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प्रकाश वैद्युत प्रभाव के नियम क्या है?

प्रकाश वैद्युत प्रभाव के नियम क्या है?

हेलो दोस्तों मेरा नाम है भूपेंद्र और आज के इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे प्रकाश वैद्युत प्रभाव के नियम क्या है इसके बारे में हम आपको पूरी जानकारी देंगे इसलिए आप हमारे इस आर्टिकल को पूरा पढ़ें।

प्रकाश वैद्युत प्रभाव के नियम

प्रकाश वैद्युत प्रभाव एक महत्वपूर्ण भौतिकी की घटना है, जिसे 1887 में हेनरिच हर्ट्ज़ ने खोजा था। इस प्रभाव के अंतर्गत, जब किसी धातु की सतह पर प्रकाश की किरणें पड़ती हैं, तो धातु की सतह से इलेक्ट्रॉन्स निकलते हैं। इस घटना को समझाने के लिए निम्नलिखित नियम प्रस्तुत किए गए हैं -

आवृत्ति की न्यूनतम सीमा (Threshold Frequency)

प्रत्येक धातु की एक न्यूनतम आवृत्ति होती है, जिसे 'थ्रेशोल्ड फ्रीक्वेंसी' कहते हैं। केवल उस आवृत्ति या उससे अधिक आवृत्ति वाले प्रकाश के पड़ने पर ही इलेक्ट्रॉन्स निकलते हैं। अगर प्रकाश की आवृत्ति इस न्यूनतम सीमा से कम है, तो इलेक्ट्रॉन्स निकलना संभव नहीं होता, भले ही प्रकाश की तीव्रता कितनी भी अधिक क्यों न हो।

इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा और प्रकाश की आवृत्ति का संबंध

निकलने वाले इलेक्ट्रॉन्स की अधिकतम ऊर्जा प्रकाश की आवृत्ति के सीधे अनुपाती होती है। इसका अर्थ है कि जैसे-जैसे प्रकाश की आवृत्ति बढ़ती है, निकलने वाले इलेक्ट्रॉन्स की ऊर्जा भी बढ़ती है।

प्रकाश की तीव्रता और इलेक्ट्रॉन की संख्या का संबंध

प्रकाश की तीव्रता बढ़ाने से निकलने वाले इलेक्ट्रॉन्स की संख्या बढ़ जाती है, लेकिन इलेक्ट्रॉन्स की ऊर्जा प्रकाश की तीव्रता से प्रभावित नहीं होती। यह ऊर्जा केवल प्रकाश की आवृत्ति पर निर्भर करती है।

तात्कालिक प्रतिक्रिया

प्रकाश के पड़ते ही इलेक्ट्रॉन्स का निकलना तत्काल होता है। इसमें कोई विलंब नहीं होता, जो दर्शाता है कि इलेक्ट्रॉन्स का निकलना प्रकाश की ऊर्जा से सीधे संबंधित है।

अल्बर्ट आइंस्टीन ने प्रकाश वैद्युत प्रभाव को समझाने के लिए फोटॉन सिद्धांत का प्रस्ताव दिया, जिसके लिए उन्हें 1921 में भौतिकी में नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ। उन्होंने बताया कि प्रकाश ऊर्जा क्वांटा (फोटॉन) में पैकेज्ड होती है, और जब ये फोटॉन किसी धातु की सतह से टकराते हैं, तो वे अपनी ऊर्जा इलेक्ट्रॉन्स को स्थानांतरित कर देते हैं, जिससे इलेक्ट्रॉन्स निकलते हैं। यह सिद्धांत आधुनिक भौतिकी में कई तकनीकी अनुप्रयोगों की नींव है।