व्हीटस्टोन सेतु का सिद्धांत क्या है

व्हीटस्टोन सेतु का सिद्धांत क्या है इसकी संरचना तथा सूत्र और उपयोग, सन् 1833 में इंग्लैंड के वैज्ञानिक सैमुएल हण्टर क्रिस्टी ने चार प्रतिरोधों की एक विशेष व्यवस्था द्वारा अज्ञात प्रतिरोध ज्ञात किया इस व्यवस्था को व्हीटस्टोन सेतु कहते हैं।

व्हीटस्टोन सेतु का प्रयोग हम अज्ञात प्रतिरोधो के मान को ज्ञात करने के लिए करते हैं।

12th, Physics, Lesson-4

यदि किसी चतुर्भुज A B C D की चार भुजाओं में चार प्रतिरोध क्रमशः P Q R तथा S जोड़ते है। चतुर्भुज के एक विकर्ण का संबंध धारामापी तथा दूसरे विकर्ण का संबंध सेल से करके प्रतिरोधो को इस प्रकार व्यवस्थित करते है कि धारामापी में कोई विक्षेप न हो तो संतुलन कि स्थिति में दो संलग्न प्रतिरोधों का अनुपात शेष दो संलग्न प्रतिरोधों के अनुपात के बराबर होता है। P/Q = R/S

व्हीटस्टोन सेतु का व्यंजक

चित्रानुसार एक परिपथ प्रदर्शित है जिसमें चार प्रतिरोध P Q R S लगे हैं। प्रतिरोध P में I₁ धारा, प्रतिरोध R में I₂ धारा, प्रतिरोध Q में (I₁ – Ig) धारा एवं प्रतिरोध S में (I₁ + Ig) धारा बहती है। विकर्ण B D का संबंध धारामापी g तथा विकर्ण A C का संबंध सेल और कुंजी K से होता है।

व्हीटस्टोन सेतु का सिद्धांत क्या है

परिपथ A B D A में, I₁ + Ig.G – I₂.R = 0, अब संतुलन की स्थिति में जो धारामापी से धारा बहती है वो Ig = 0, I₁.P + (0).G – I₂.R = 0, I₁.P = I₂.R = 0, I₁.P = I₂.R, I₁/I₂ =R/P समीकरण 1.

बंद परिपथ B D C B में, Ig.G + (I₂ + Ig).S – (I₁ – Ig).Q = 0, संतुलन की स्थिति में, Ig = 0, I₂.S – I₁.Q = 0, I₂.S = I₁.Q, Q/S = I₁/I₂ समीकरण 2.

समीकरण 1 व 2 से, R/P = Q/S या P/Q = R/S सिध्द है।

यह व्हीटस्टोन सेतु की संतुलन अवस्था की शर्त थी, इस प्रकार प्रतिरोध P तथा Q का अनुपात तथा प्रतिरोध R का मान ज्ञात होने पर अज्ञात प्रतिरोध S का मान ज्ञात किया जा सकता है।

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