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अल्प बेरोजगारी से आप क्या समझते हैं?

अल्प बेरोजगारी से आप क्या समझते हैं?

हेलो, दोस्तों आज की इस पोस्ट के माध्यम से, मैं आपको अल्प बेरोजगारी के बारे में जानकारी देने वाला हूँ, यदि आप जानकारी पाना चाहते हो तो पोस्ट को पूरा पढ़कर जानकारी प्राप्त कर सकते हो।

अल्प बेरोजगारी किसे कहते हैं?

किसी क्षेत्र में आवश्यकता से अधिक लोगों का नियोजन होना अल्प बेरोजगारी कहलाती है। कृषि क्षेत्र में, जहां परिवार के सभी सदस्य कार्य करते हैं, प्रत्येक व्यक्ति कुछ ना कुछ काम करता दिखाई पड़ता है, किंतु वास्तव में उनका श्रम प्रयास विभाजित है और किसी को भी पूर्ण रोजगार प्राप्त नहीं है। यह अल्प बेरोजगारी की स्थिति है। इसे छिपी अथवा प्रच्छन बेरोजगारी भी कहते हैं।

शहरी क्षेत्रों में सेवा, सेवा क्षेत्र में अल्प बेरोजगारी पाई जाती है। यहां हजारों अनियत श्रमिक पाए जाते हैं। जो दैनिक रोजगार की तलाश करते हैं। वह श्रम साध्य, कठिन एवं जोखिम पूर्ण कार्य करते हैं किंतु बहुत कम कमा पाते हैं।

अल्प बेरोजगारी के प्रमुख लक्षण

  1. कम वेतन - व्यक्ति को उसकी योग्यता और कौशल के मुकाबले कम वेतन मिलता है।
  2. अपूर्ण कार्य समय - व्यक्ति पूर्णकालिक नौकरी की बजाय अंशकालिक काम करता है।
  3. ओवरक्वालिफिकेशन - व्यक्ति की शिक्षा और कौशल की तुलना में काम की मांग कम होती है।

अल्प बेरोजगारी के कारण

  1. आर्थिक संकट - आर्थिक मंदी के दौरान, कंपनियां कम लोगों को काम पर रखती हैं, जिससे अल्प बेरोजगारी बढ़ती है।
  2. तकनीकी परिवर्तन - तकनीकी परिवर्तनों से कुछ कौशल पुराने पड़ जाते हैं, जिससे कर्मचारियों को उनकी क्षमता से कम पर काम करना पड़ता है।
  3. शिक्षा और कौशल में असंगति - अक्सर बाजार की मांग और उपलब्ध कौशल के बीच असंगति होती है, जिससे अल्प बेरोजगारी बढ़ती है।

अल्प बेरोजगारी के प्रभाव

  1. आर्थिक विकास में बाधा - अल्प बेरोजगारी से आर्थिक विकास प्रभावित होता है क्योंकि कार्यबल का पूर्ण उपयोग नहीं हो पाता।
  2. व्यक्तिगत और सामाजिक प्रभाव - इससे व्यक्तियों में आत्म-सम्मान की कमी, मानसिक तनाव और सामाजिक असमानता बढ़ती है।

समाधान के उपाय

  1. कौशल विकास प्रोग्राम - व्यक्तियों के कौशल और शिक्षा को बाजार की मांग के अनुरूप बढ़ाने के लिए कौशल विकास कार्यक्रम आवश्यक हैं।
  2. रोजगार सृजन - सरकार और निजी क्षेत्र को मिलकर नए रोजगार के अवसर सृजित करने चाहिए।
  3. नीतिगत पहल - सरकार को अल्प बेरोजगारी को कम करने के लिए नीतिगत पहल करनी चाहिए, जैसे कि उद्योगों को प्रोत्साहन देना जो अधिक रोजगार सृजन करते हैं।

निष्कर्ष

अल्प बेरोजगारी एक जटिल समस्या है जिसका समाधान व्यापक और समग्र दृष्टिकोण से किया जाना चाहिए। इसके लिए सरकार, उद्योग जगत, शिक्षा संस्थानों और समाज के सभी वर्गों को मिलकर काम करने की आवश्यकता है। ऐसे समन्वित प्रयासों से ही अल्प बेरोजगारी की समस्या का समाधान संभव है, जिससे सभी के लिए समृद्धि और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित हो सके।