विकेंद्रीकरण के गुण दोष क्या है?
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विकेंद्रीकरण के गुण दोष क्या है?

विकेंद्रीकरण के गुण –

  1. प्रजातन्त्र के अनुकूल – विकेन्द्रीकरण का सबसे बड़ा गुण यह है कि इस पद्धति में सामान्य जनता को प्रशासन के कार्यों में भाग लेने का पूर्ण अधिकार व अवसर प्राप्त होता है जिसके परिणामस्वरूप विकेन्द्रीकृत व्यवस्था प्रजातन्त्रात्मक शासन प्रणाली की आधारशिला मानी जाती है।
  2. प्रशासन में नूतन प्रयोग – सत्ता में विकेन्द्रीकृत होने का सबसे बड़ा लाभ यह है कि संगठन के विभिन्न स्तरों पर प्रशासन में नए – नए प्रयोग किए जा सकते हैं क्योंकि विभिन्न स्तरों पर कार्य करने वाले कर्मचारियों को कार्य करने में स्वतन्त्रता होती है, जिसके परिणामस्वरूप परिस्थितियों के अनुसार अपने – अपने क्षेत्रों में नए प्रयोग कर सकते हैं।
  3. प्रशासन में कठोरता का अभाव – विकेन्द्रीकरण का एक बड़ा गुण यह भी है कि इस व्यवस्था में प्रशासन में कठोरता का पूर्ण रूप से अभाव है। सत्ता का हस्तान्तरण होने के कारण कर्मचारियों एवं क्षेत्रीय अधिकारियों के बीच सीधा सम्बन्ध स्थापित रहता है। इसीलिए प्रत्येक अधीनस्थ कर्मचारी अपने क्षेत्रीय अधिकारियों के स्वभाव से परिचित होता है और उसके विचारों के अनुकूल ही कार्य करने का प्रयास करता है जिससे प्रशासन में कठोरता का कोई प्रश्न ही नहीं उठता है।
  4. केन्द्रीय सत्ता द्वारा हस्तक्षेप का अभाव – विकेन्द्रीकरण व्यवस्था के अन्तर्गत विभागीय तथा क्षेत्रीय अधिकारियों को सत्ता का हस्तान्तरण कर दिया जाता है। ऐसी दशा में केन्द्रीय कार्यालय को प्रशासन के दैनिक कार्यों में हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं होती है। इसीलिए विकेन्द्रीकरण व्यवस्था में क्षेत्रीय अधिकारी स्वतन्त्रतापूर्वक कार्य करते हुए जनता का अधिक – से – अधिक कल्याण कर सकते हैं।
  5. कार्यों में विलम्ब नहीं – इस व्यवस्था में क्षेत्रीय या स्थानीय अधिकारियों को केन्द्रीय सत्ता से पूर्व अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होती है ; अत : वे शीघ्र ही निर्णय ले सकते हैं। इस प्रकार कार्य में विलम्ब नहीं होता है।

विकेंद्रीकरण के दोष-

  1. केन्द्रीय सत्ता का अपर्याप्त नियन्त्रण – विकेन्द्रीकरण पद्धति के आलोचकों का विचार है कि इस पद्धति में केन्द्रीय सत्ता का क्षेत्रीय अथवा स्थानीय सत्ता पर बहुत कम है नियन्त्रण रहता है। क्षेत्रीय कर्मचारी प्रशासकीय कार्य के लिए केन्द्रीय सत्ता की पूर्व स्वीकृति नहीं लेते हैं। अत : उन्हें प्रशासकीय कार्यों में पर्याप्त सीमा तक स्वतन्त्रता रहती है। इसके परिणामस्वरूप केन्द्रीय सत्ता को स्थानीय समस्याओं का ज्ञान नहीं हो पाता है तथा क्षेत्रीय अधिकारी स्वेच्छापूर्वक कार्य करते हैं।
  2. प्रशासन में एकरूपता का अभाव – इस पद्धति के अन्तर्गत विभिन्न क्षेत्रों में प्रशासन की नीति एवं सिद्धान्तों को कार्यान्वित करने के लिए भिन्न – भिन्न साधनों का प्रयोग किया जाता है , क्योंकि विभिन्न क्षेत्रों के अधिकारी अपने विवेकानुसार कार्य करने के लिए स्वतन्त्र होते हैं। इस प्रकार सम्पूर्ण देश के प्रशासन में एकरूपता अथवा समानता स्थापित नहीं हो पाती है।
  3. भ्रष्टाचार को प्रोत्साहन – विकेन्द्रीकरण पद्धति में कर्मचारियों की नियुक्ति तथा प्रशासन के लिए सामग्री एवं साधन जुटाने और उनके प्रयोग करने में अव्यवस्था हो सकती है जिसके कारण भ्रष्टाचार को प्रशासन में प्रवेश करने का सुअवसर मिल जाता है।
  4. राष्ट्रीय हितों की अवहेलना – विकेन्द्रीकरण पद्धति के विपक्ष में यह तर्क दिया जाता है कि इस व्यवस्था में स्थानीय अधिकारी अपनी स्थानीय समस्याओं में ही इतने व्यस्त हो जाते हैं कि उनको राष्ट्रीय समस्याओं पर विचार करने का अवसर ही नहीं मिल पाता है। अत : उन अधिकारियों में राष्ट्रीय चिन्तन का लोप हो जाता है और वे अदूरदर्शी तथा संकीर्ण विचार वाले बन जाते हैं।
  5. समन्वय का अभाव – इस व्यवस्था में क्षेत्रीय कार्यालय के पदाधिकारी को उसकी नीति निर्धारित करने का पूर्ण अवसर मिलता है। ऐसी दशा में एक क्षेत्रीय कार्यालय को यह अवसर प्राप्त हो जाता है कि वह राष्ट्रीय नीति से पृथक् अपनी निजी नीति का प्रतिपादन तथा अनुसरण करे। ऐसी दशा में विभिन्न क्षेत्रों की नीतियों के बीच समन्वय स्थापित नहीं हो सकता है।

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