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केंद्रीकरण के गुण तथा दोष क्या है?

केंद्रीकरण के गुण तथा दोष क्या है?

हेलो, दोस्तों आज की इस पोस्ट के माध्यम से, मैं आपको केंद्रीकरण के गुण तथा दोष के बारे में जानकारी देने वाला हूँ, यदि आप जानकारी पाना चाहते हो तो पोस्ट को पूरा पढ़कर जानकारी प्राप्त कर सकते हो। 

केंद्रीकरण के गुण तथा दोष बारे में 

इसके गुण व् दोष निम्न प्रकार से हैं -

केंद्रीकरण के गुण

  • प्रशासन में एकरूपता - केन्द्रीय व्यवस्था में सम्पूर्ण देश में सामान्य नीतियों व सिद्धान्तों के अनुसार कार्य किया जाता है। इस प्रकार कार्य का सम्पादन देश में एक ही ढंग से होता है जिसके परिणामस्वरूप प्रशासन में एकरूपता रहती है।
  • प्रभावशाली नियन्त्रण - केन्द्रीय व्यवस्था का प्रमुख गुण यह है कि इस व्यवस्था में प्रशासन में केन्द्रीय सत्ता का अधिक-से-अधिक नियन्त्रण रहता है। इस पद्धति पर आधारित प्रशासकीय संगठन में लोक-कर्मचारी, विशेषकर स्थानीय क्षेत्रों में अथवा स्थानीय कर्मचारी अपनी स्वेच्छाचारिता द्वारा नागरिकों का अहित नहीं कर सकते क्योंकि उन्हें प्रशासकीय अधिकारी का भय बना रहता है।
  • संकटकालीन सुरक्षा - केन्द्रीय व्यवस्था के अन्तर्गत संकटकालीन अवस्था में राष्ट्र की सुरक्षा अधिक अच्छी प्रकार हो जाती है।
  • अनियमितताओं का अभाव - केन्द्रीकृत व्यवस्था में नियमों की एकरूपता होने के कारण सभी कर्मचारी नियमित रूप से कार्य करते हैं तथा अनियमितताओं का अभाव होता है।
  • शक्ति की स्वाभाविक प्रवृत्ति - प्रायः देखने में आता है कि आधुनिक प्रजातन्त्रात्मक राज्यों में जहाँ संघात्मक शासन व्यवस्था विद्यमान है, केन्द्र अधिक शक्तिशाली होते जा रहे हैं।
  • मितव्ययिता - केन्द्रीकृत व्यवस्था में सभी साधन एक साथ जुटाए जाते हैं। इसमें प्रशासन में मितव्ययिता होती है।
  • पर्याप्त समन्वय-  केन्द्रीकृत व्यवस्था में विभिन्न इकाइयों के बीच पर्याप्त समन्वय रहता है।

केंद्रीकरण के दोष

  • प्रशासकीय कार्यों में विलम्ब - इस पद्धति के अनुसार संगठन करने से प्रशासकीय कार्य को सम्पन्न करने में अधिक विलम्ब होता है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि प्रत्येक प्रशासकीय कार्य के लिए केन्द्रीय सत्ता की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य होती है। अत: क्षेत्रीय अथवा स्थानीय कार्यालय के पदाधिकारी यदि लोकहित के लिए कोई कार्य करना चाहते हैं तो उन्हें केन्द्रीय सत्ता की पूर्व स्वीकृति लेनी होती है। बिना पूर्व स्वीकृति के वे उस कार्य को नहीं कर सकते परिणामस्वरूप केन्द्रीय सत्ता की पूर्व स्वीकृति पाने में समय व्यर्थ ही नष्ट होता है।
  • प्रशासन में कठोरता - विद्वानों का मत है कि केन्द्रीकृत पद्धति के द्वारा प्रशासन में कठोरता उत्पन्न हो जाती है।प्रशासकीय कर्मचारियों को केन्द्रीय सत्ता की आज्ञाओं तथा आदेशों का अक्षरशः पालन करना पड़ता है। वे प्रशासन में अपनी बुद्धि तथा विवेक का अधिक प्रयोग नहीं कर सकते हैं।
  • अकुशलता को प्रोत्साहन - केन्द्रीकृत प्रशासन में एकरूपता पर अधिक बल दिया जाता है और स्थानीय परिस्थितियों की जानकारी के लिए विशेष समय नहीं दिया जाता है। अत: यह व्यवस्था शासन के लिए हानिकारक सिद्ध होती है और इसके अतिरिक्त इसमें अकुशलता को प्रोत्साहन मिलता है।
  • केन्द्र पर असह्य भार - केन्द्रीकृत व्यवस्था के विपक्ष में आलोचकों का एक आरोप यह भी है कि इस व्यवस्था के अन्तर्गत अधिकारियों पर कार्य की इतनी अधिकता रहती है कि वे उसे कुशलतापूर्वक सम्पन्न नहीं कर सकते हैं। डेविड बी० टूमैन ने लिखा है- “एक केन्द्रीकृत प्रशासन क्योंकि असह्य मात्रा में उत्तरदायित्व को अपने आप लाद लेता है; अत: समय-समय पर पड़ने वाले भार व दबाव के कारण वह शक्तिहीनता को आमन्त्रित करता है।"
  • स्थानीय अधिकारियों में उत्साह और लगन की कमी - इस व्यवस्था में क्षेत्रीय अधिकारियों को स्वविवेकीय शक्तियाँ प्राप्त नहीं होती हैं; अत: कभी-कभी वे पूरे उत्साह और लगन के साथ अपने उत्तरदायित्व को नहीं निभाते है।