विद्युत बल रेखाएं किसे कहते हैं (12th, Physics, Lesson-1)

विद्युत बल रेखाएं के बारे में

विद्युत बल रेखाएं विद्युत क्षेत्र में खींचा गया वह काल्पनिक चिकना वक्र (smooth curve) है, जिसके किसी भी बिंदु पर खींची गई स्पर्श रेखा, उस बिंदु पर विद्युत क्षेत्र का की दिशा प्रदर्शित करती है। अर्थात उस बिंदु पर रखे धनावेश पर लगने वाले बल की दिशा व्यक्त करती है।

यदि किसी विद्युत क्षेत्र में धन आवेश चलने के लिए स्वतंत्र हो, तो वह इस आवेश पर लगने वाले बल की दिशा में चलने लगेगा। चूंकि बल की दिशा एवं परिमाण इस विद्युत क्षेत्र के भिन्न-भिन्न बिंदुओ पर भिन्न-भिन्न होती है, अतः इस आवेश का मार्ग वक्राकार होगा। इस वक्राकार मार्ग को विद्युत बल रेखा कहते हैं।

  1. B चित्र में आप देख सकते हैं कि ऋणावेशित गोले की विद्युत बल रेखाएं प्रदर्शित है। स्पष्ट है कि अकेले ऋणावेशित गोले से उत्पन्न विद्युत क्षेत्र में किसी धनावेश को रखने पर वह आकर्षण बल का अनुभव करेगा तथा अनन्त से चलकर ऋण आवेश तक आ जाएगा। अतः ऋणावेशित गोले के कारण बल रेखाएं अनन्त से सरल रेखा में ऋण आवेश तक आती है।
  2. C चित्र में आप देख सकते हैं कि विद्युत द्विध्रुभ अर्थात अल्प दूरी पर रखे दो बराबर तथा विपरीत आवेशों से उत्पन्न विद्युत बल रेखा प्रदर्शित है। यह बल रेखाएं धन आवेश से प्रारंभ होकर ऋण आवेश पर समाप्त हो जाती है।
  3. D चित्र में आप देख सकते हैं कि अल्प दूरी पर रखे दो समान तथा बराबर धनावेश से उत्पन्न बल रेखाएं दिखायी गयी है। स्पष्ट है कि आवेशों को मिलाने वाली रेखा के मध्य बिंदु P पर यदि कोई आवेश रखा जाये तो उस पर दोनों आवेशों द्वारा आरोपित बलों के परिमाण बराबर तथा दिशाएं विपरीत होती है अर्थात परिणामी बल शून्य होता है, अतः यहां आवेश किसी भी दिशा में नहीं चलता है। इस बिंदु को उदासीन बिंदु (neutral point) कहते हैं।
विद्युत बल रेखाएं किसे कहते हैं (12th, Physics, Lesson-1)

विद्युत बल रेखाओं के गुण

  1. विद्युत बल रेखाएं धन आवेश से उत्पन्न होती है और ऋण आवेश पर समाप्त हो जाती है।
  2. यह विद्युत बल रेखा के किसी भी बिंदु पर खींची गई स्पर्श रेखा उस बिंदु पर रखे धन आवेश पर लगने वाले बल अर्थात विद्युत क्षेत्र की दिशा प्रदर्शित करती है।
  3. ये विद्युत बल रेखाएं खींची प्रत्यास्थ डोरी की भांति लंबाई में सिकुड़ने की चेष्टा करती है। इसी कारण विजातीय आवेशो में आकर्षण होता है।
  4. विद्युत बल रेखाएं अपनी लंबाई की लंबवत दिशा में परस्पर दूर हटने की चेष्टा करती है। इसी कारण सजातीय आवेश प्रतिकर्षण होता है।
  5. आवेशित चालक से निकलने वाली बल रेखाएं, चालक के तल के लंबवत होती है। यह बल संवृती वक्र (closed curves) न होकर, खुले वक्र (open curves) होती है।
  6. किसी स्थान पर बल रेखाओं का दूर-दूर होना, विद्युत क्षेत्र का क्षीण होना प्रदर्शित करता है तथा बल रेखाओं का पास-पास होना, विद्युत क्षेत्र का तीव्र होना प्रदर्शित करता है।
  7. चूंकि किसी भी बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की केवल एक ही दिशा हो सकती है, अतः प्रत्येक बिंदु पर से केवल एक ही बल रेखा गुजर सकती है। यही कारण है कि विद्युत बल रेखाएं परस्पर कभी नहीं काटती है। यदि दो बल रेखा काटती, तो कटान बिंदु पर दो स्पर्श रेखा खींची जा सकती है, जो उस बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की दो दिशाएं प्रदर्शित करेगी, लेकिन यह असम्भव है।
  8. एकसमान विद्युत क्षेत्र में खींची गई विद्युत बल रेखाएं परस्पर समानांतर होती हैं।

विद्युत बल रेखाओं तथा चुम्बकीय बल रेखाओं में अंतर

विद्युत बल रेखाएंचुम्बकीय बल रेखाएं
ये खुले वक्र होती है।यह बंद वक्र होती है।
यह सदैव आवेशित पृष्ठ के लंबवत होती हैं।इनका चुंबक की सतह के लंबवत होना आवश्यक नहीं है, यह किसी भी दिशा में हो सकती हैं।
ये चालक के अंदर उपस्थित नहीं होती है।यह चुंबक के अंदर भी उपस्थित रहती हैं।
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विद्युत बल रेखाओं के उपयोग

  1. विद्युत बल रेखाओं से किसी आवेश या आवेश निकाय के कारण उत्पन्न विद्युत क्षेत्र की जानकारी प्राप्त होती है। जहां विद्युत बल रेखा सघन होती है, वहां विद्युत क्षेत्र प्रबल होता है तथा जहां विद्युत बल रेखा विरल होती है, वहां विद्युत क्षेत्र क्षीण होता है। यदि विद्युत बल रेखाएं परस्पर समानांतर तथा समदूरस्थ होती है तो विद्युत क्षेत्र एकसमान होता है।
  2. यह विद्युत बल रेखा के किसी भी बिंदु पर स्पर्श रेखा खींचकर उस बिंदु पर विद्युत क्षेत्र की दिशा ज्ञात की जा सकती है।

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