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शिक्षा का अधिकार अधिनियम | शिक्षा का अधिकार अधिनियम की मुख्य विशेषताएं

शिक्षा का अधिकार अधिनियम -2009 आज से सौ साल पहले 18 मार्च, 1910 ई० में स्वतन्त्रता सेनानी गोपाल कृष्ण गोखले ने ब्रिटिश विधान परिषद् के सम्मुख भारत में जिस ‘मुफ्त और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा के अधिकार की माँग की थी, वह माँग स्वतन्त्रता के भी 63 वर्ष बाद पूरी हुई।

अब 1 अप्रैल, 2010 ई० से जम्मू और कश्मीर राज्य को छोड़कर सम्पूर्ण भारत में शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 लागू कर दिया गया है, जिसके अन्तर्गत अब 6 से 14 वर्ष तक के सभी बच्चों के लिए शिक्षा एक मौलिक अधिकार बन गया है।

सीधे-सरल शब्दों में हम यह कह सकते हैं कि अधिनियम के अन्तर्गत अब सरकार प्रत्येक बच्चे को आठवीं कक्षा तक निःशुल्क . पढ़ाई के लिए उत्तरदायी होगी, चाहे वह बालक हो अथवा बालिका अथवा वह किसी भी वर्ग का हो। इस प्रकार इस कानून के अन्तर्गत देश के बच्चों को मजबूत, साक्षर और अधिकार सम्पन्न बनाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया गया है।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ-

  • भारत के 6 से 14 वर्ष आयुवर्ग के बीच आनेवाले सभी बच्चों को मुफ्त तथा अनिवार्य शिक्षा प्रदान की जाएगी।
  • प्राथमिक शिक्षा समाप्त होने से पहले किसी भी बच्चे को किसी कक्षा में रोका नहीं जाएगा, निकाला नहीं जाएगा या बोर्ड परीक्षा पास करने की जरूरत नहीं होगी।
  • ऐसा बच्चा, जिसकी उम्र 6 साल से ऊपर है, जो किसी स्कूल में दाखिल नहीं है अथवा है भी, तो अपनी प्राथमिक शिक्षा पूरी नहीं कर पाया/पायी है, तब उसे उसकी उम्र के योग्य उचित कक्षा में प्रवेश दिया जाएगा; बशर्ते कि सीधेतौर से दाखिला लेनेवाले बच्चों के समकक्ष आने के लिए उसे प्रस्तावित समय सीमा के भीतर विशेष ट्रेनिंग दी जानी होगी, जो प्रस्तावित हो। प्राथमिक शिक्षा हेतु दाखिला लेनेवाला/वाली बच्चा/बच्ची को 14 साल की उम्र के बाद भी प्राथमिक शिक्षा के पूरा होने तक मुफ्त शिक्षा प्रदान की जाएगी।
  • प्रवेश के लिए उम्र का साक्ष्य प्राथमिक शिक्षा हेतु प्रवेश के लिए बच्चे की उम्र का निर्धारण उसके जन्म प्रमाणपत्र , मृत्यु तथा विवाह पंजीकरण कानून, 1856 या ऐसे ही अन्य कागजात के आधार पर किया जाएगा , जो उसे जारी किया गया हो। उम्र प्रमाण नहीं होने की स्थिति में किसी भी बच्चे को दाखिला लेने से वंचित नहीं किया जा सकता।
  • प्राथमिक शिक्षा पूरी करने वाले छात्र को एक प्रमाण-पत्र दिया जाएगा।
  • निश्चित शिक्षक-छात्र अनुपात रखा जाएगा।
  • जम्मू-कश्मीर को छोड़कर समूचे देश में यह कानून लागू होगा।
  • आर्थिक रूप से कमजोर समुदायों के लिए सभी निजी स्कूलों के कक्षा 1 में दाखिला लेने के लिए 25 फीसदी का आरक्षण होगा।
  • शिक्षा की गुणवत्ता में अनिवार्य सुधार किया जाएगा।
  • स्कूल शिक्षक को पाँच वर्षों के भीतर समुचित व्यावसायिक डिग्री प्राप्त होनी चाहिए, अन्यथा उनकी नौकरी चली जाएगी।

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