ओजोन क्या है? और ओजोन परत से उपयोग

ओजोन क्या है? और ओजोन परत व इसके उपयोग तथा हानि, शौनबीन नामक वैज्ञानिक ने सर्वप्रथम 1840 ई. में ओजोन की खोज वायुमंडल से की थी और 1872 ई. में सोरेट, ओडलिंग तथा ब्रॉडी नामक वैज्ञानिकों ने इसे ऑक्सीजन से प्राप्त किया था।

ओजोन क्या है

यह वायुमंडल से 20 किलोमीटर की ऊंचाई पर आखिरी परत के रूप में पायी जाती है। जो सूर्य से आने वाली खतरनाक पराबैंगनी विकिरण को परावर्तित कर देती है।

ओजोन क्या है? और ओजोन परत से उपयोग
ओजोन क्या है? और ओजोन परत से उपयोग

12th, Chemistry, Lesson-7

ओजोन बनाने की विधि

जब ऑक्सीजन में विद्युत उत्सर्जन कराया जाता है तो ओजोन बनता है तथा ओजोन का निर्माण किस यंत्र द्वारा किया जाता है उसे ओजोनाइजर कहते हैं।

ओजोनाइजर मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं, (1) सीमेंस का ओजोनाइजर (2) बॉडी का ओजोनाइजर

सीमेंस का ओजोनाइजर

इस ओजोनाइजर में कांच की U आकार की नली होती है। जिसके दोनों सिरों पर टीन के पतली परत लगे होते हैं जिनका संबंध प्रेरण भट्टी से होता है। इस कांच की नली के ऊपर से ऑक्सीजन भेजा जाता है तो इसका लगभग 10% भाग ओजोन में बदल जाता हैं।

ओजोन क्या है? और ओजोन परत से उपयोग
ओजोन क्या है? और ओजोन परत से उपयोग

बॉडी का ओजोनाइजर

यह ओजोनाइजर U आकार की कांच की नली होती है जिसका ऊपरी भाग चौड़ा तथा निचला भाग सकरा होता है तथा इसमें तनु सल्फ्यूरिक अम्ल भरा रहता है। इसे एक बड़े पात्र में रख दिया जाता है व इसमें भी तनु सल्फ्यूरिक अम्ल भर लेते हैं। प्रेरण कुंडली द्वारा विद्युत विसर्जन कराते हैं तो ऑक्सीजन ओजोन में बदल जाता है।

ओजोन क्या है? और ओजोन परत से उपयोग
ओजोन क्या है? और ओजोन परत से उपयोग

ओजोन के भौतिक गुण

  1. यह मछली जैसी गंध वाली गैस है।
  2. ओजोन का रंग पीला-नीला होता है।
  3. यह प्रकृति से विषैला होता है।
  4. अधिक मात्रा में सूंघने पर सिर दर्द और श्वसन संबंधी समस्याएं उत्पन्न करता है।
  5. ओजोन का क्वथनांक -111 डिग्री सेंटीग्रेड होता है।

ओजोन का रासायनिक गुण

अपघटन– यह अपघटित होकर O₂ देता है।

ऑक्सीकारक गुण– ओजोन ऑक्सीकारक की भांति व्यवहार करता है। इसके प्रमुख ऑक्सीकारक गुण निम्न है।

(1) यह फास्फोरस को फास्फोरिक एसिड में ऑक्सीकृत कर देता है

2P + 3H₂O + 5O₃ → 2H₃PO₄ (फास्फोरिक एसिड) + 5O₂

(2) यह सल्फर को सल्फ्यूरिक अम्ल में ऑक्सीकृत कर देता है।

S + H₃O + 3O₃ (ओजोन) → H₂SO₄ (सल्फ्यूरिक एसिड) + 3O₂

ओजोन के उपयोग

  1. ओजोन का उपयोग सुरंगों, खानो एवं पृथ्वी के अंदर के रेलमार्गों की वायु को शुद्ध करने के लिए किया जाता है।
  2. तेल, शक्कर, मोम, उन, रेशम आदि में विरंजक के रूप में इसका उपयोग करते है।
  3. इसका प्रयोग कृत्रिम कपूर या रेशम बनाने में किया जाता है।

ओजोन छिद्र क्या है

यह तो आप जान गए होंगे कि ओजोन क्या है अब जान लेते हैं कि ओजोन छिद्र क्या है, ओजोन पृथ्वी की प्राकृतिक धूप रोधक है तथा पृथ्वी के चारों ओर ओजोन की परत जितनी ही मोटी होगी उतनी ही पृथ्वी तक पहुंचने वाले पराबैगनी किरणों की पहुंचने की मात्रा उतनी ही कम होगी।

लेकिन सूर्य हमको एक समान दिखता है लेकिन यह हानिकारक किरणों से बना रहता है। रेडियो, गामा किरणें, पराबैगनी किरण आदि सूर्य में होती है जो कि अदृश्य विकिरण होती है जो हमारी प्रथ्वी को हानि पहुंचाती है।

सूर्य से निकलने वाली पराबैगनी किरणों से त्वचा का जलना और मोतियाबिंद हो सकता है। लेकिन यह समस्या बहुत कम होती है तो आइए जानते हैं।

पराबैंगनी किरणों से बचाव

आप पहले से ही जानते हैं कि पृथ्वी वायु के एक कंबल से घिरी हुई है जिसे हम वायुमंडल कहते हैं तथा वायुमंडल विभिन्न प्रकार की परतों से मिलकर बना होता है।

ओजोन की परत इन सारी परतो में से एक होती है जो सूर्य से निकलने वाली हानिकारक पराबैंगनी किरणों से हमारी पृथ्वी को बचाती है।

तो आइए जानते हैं ओजोन क्या है और यह कैसे बनती है। ऑक्सीजन का एक अणु ऑक्सीजन के दो परमाणुओं से मिलकर बना रहता है। ऑक्सीजन के अणुओं पर पड़ने वाली पराबैंगनी किरणें जो अणु को ऑक्सीजन के दो परमाणुओं में बांट देती है।

मुक्त ऑक्सीजन का परमाणु अपनी उच्च अभिक्रियाशील प्रकृति के कारण तत्काल ऑक्सीजन के अन्य अणु से संयोजित हो जाता है और ओजोन का अणु निर्मित करता है।

इन ओजोन के अणुओं पर आपतित होने वाली पराबैंगनी किरणें इसे ऑक्सीजन के परमाणु और ऑक्सीजन के अणु में विखंडित कर देती है। मुक्त ऑक्सीजन का अणु तत्काल पुनः ऑक्सीजन के अणु से जुड़कर ओजोन बनाता है तथा ये प्रक्रिया लगातार चलती रहती है और सभी पराबैंगनी किरणों को अवशोषित कर दिया जाता है। तो इस प्रकार पराबैंगनी किरणों को पृथ्वी की सतह से बचाया जाता है।

ओजोन परत का अपक्षय

पृजानते हैं दूसरे शब्दों में की ओजोन परत क्या है, पृथ्वी पर पाए जाने वाले समताप मंडल में एक सुरक्षा कवच पाई जाती है ओजोन परत कहते हैं।

परंतु कुछ वायु प्रदूषण कैसे हमारे सुरक्षा कवच को हानि पहुंचाती है तथा ओजोन की परत में छिद्र करती है, उसे ओजोन अपक्षय कहते हैं।

ओजोन अपक्षय के लिए क्लोरोफ्लोरोकार्बन गैस जिम्मेदार है, जैसे क्लोरीन, फ्रेयोन आदि। ओजोन अपक्षय का कारण उपयुक्त गैसे हैं तथा ग्रीन हाउस प्रभाव और पृथ्वी उष्मायान हैं।

अंतिम निष्कर्ष– दोस्तों आज मैंने इस पोस्ट में आपको बताया कि ओजोन क्या है और यह हमारी पृथ्वी हानिकारक गैसों से कैसे बचाती है तो अगर आपको यह पोस्ट पसंद आती है तो इसे अपने दोस्तों में शेयर करें और आप तुरंत जानकारी प्राप्त करने के लिए हमारा टेलीग्राम चैनल ज्वाइन अवश्य करें जी धन्यवाद।

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