उदाहरण के लिए: कैनबिस।

कैनबिस को व्यापक रूप से एक अवगुण अच्छा माना जाता है – यह फेफड़ों के कैंसर में योगदान देता है और मनोवैज्ञानिक समस्याओं को जन्म दे सकता है, जैसे कि व्यामोह।

इन्हें भी पढ़ें: लोकतंत्र की परिभाषा (democracy meaning) तथा प्रकार?

लोकतंत्र के गुण | Benifits of Democracy

  1. जनहित :- लोकतंत्र का उद्देश्य आम जनता का कल्याण है। लोकतंत्र शासन को जनता के कल्याण, विकास व सुविधा का प्रतीक ( Democracy is a symbol of public welfare, development and convenience. ) माना जाता है। लोकतंत्र में शासन की नीतियों, कार्यक्रमों, देशों के माध्यम से ( Governance in a democracy through policies, programs, countries ) सर्वसाधारण का अधिक- से-अधिक जनहित करने का प्रयास किया जाता है।
  2. राजनीतिक प्रशिक्षण :- लोकतंत्र, सर्वसाधारण को राजनीतिक प्रशिक्षण भी देता है। लोकतंत्र में संचार के साधनों, प्रेस, दूरदर्शन आदि का प्रयोग व्यापक तरीके से किया जाता है। लोकतंत्र में राजनीतिक दल, राजनेता, दबाव समूह और संगठन सक्रिय रूप से कार्य करते हैं। राजनीतिक दल जनता की इच्छाओं, आकांक्षाओं को सरकार के सामने रखते हैं। सरकार इन पर नीतियाँ बनाते हुए समस्त राजनीतिक गतिविधियों के बारे में जानकारी जनता को उपलब्ध करवाती है। इसमें समानता स्थापित करने के प्रयास किये जाते हैं।
  3. नैतिकता का विकास :- लोकतंत्र में राष्ट्रीय चरित्र व नैतिकता का विकास नागरिकों में होना चाहिए। राष्ट्रप्रेम, देश – भक्ति, त्याग, बलिदान, सेवा और सहनशीलता आदि गुणों का विकास नागरिकों को राष्ट्र से जोड़े रखने का प्रयास करता है। लोकतंत्र उच्च गुणों का विकास करने का प्रयास करता है। नैतिकता लोकतंत्र को भ्रष्ट होने से रोकती है। नैतिकता से नागरिकों में आत्मविश्वास की भावना जागृत होती है। लोकतंत्र में अच्छे आदर्शों का संकल्प दोहराया जाता है।
  4. लोकतंत्र मैं क्रांति-लोकतंत्र की क्रांति संभवनाए बहुत कम होती है क्योंकि लोकतंत्र में जनता को विभिन्नन माध्यमों द्वारााा अपनी आवाज और विभिन्न्न माध्यमों अपनी आवाज को उठाने की स्वतंत्रा होती है।
  5. लोकतंत्र राष्ट्रवाद-लोकतंत्र राष्ट्रवाद तथा अंतरराष्ट्री्रीयवाद मैंं भी समन्वय स्थापित करता है।
  6. लोकतंत्र नागरिकों के अधिकारों तथा स्वतंत्रताओं को बनाए रखता है तथा उनको उचित सम्मान भी प्रदान करता है।
  7. लोकतंत्र सहमति का शासन है। लोकतंत्र में जनता यह अनुभव करती है कि वह स्वयं अपने ऊपर शासन कर रही है। अतः लोकतंत्र में नागरिक सरकार के साथ पूर्ण सहयोग करते हैं।
  8. लोकतंत्र में कानून जन इच्छाओं तथा आकांक्षाओं का प्रतिरूप होते हैं।कानून जनता की इच्छाओं के अनुरूप बनाए जाते हैं।यदि सरकार जन विरोधी कानूनों का निर्माण करती है तो जनता को ऐसे कानूनों का विरोध करने का भी अधिकार प्राप्त होता है।
  9. लोकतंत्र नैतिकता तथा आदर्श पर बल देता है। अतः लोकतांत्रिक विश्वशांति मानवता तथा प्रेम के मार्ग को प्रशस्त करता है।
  10. लोकतंत्र में स्वतंत्र तथा निष्पक्ष न्यायपालिका होती है जो शासन की शक्ति को मर्यादित तथा नियंत्रित करती है
  11. लोकतंत्र राष्ट्रवाद तथा अंतरराष्ट्रीय वाद में भी समन्वय स्थापित करता है।
  12. लोकतंत्र में क्रांति की संभावनाएं बहुत कम होती है क्योंकि लोकतंत्र में जनता को विभिन्न माध्यमों द्वारा अपनी आवाज को उठाने की स्वतंत्रता होती है।
  13. लोकतंत्र में अल्पसंख्यकों के अधिकार सुरक्षित रहते हैं क्योंकि लोकतंत्र अल्पसंख्यकों की बहुसंख्यकओं के अत्याचारों से सुरक्षा करता है।

लोकतंत्र के दोष | Disadvantages of democracy

  1. राजनीति का राजनीतिकरण :- लोकतंत्र में राजनेता, जिन आदर्शो, मूल्यों की स्थापना के लिए राजनीति में आता है। वह शासन व्यवस्था में आने के बाद राजनीतिकरण का शिकार हो जाता है। एक बार शासन व्यवस्था में आने के बाद शासन व्यवस्था से अलग नहीं होना चाहता है। वह जीवनपर्यन्त लोकतंत्र से जुड़े रहना चाहता है। जनता के आदर्शों, मूल्यों के लिए दिखावे का व्यवहार करता है। जबकि सार्वजनिक जीवन में वह कुछ करना चाहता है। वह अपने आप को राजनीतिकरण के कारण असमर्थ पाता है। ऐसी स्थिति में लोकतंत्र सबका नहीं होकर सीमावृहद, अर्थों में सिमट कर रह जाता है। लोकतंत्र में सार्वजनिक राजनीति के स्थान पर व्यक्तिकरण की राजनीति बढ़ती चली जाती है। यही इसके दोषों को उत्पन्न करती चली जाती है।
  2. व्यावहारिक सामाजिक समानता का अभावः – जिन देशो में लोकतंत्र की स्थापना हुई, उनमें अधिकांश रूप से यह देखने को मिलता है कि व्यावहारिक रूप से सामाजिक समानता कायम नहीं रहती है। ऊंच – नीच, गरीबी – अमीरी, वर्ग – संघर्ष, (High – low, poverty – rich, class – struggle) तरीके और आर्थिक असमानताओं के कारण सामाजिक समानता कभी स्थापित नहीं होती है।
  3. अयोग्य व्यक्तियों का शासन : – अरस्तू ने लोकतंत्र को विकृत रूप मानते हुए इसे अयोग्य शासन माना गया था। लोकतंत्र में जो व्यक्ति, नेता, राजनीतिज्ञ शामिल होते हैं वे अयोग्य इसलिए माने जाते हैं कि उन्हें राजनीति का सघन प्रशिक्षण ( intensive training in politics ) प्राप्त नहीं होता है। केवल मात्र साधारण योग्यता के आधार पर शासन व्यवस्था में भर्ती होना ही, अयोग्यता का द्योतक है। लोकतंत्र में धन, शक्ति के आधार पर अयोग्य व्यक्ति शासन में प्रवेश करते हैं इसलिए लोकतंत्र में अयोग्य व्यक्तियों की भीड़ पायी जाती है। लेकी ने भी इस सम्बन्ध में लिखा है,
  4. संकटकालीन स्थिति-संकटकालीन स्थिति का तत्कालीन समाधान करने में लोकतंत्र अधिक सफल नहीं रहता है क्योंकि लोकतंत्र मेंंक्षनिर्णय लेने में काफी समय नष्ट हो जाता नष्ट होमय नष्ट हो जाता है।
  5. लोकतंत्र में शासन व्यवस्था कमजोर होती है क्योंकि सरकार के विरुद्ध निरंतर प्रदर्शन तथा धरने चलते रहते हैं। लोकतंत्र में निर्णय बहुमत के द्वारा लिए जाते हैं। बहुमत का निर्णय प्राप्त करना बहुत कठिन है।
  6. संकटकालीन स्थिति का तत्कालीन समाधान करने में लोकतंत्र अधिक सफल नहीं रहता क्योंकि लोकतंत्र में निर्णय लेने में काफी समय नष्ट हो जाता है।
  7. लोकतंत्र पूंजीपतियों का गढ़ होता है। लोकतंत्र में पूंजी पतियों द्वारा सरकारों का निर्माण किया जाता है। पूंजीपति राजनीतिक दलों को चुनाव लड़ने के लिए धन की व्यवस्था करते हैं।
  8. लोकतंत्र को आलोचकों ने मूर्खों की शासन की भी संज्ञा प्रदान की है। उनका दर्द यह है कि समाज में बहुसंख्यक अनपढ़ गरीब तथा निरक्षर है। अतः इनके मतों के आधार पर ही लोकतंत्र में सरकारों का गठन होता है। यह मतदाता जाति, धर्म, संप्रदाय,चित्र आदि की संकीर्ण मनोवृत्ति यों से प्रभावित होते हैं।
  9. जब लोकतंत्र में विकृतियां उत्पन्न हो जाती है तो वह भीडतंत्र में परिणत हो जाता है।
  10. लोकतंत्र को बहुमत के शासन की संज्ञा दी जाती है, परंतु व्यवहार में अल्पमत बहुमत के ऊपर शासन करता है
  11. लोकतंत्र में इस बात पर बल दिया जाता है कि यहां जनता का शासन है परंतु इसमें जनता शासन न करके, जनता का छोटा सा समूह शासन करता है जिसको अभिजन कहा जाता है।

लोकतंत्र के गुण और दोष क्या हैं?

लोकतंत्र के गुण हैं: 1) लोकतंत्र निर्णय लेने की गुणवत्ता में सुधार करता है। 2) लोकतंत्र नागरिकों की गरिमा को बढ़ाता है। लोकतंत्र के दोष हैं: 1) नेता बदलते रहते हैं इससे अस्थिरता पैदा होती है।

सरल शब्दों में लोकतंत्र क्या है?

1) जनता द्वारा सरकार : बहुमत का शासन।
2) सरकार जिसमें सर्वोच्च शक्ति लोगों के पास होती है और आमतौर पर प्रतिनिधियों के माध्यम से उपयोग की जाती है।
3) लोगों द्वारा शासित एक राजनीतिक इकाई (एक राष्ट्र के रूप में)।
4) इस विचार में विश्वास या व्यवहार कि सभी लोग सामाजिक रूप से समान हैं।

लोकतंत्र क्यों महत्वपूर्ण है?

लोकतंत्र का समर्थन न केवल धार्मिक स्वतंत्रता और कार्यकर्ता अधिकारों जैसे मौलिक अमेरिकी मूल्यों को बढ़ावा देता है, बल्कि एक अधिक सुरक्षित, स्थिर और समृद्ध वैश्विक क्षेत्र बनाने में भी मदद करता है जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका अपने राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ा सकता है।

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