मीटर सेतु का सिद्धांत क्या है (12th, Physics, Lesson-4)

meter bridge in hindi मीटर सेतु व्हीटस्टोन के सिद्धांत पर आधारित एक उपकरण है। जिसकी सहायता से किसी चालक तार का प्रतिरोध ज्ञात कर सकते हैं।

मीटर सेतु का उपयोग भी व्हीटस्टोन के भांति ही अज्ञात प्रतिरोधों का मान ज्ञात करने के लिए करते है।

मीटर सेतु उपकरण का वर्णन

चित्रानुसार मीटर सेतु प्रदर्शित है इसमें 1 मीटर लंबा मैंगनिन का तार A C है जो 1 मीटर पैमाने के सहारे लगा है। इस तार के दोनों सिरों को L आकार की पीतल की मोटी पत्तियों से जोड़ दिया जाता है इसके अतिरिक्त पीतल की अन्य लंबी पत्ती B C और होती है जो मीटर स्केल के समांतर होती है।

मीटर सेतु का सिद्धांत क्या है (12th, Physics, Lesson-4)

इन पत्तियों के बीच में दो खाली स्थान A B और C B होते है। एक रिक्त स्थान A B में अज्ञात प्रतिरोध X तथा दूसरे रिक्त स्थान में (C D) प्रतिरोध बॉक्स R B लगा देते है। A और C बिंदुओं के बीच लेक्लांशी सेल व प्लग कुंजी लगा देते है। तथा B और D बिंदुओं के मध्य धारामापी G लगा देते है। बिंदु D पर एक स्पर्श कुंजी लगी होती है। जिसको तार A C पर इधर-उधर चलाकर कहीं भी दबाया जा सकता है। इस कुंजी को जौकी कहते है।

सिद्धांत

यह व्हीटस्टोन सेतु के सिद्धांत पर आधारित है। जब कुंजी K में प्लग लगे होने पर जौकी D को सेतु के तार पर दबाने से धारामापी मैं कोई विक्षेप नहीं आता है तो सेतु संतुलित अवस्था में कहा जाता है। तब बिंदु B व बिंदु D समान विभव पर होते है।

इस अवस्था में X/R = A व D के बीच मीटर सेतु के तार का प्रतिरोध/ D और C के बीच मीटर सेतु के तार का प्रतिरोध, X/R = lx/(100 – l)x, x/R = l/(100 – l), x = R l/(100 – l) तो हम इस तरीके से अज्ञात प्रतिरोध को ज्ञात कर सकते है।

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