परिनालिका क्या है? Solenoid in hindi

solenoid in hindi परिनालिका क्या है, एक कांच या गत्ते की नली पर तांबे की तार को थोड़ा-थोड़ा अलग कर सर्पिल रूप में लपेट देने से एक प्रकार की व्यवस्था बनती हैं, इस व्यवस्था को परिनालिका कहते हैं।

परिनालिका क्या है

कागज या गत्ते की बेलनाकार नली लेकर उसके ऊपर तांबे के विद्युतरोधी तार (insulating wire) को लपेटकर एक लंबी कुंडलिनी (kundalini) बना लेते हैं, इसे परिनालिका कहते हैं।

परिनालिका क्या है? Solenoid in hindi

यह एक शक्तिशाली छड़ चुंबक (rod magnet) की तरह कार्य करता है। जब इसके चालक में धारा प्रवाहित की जाती है। परिनालिका पर चालक तारों के फेरों की संख्या जितनी अधिक होगी परिनालिका की शक्ति उतनी अधिक होगी। इसमें धारा के दिशा के अनुसार परिनालिका के दोनों छोरों पर क्रमशः उत्तरी ध्रुव (north Pole) तथा दक्षिणी ध्रुव (south pole) का निर्माण होता है।

परिनालिका के कारण चुंबकीय क्षेत्र

मैंने आपको परिनालिका क्या है यह तो बता दिया है आप जान लेते हैं कि परिनालिका के कारण चुंबकीय क्षेत्र के बारे में, तो चलिए जानते हैं।

जब परिनालिका में धारा प्रवाहित की करते है, तो परिनालिका में चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न हो जाता है। इस चुंबकीय क्षेत्र (magnetic Field) की दिशा समान होती है तथा बाहर के चुंबकीय क्षेत्र एक दूसरे का विरोध करते हैं, इसी कारण से चुंबकीय क्षेत्र का मान बाहरी बिंदुओं पर कम होता है।

YouTube video of What is Parinealika

यदि परिनालिका के किसी सिरे को सामने से देखने पर परिनालिका पर लिपटी कुंडली में धारा की दिशा वामावर्त (counter-clockwise) अर्थात घड़ी की सुई के चलने की विपरीत दिशा में है, तो वह सिरा उत्तरी ध्रुव N होगा तथा दूसरा सिरा दक्षिणी ध्रुव S होगा। इसके विपरित, यदि धारा की दिशा दक्षिणावर्त (clockwise) अर्थात घड़ी की सुई के चलने की दिशा में है, तो सामने वाला सिरा दक्षिणी ध्रुव S होगा तथा उत्तरी ध्रुव N होगा

परिनालिका के महत्वपूर्ण तथ्य

  1. धारावाही परिनालिका भी चुंबकीय पदार्थों (magnetic materials) को अपनी ओर आकर्षित कर सकता है।
  2. इसके सिरो पर ध्रुवता (polarity) परिनालिका में धारा की दिशा उलटने से उलट जाती है।
  3. धारावाही परिनालिका के अंदर चुंबकीय पदार्थ रखने पर उसमें चुंबकीय प्रेरण (magnetic induction) द्वारा चुम्बकत्व उत्पन्न हो जाता है।
  4. परिनालिका का चुम्बकत्व, इसमें प्रवाहित धारा का मान बदलकर बदला जा सकता है।
  5. परिनालिका में धारा का प्रभाव बंद करने पर इसका चुम्बकत्व (magnetism) समाप्त हो जाता है।
  6. धारावाहिक परिनालिका का चुम्बकत्व इसके अंदर लगभग एक समान होता है तथा सिरो पर कम होता है।

धारावाही परिनालिका किसके समान व्यवहार करती है?

धारावाही परिनालिका का व्यवहार दंड चुंबक की भांति होता है।

अंतिम निष्कर्ष– आज आपको मेरे द्वारा बताई गई जानकारी की परिनालिका क्या है, उम्मीद है आपको यह पसंद आई होगी। इसके बारे में और अधिक जानकारी तथा पढ़ाई से संबंधित जानकारी अगर आप तुरंत पाना चाहते हैं तो हमारा टेलीग्राम चैनल ज्वाइन करें जी धन्यवाद।

यह भी पढ़ें



0 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Post
Popular Post