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नौकरशाही के गुण तथा दोष क्या है?

नौकरशाही के गुण तथा दोष क्या है?

हेलो, दोस्तों आज की इस पोस्ट के माध्यम से, मैं आपको नौकरशाही के गुण तथा दोष के बारे में जानकारी देने वाला हूँ, यदि आप जानकारी पाना चाहते हो तो पोस्ट को पूरा पढ़कर जानकारी प्राप्त कर सकते हो। 

नौकरशाही के गुण

1. कार्य-कुशलता- इस पद्धति का प्रमुख गुण जो है कि यह प्रशासन को कार्यकुशलता प्रदान करती हैं।

2. प्रशासकीय एकता- प्रशासकीय एकता को दृढ़ता प्रदान करने में यह पद्धति विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध हुई है।

3. राजनीतिक तथा वैयक्तिक प्रभावों से दूर- इस व्यवस्था में पदाधिकारी एवं कर्मचारी राजनीतिक एवं वैयक्तिक प्रभावों से दूर रहकर अपने कर्तव्य का पालन करते हैं।

4. कानून का पालन- इस व्यवस्था का एक प्रमुख गुण यह है कि इसमें अधिकारी तथा कर्मचारी कानूनों का कठोरता से पालन करते हैं। अतः किसी के साथ पक्षपात नहीं किया जाता है।

 इस पद्धति का प्रमुख गुण जो है कि यह प्रशासन को कार्यकुशलता प्रदान करती हैं।

नौकरशाही के दोष

1. लकीर के फकीर- इस व्यवस्था में प्रायः करमचारी लकीर के फकीर बने रहते हैं। विनियम के इतने भक्त बन जाते हैं। की प्रत्येक स्थिति का दूर दर्शिता पूर्ण मूल्यांकन करें बिना ही सब के प्रति एक जैसा व्यवहार करते हैं।

2. अहं की भावना- नौकरशाही तंत्र का एक नकारात्मक पक्ष यह है कि इस व्यवस्था में प्रशासकीय कर्मचारी अनायास ही गर्वन्वित अनुभव करने लगते हैं। जनता से संपर्क स्थापित करने में वे अपनी मानहानि समझते हैं।

3. विभागीय महत्व पर बल- इस व्यवस्था में प्रत्येक विभाग स्वयं को आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं। इससे सरकार के कार्यों को अनेक पृथक एवं स्वाधीन खंडों में तोड़ने का प्रवृत्ति को प्रोत्साहन मिलता है।

4. औपचारिकता तथा प्रक्रियाओं का अक्षरशः पालन- इस व्यवस्था में अधिकारी तथा कर्मचारी नियमों तथा प्रक्रियाओं का अक्षरशः पालन करते हैं। उनके कार्य करने के साधन यांत्रिक तथा औपचारिक होते हैं।

दोषों को दूर करने के उपाय

1. संसद का नियंत्रण- लोक सेवा के कर्मचारियों पर संसद तथा मंत्री परिषद का भाव साली नियंत्रण होना चाहिए। इस प्रकार प्रशासकीय उत्तरदायित्व के सिद्धांत का व्यवहार अनुशीलन करना चाहिए।

2. योग्य मंत्रियों की नियुक्ति- नौकरशाही को नियंत्रित करना मंत्रियों का उत्तर दायित्व है। अतः योग्य मंत्रियों की नियुक्ति की जानी चाहिए जिससे वे इन्हें नियंत्रित कर सके।

3. प्रत्यायोजित विधि निर्माण की मात्रा में कमी- नौकरशाही की निरंकुशता को कम करने के लिए प्रत्यायोजित विधि निर्माण को सीमित करना आवश्यक है।

4. सत्ता का विकेंद्रीकरण- सत्ता का विकेंद्रीकरण प्रजातंत्र की आत्मा है। इससे नौकरशाही की बढ़ती हुई शक्ति में स्वता ही अवरोधन उत्पन्न हो जाएगा। इस प्रक्रिया के और भी अनेक प्रकार के लाभ होंगे।