भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य उज्ज्वल है।क्यों?
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भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य उज्ज्वल है।क्यों?

भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य-

सूर्य ऊर्जा का अक्षय स्रोत है। इससे ऊर्जा की मात्रा विपुल रूप में अनवरत प्राप्त की जा सकती है। उष्णकटिबंधीय देश होने के कारण भारत में सौर ऊर्जा की उत्पादन क्षमता तथा उपयोगिता की अधिक संभावना है। यह लगभग 20 मेगावाट प्रति वर्ग किमी प्रति वर्ष है।

वास्तव में यदि देश में इस ऊर्जा का पर्याप्त रूप से दोहन किया जाए तो यह ऊर्जा का सबसे महत्वपूर्ण साधन सिद्ध हो सकता है। ब्रह्मांड में जब तक सूर्य विद्यमान रहेगा,उस से भारी मात्रा में सौर ऊर्जा सतत रूप से प्राप्त की जाती रहेगी।

भारत में सबसे बड़ा सौर ऊर्जा संयंत्र भुज के समीप माधोपुर में है।यहां दूध के डिब्बों को उबलते पानी में जीवाणु रहित करने के लिए इसकी स्थापना की गई।देश में थार मरुस्थल और ऊर्जा का सबसे बड़ा केंद्र बन सकता है।

भारत में कई स्थानों पर सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना की गई है। माउंट आबू में ब्रह्माकुमारी आश्रम में सौर ऊर्जा का उपयोग लगभग 500 व्यक्तियों का भोजन बनाने मैं किया जाता है। आज देश में सौर ऊर्जा धीरे-धीरे काफी लोकप्रियता प्राप्त कर रहा है। इसका उपयोग खाना बनाने, पंप द्वारा जल खींचने, प्रशीतन और सड़क मार्गों पर पथ प्रकाश के लिए किया जा सकता है।

भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य निम्नलिखित कारणों से उज्जवल है-

  1. भारत एक उष्ण कटिबंधीय देश है।
  2. इसमें सौर ऊर्जा के दोहन करने की भारी संभावनाएं हैं।
  3. ग्रामीण और दूरदराज़ के इलाकों में सौर ऊर्जा तेज़ी से प्रचलित हो रही है
  4. फोटोवोल्टाइक प्रौद्योगिकी से सूर्य के प्रकाश को सीधे विद्युत में बदल दिया जाता है
  5. सौर ऊर्जा संयंत्रों को भारत के विभिन्न भागों में स्थापित किया जा रहा है , जिससे प्रदूषण को कम करने में सहायता मिलती है। यह पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देता है।  

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