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मेंडलीफ की आवर्त सारणी की सीमाएं

मेंडलीफ की आवर्त सारणी की सीमाएं

हेलो, दोस्तों आज की इस पोस्ट के माध्यम से, मैं आपको मेंडलीफ की आवर्त सारणी के बारे में जानकारी देने वाला हूँ, यदि आप जानकारी पाना चाहते हो तो पोस्ट को पूरा पढ़कर जानकारी प्राप्त कर सकते हो।

मेंडलीफ की आवर्त सारणी की सीमाएं

मेंडलीफ की आवर्त सारणी की मुख्य सीमाएं (दोष) निम्नलिखित हैं-

(i) हाइड्रोजन का स्थान-इस सारणी में हाइड्रोजन को प्रथम समूह में क्षार-धातुओं के साथ उनके समान धन-विद्युती गुण के कारण तथा सप्तम समूह में हैलोजेन के साथ उनके समान ऋण-विद्युती गुण के कारण दो स्थानों पर रखा गया है, परन्तु हाइड्रोजन को दोनों समूहों (प्रथम तथा सप्तम) में रखा जाना दोषपूर्ण है।

(ii) असमान गुणों वाले तत्वों को एक ही समूह में रखना-इस सारणी में तत्वों को गुणों की समानता के आधार पर एक-साथ रखा गया है, फिर भी कुछ तत्व ऐसे हैं जिनके गुणों में असमानताएँ हैं। दूसरे शब्दों में, कुछ तत्व भिन्न-भिन्न गुणों वाले होते हुए भी एक समूह में रखे गए हैं जैसे I-A के तत्वों (क्षार धातुएँ) तथा I-B के तत्वों (सिक्का धातुएँ) को एक ही समूह
में रखा गया है, जबकि इनके गुणों में भिन्नता है।

(iii) समान गुणों वाले तत्वों को भिन्न-भिन्न समूहों में रखना-
मेण्डेलीफ की आवर्त सारणी में कहीं-कहीं समान गुण वाले तत्वों को भिन्न-भिन्न स्थानों पर रखा गया है जैसे Pt (195.09) तथा Au (196.97) के के गुणों में समानताएं हैं, फिर भी उन्हें आठवें तथा पहले समूह में रखा गया है। इसके अतिरिक्त कापर वह पारा,बेरियम वाले‌ लेड इत्यादि के गुण समान होते हुए भी उन्हें भिन्न-भिन्न समूह में रखा गया है।

(iv) भारी तत्वों को हल्के तत्वों से पहले रखना-मेण्डेलीफ की आवर्त सारणी में कुछ भारी तत्वों को हल्के तत्वों से पहले रखा गया है जैसे-

(क) कोबाल्ट (परमाणु भार = 58.93), निकिल (परमाणु भार =58.71) से पहले रखा गया है।

(ख) टेल्यूरियम (परमाणु भार = 127.6), आयोडीन (परमाणु भार =126.9) से पहले रखा गया है।

मेण्डेलीफ की मूल आवर्त सारणी में परमाणु भारों के बढ़ते हुए क्रम में इस प्रकार के परिवर्तन मेण्डेलीफ के मूल आवर्त नियम के विपरीत हैं।


(v) दुर्लभ मृदा तत्वों का स्थान-दुर्लभ मृदा तत्वों के रासायनिक गुणों में समानताएँ हैं, परन्तु इनके परमाणु भार भिन्न हैं। फिर भी इन 14,14 तत्वों को तीसरे उपसमूह B (छठे आवर्त) में एक साथ रखा गया है जो उचित नहीं है।

(vi) समस्थानिकों का स्थान-समस्थानिकों तथा समभारिकों की खोज से यह स्पष्ट हो गया कि तत्वों का मूल लक्षण उनका परमाणु भार नहीं होता। समस्थानिकों के परमाणु भार भिन्न होते हैं, परन्तु उनके गुण समान होते हैं। समभारिकों के परमाणु भार समान होते हैं, परन्तु उनके गुण भिन्न होते हैं। अत मेण्डेलीफ की मूल आवर्त सारणी में समस्थानिकों का स्थान निश्चित
नहीं है।

(vii) आठवीं समूह के तत्वों को तीन ऊर्ध्वाधर स्तंभों में रखा जाना।