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प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदा के बीच का अंतर? | natural disaster | man-made disaster

प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदा के बीच का अंतर? | natural disaster | man-made disaster

हेलो, दोस्तों आज की इस पोस्ट के माध्यम से, मैं आपको आपदा के बारे में जानकारी देने वाला हूँ, यदि आप जानकारी पाना चाहते हो तो पोस्ट को पूरा पढ़कर जानकारी प्राप्त कर सकते हो। 

प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाएं दोनों ही समाज और पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव डालती हैं, लेकिन उनके कारण, प्रकृति और प्रभावों में महत्वपूर्ण अंतर होते हैं।

आपदा की परिभाषा

"खतरे का बहुत स्वरूप जिसके कारण सामाजिक ढांचा एवं विद्यमान व्यवस्था चरमरा जाए तथा जन समुदाय, पशुधन व अन्य संपत्ति की क्षतिपूर्ति हेतु बाहरी सहायता की आवश्यक अनुभव की जाए, आपदा कहलाती है।

प्राकृतिक आपदा (Natural Disaster)

  • कारण: प्राकृतिक आपदाएं पृथ्वी की प्राकृतिक प्रक्रियाओं और घटनाओं के कारण होती हैं। इसमें भूकंप, चक्रवात, बाढ़, सूखा, ज्वालामुखी विस्फोट, तूफान, और त्सुनामी शामिल हैं।
  • नियंत्रण: प्राकृतिक आपदाओं को रोकना संभव नहीं होता है, लेकिन उनके प्रभाव को कम करने के लिए तैयारी और जोखिम प्रबंधन किए जा सकते हैं।
  • प्रभाव: प्राकृतिक आपदाएं अक्सर व्यापक क्षति, मानवीय हानि, और पर्यावरणीय नुकसान पैदा करती हैं।
  • यह नितांत प्राकृतिक होती हैं।
  • इनके लिए प्राकृतिक कारक - स्थलीय, वायु जनित या जलीय उत्तरदाई है।
  • प्राकृतिक आपदाएं विध्वंसक एवं रचनात्मक दोनों होती हैं।
  • इनका पूर्वानुमान लगाना लगभग असंभव है।
  • आपदा पूर्व प्रबंधन के द्वारा इनसे होने वाली क्षति को न्यूनतम किया जा सकता है परंतु इन्हें रोकना संभव नहीं है। 

मानव निर्मित आपदा (Man-made Disaster)

  • कारण: मानव निर्मित आपदाएं मानव क्रियाकलापों और त्रुटियों के कारण होती हैं। इसमें औद्योगिक दुर्घटनाएं, नाभिकीय विस्फोट, रासायनिक रिसाव, युद्ध, आग, और तेल रिसाव शामिल हैं।
  • नियंत्रण: मानव निर्मित आपदाओं को रोकने के लिए सुरक्षा मानकों, नियमों, और जागरूकता कार्यक्रमों को लागू करना संभव है।
  • प्रभाव: मानव निर्मित आपदाएं भी गंभीर व्यक्तिगत और सामाजिक हानि, पर्यावरणीय क्षति, और आर्थिक नुकसान का कारण बनती हैं।
  • यह आता है मानव द्वारा उत्पन्न होती है।
  • इनके लिए मानवीय कारक - असावधानी, भूल या स्वयं मानव द्वारा की गई लापरवाही उत्तरदाई है।
  • मानवीय आपदाएं सदैव विध्वंसक होती है।
  • इनका पूर्वानुमान लगाया जा सकता है।
  • इनको प्रबंधन एवं सावधानी द्वारा रोकसंभव ना है।

मुख्य अंतर

  • कारण: प्राकृतिक आपदाएं प्रकृति की गतिविधियों से उत्पन्न होती हैं, जबकि मानव निर्मित आपदाएं मानवीय कार्यों या लापरवाही से होती हैं।
  • नियंत्रण और रोकथाम: प्राकृतिक आपदाओं के विपरीत, मानव निर्मित आपदाओं को उचित योजना और प्रबंधन के माध्यम से काफी हद तक रोका जा सकता है।
  • प्रभाव का प्रकार: दोनों ही प्रकार की आपदाएं विनाशकारी होती हैं, लेकिन मानव निर्मित आपदाओं के प्रभावों को अक्सर रोका जा सकता है या कम किया जा सकता है जबकि प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव पूर्वानुमान और तैयारी के बावजूद अपरिहार्य होते हैं।