साधारण वोल्टीय सेल क्या है? इसकी संरचना और क्रियाविधि

साधारण वोल्टीय सेल की खोज सन् 1791 में गैल्वेनी ने की थी तथा सन् 1800 में वोल्टा नामक विज्ञानिक ने इसमें आवश्यक संशोधन किया था। अतः इस सेल को साधारण वोल्टीय सेल कहा गया।

12th, Physics, Lesson-5

साधारण वोल्टीय सेल की बनावट

यह साधारण वोल्टीय सेल में एक कांच का बर्तन होता है जिसमें तनु सल्फ्यूरिक अम्ल भरा होता है। इसके अंदर तांबे और जस्ते की दो छड़े डूबी हुई रहती है, इन्हें इलेक्ट्रोड कहते हैं। तांबे की छड़ को धन इलेक्ट्रोड जस्ते की छड़ को ऋण इलेक्ट्रोड कहते हैं।

क्रियाविधि

H₂SO₄ के संपर्क में जिंक के परमाणु दो इलेक्ट्रोड प्रति परमाणु देकर जिंक आयन में परिवर्तित हो जाते हैं। इस प्रकार हम देखते हैं कि जस्ते की छड़ में इलेक्ट्रॉनों की अधिकता एवं तांबे की छड़ में इलेक्ट्रॉनों की कमी हो जाती है, जिससे तांबे की छड़ का विभव जस्ते की छड़ के विभव से अधिक हो जाता है। अर्थात विद्युत धारा तांबे की छड़ से जस्ते की छड़ की ओर प्रभावित होने लगती है।

साधारण वोल्टीय सेल क्या है? इसकी संरचना और क्रियाविधि

साधारण वोल्टीय सेल में स्थानीय क्रिया दोष

वोल्टीय सेल में प्रयुक्त जस्ते की छड़ में लोहा, सीसा, कार्बन आदि अशुद्धियां सदैव उपस्थित रहती है। अतः जैसे-जैसे जस्ता सेल के विद्युत अपघटय में घुलता है, इन अशुद्धियों के कण छड़ की सतह पर आ जाते हैं और धनात्मक इलेक्ट्रॉड की भांति कार्य करते हैं।

इस प्रकार सेल के विद्युत अपघटय, जस्ते की छड़ तथा उसमें उपस्थित अशुद्धियों के बीच स्थानीय सेल बन जाते हैं तथा सेल से बाहरी परिपथ में धारा न लेने पर भी इन स्थानीय सेलो में निरंतर धारा बहती रहती है जिससे जस्ता व्यर्थ में घूमता रहता है।

स्थानीय क्रिया के दोष का निराकरण

स्थानीय क्रिया के दोष को दूर करने के लिए या तो शुद्ध जस्ते की छड़ उपयोग में लाने चाहिए अथवा अशुद्ध जस्ते की छड़ पर पारे का लेप कर देना चाहिए, जिससे पारे में शुद्ध जस्ता घुलकर छड़ की बाहरी सतह पर आ जाता है तथा अशुद्धियां पारे में अविलेय होने के कारण अंदर ही रह जाती है। इस प्रकार जस्ते की छड़ में उपस्थित अशुद्धियां सेल के विद्युत अपघटय के संपर्क में नहीं आ पाती है तथा स्थानीय से नहीं बन पाते हैं अर्थात स्थानीय क्रिया रुक जाती है।

अंतिम निष्कर्ष– दोस्तों आज मैंने इस पोस्ट के द्वारा आपको बताया कि साधारण वोल्टीय सेल क्या होता है और उसकी संरचना और इसके कुछ निराकरण बताए हैं अगर आपको मेरी यह पोस्ट पसंद आती है तो इसे अपने दोस्तों में जरूर शेयर करें जय हिंद जय भारत।

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